भारत में रहने वाला हर व्यक्ति हिंदू...गोरखपुर में कार्यक्रम को संबोधित करते हुए बोले RSS प्रमुख मोहन भागवत

RSS प्रमुख डॉ. मोहन भागवत ने एक कार्यक्रम के दौरान प्रमुख जन को संबोधित करते हुए कहा कि इस देश में रहने वाला प्रत्येक व्यक्ति हिन्दू है. उन्होंने कहा कि हिंदू समाज मानता है कि हमारा रास्ता भी ठीक है और तुम्हारा भी. भले ही हमारे रास्ते अलग-अलग हो सकते हैं परंतु हमरा लक्ष्य एक है.

Utsav Singh
Edited By: Utsav Singh

उत्तर प्रदेश : गोरक्ष प्रांत के तारामंडल क्षेत्र में योगीराज गंभीरनाथ प्रेक्षागृह में आयोजित कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख डॉ मोहन भागवत ने हिन्दू समाज की मूल भावना को स्पष्ट किया. उनका कहना था कि अलग-अलग रास्ते हो सकते हैं लेकिन लक्ष्य एक ही है और यही हिन्दू समाज की पहचान है. उन्होंने संघ के उद्देश्य को राष्ट्रहित से जोड़ा और बताया कि संघ सत्ता या लोकप्रियता नहीं चाहता बल्कि समाज को स्वस्थ बनाने का प्रयास करता है. भागवत ने भारतीय संस्कृति की सहिष्णुता और समन्वय पर बल देते हुए कहा कि यही हमारी शक्ति है. 

हिन्दू शब्द का असली अर्थ

आपको बता दें कि डॉ भागवत ने समझाया कि हिन्दू कोई संज्ञा नहीं बल्कि विशेषण है जो मिलजुल कर चलने और सबके हित में सोचने वाले गुण को दर्शाता है. यह नाम भारत के साथ जुड़ गया है इसलिए सनातन धर्म इसी से जागेगा. जो लोग अपनी हिन्दू पहचान भूल गए हैं उन्हें याद दिलाना जरूरी है ताकि समाज मजबूत खड़ा हो सके.

संघ का उद्देश्य और स्वभाव

संघ प्रमुख ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ किसी की प्रतिक्रिया या विरोध में नहीं बना. यह स्वतंत्र और स्वावलंबी संगठन है जो केवल राष्ट्र के लिए काम करता है. संघ प्रभाव या सत्ता का लालची नहीं है बल्कि समाज के हर अच्छे कार्य में सहयोग देता है. उन्होंने बाइबिल के संदर्भ से कहा कि हम नष्ट करने नहीं बल्कि निर्माण करने आए हैं.

संघ शताब्दी वर्ष में समाज तक पहुंच रहा

भागवत ने बताया कि पाश्चात्य प्रभाव से भारतीय ज्ञान परंपरा को नुकसान पहुंचाने की कोशिश हुई लेकिन वह अधूरी थी. भारतीय चिंतन ही शंकाओं का समाधान दे सकता है. इसलिए संघ शताब्दी वर्ष में समाज तक पहुंच रहा है ताकि लोग संगठित हों और विश्व भी भारत की ओर आशा से देख रहा है. 

स्वतंत्रता संग्राम की चार धाराएं

संघ प्रमुख ने स्वतंत्रता आंदोलन की चार मुख्य धाराओं का जिक्र किया. पहली क्रांति की राह थी जिसमें सुभाष बोस शामिल थे. दूसरी राजनीतिक जागृति पैदा करने वाली थी. तीसरी आधुनिक ज्ञान और समाज सुधार की थी. चौथी मूल की ओर लौटने वाली थी जिसे विवेकानंद और दयानंद ने आगे बढ़ाया. डॉ हेडगेवार इन सबसे जुड़े रहे. 

पंच परिवर्तन से सशक्त समाज

भागवत ने कहा कि संघ का सौ साल बाद अब विस्तार और सुदृढ़ीकरण का समय है. इसलिए पंच परिवर्तन विषय लाया गया जिसमें सामाजिक समरसता, नागरिक कर्तव्य, पर्यावरण संरक्षण, परिवार जागरण और स्व की समझ शामिल है. इनके जरिए पूरा समाज संगठित होकर भव्य और सशक्त बनेगा. यही संघ का मुख्य लक्ष्य है.

ताजा खबरें

ट्रेंडिंग वीडियो

close alt tag