ट्रंप के डर से भारतीय कंपनियों ने रूस से तेल खरीदना किया बंद? जानें क्या है विदेश मंत्रालय का जवाब

अमेरिकी दबाव और रूसी तेल पर छूट में कटौती के कारण भारतीय सरकारी तेल कंपनियों ने रूस से कच्चे तेल की खरीद अस्थायी रूप से रोकी, हालांकि विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट जानकारी से इनकार किया. निजी कंपनियां अब भी खरीद जारी रखे हुए हैं और विकल्पों की तलाश जारी है.

Yaspal Singh
Edited By: Yaspal Singh

अमेरिकी प्रतिबंधों और राजनीतिक दबाव की आशंका के चलते भारतीय सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों ने रूस से कच्चे तेल की खरीद अस्थायी रूप से रोक दी है. इन खबरों के अनुसार, यह फैसला अमेरिका द्वारा प्रस्तावित व्यापारिक नीतियों और शुल्कों के कारण लिया गया है.

विदेश मंत्रालय की प्रतिक्रिया

इन अटकलों के बीच भारत के विदेश मंत्रालय ने स्थिति स्पष्ट की है. प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शुक्रवार को मीडिया से बातचीत में कहा कि मंत्रालय को इस मामले में किसी विशेष निर्णय या बदलाव की जानकारी नहीं है. उन्होंने बताया, “भारत की ऊर्जा नीति व्यापक है और हम वैश्विक बाजार की परिस्थितियों, आपूर्ति विकल्पों और अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक परिदृश्य को ध्यान में रखते हुए निर्णय लेते हैं.”

अमेरिका का रवैया 

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में एक शासकीय आदेश जारी कर भारत समेत कई देशों पर शुल्क बढ़ाने की घोषणा की. इस आदेश में भारत पर 25% टैरिफ लगाने की बात भी शामिल है. ट्रंप ने स्पष्ट रूप से कहा कि यदि रूस और यूक्रेन के बीच कोई बड़ा शांति समझौता नहीं होता है, तो रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 100% शुल्क लगाया जा सकता है. इसके साथ ही छह भारतीय कंपनियों पर ईरानी पेट्रोकेमिकल उत्पादों की खरीद-बिक्री को लेकर भी प्रतिबंध लगाए गए हैं.

रूसी तेल की कीमतों में बदलाव

भारत को रूस से मिलने वाले कच्चे तेल पर पहले जो भारी छूट मिलती थी, वह अब काफी कम हो गई है. 2022 में जहां रूस ने रियायती दरों पर तेल बेचकर भारत को बड़ा आपूर्तिकर्ता बनाया था, वहीं अब यह छूट घटकर सिर्फ 3 डॉलर प्रति बैरल रह गई है. यह 2022 के बाद की सबसे कम छूट मानी जा रही है.

तेल खरीद में बदलाव की रिपोर्टें

रॉयटर्स और अन्य एजेंसियों ने सूत्रों के हवाले से कहा है कि इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC), हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL), भारत पेट्रोलियम (BPCL), और मैंगलोर रिफाइनरी (MRPL) ने बीते सप्ताह से रूस से तेल खरीद पर रोक लगा दी है. हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है.

भारत का तेल आयात 

भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक है और रूस, यूक्रेन युद्ध के बाद इसका सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता बन गया है. मई 2025 में भारत ने रूस से 1.96 मिलियन बैरल प्रतिदिन तेल मंगाया था, जो पिछले 10 महीनों में सबसे अधिक था.

अब सरकारी कंपनियां अबू धाबी के मुरबान क्रूड और पश्चिमी अफ्रीका से तेल खरीदने की ओर बढ़ रही हैं. वहीं, निजी कंपनियां जैसे रिलायंस इंडस्ट्रीज और नयारा एनर्जी (जिसमें रूस की रोसनेफ्ट की हिस्सेदारी है) अभी भी रूसी तेल की खरीद कर रही हैं.

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