केमिकल, दवाओं और मेडिकल उपकरण तक...भारत-ईयू ट्रेड डील से क्या-क्या हो जाएगा सस्ता?

भारत-ईयू ने ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौता पूरा किया, जिससे आयात शुल्क घटेंगे, यूरोपीय उत्पाद सस्ते होंगे और व्यापार बढ़ेगा. यह करार उद्योग, उपभोक्ताओं और निवेश को लाभ पहुंचाते हुए वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूती देगा.

Yaspal Singh
Edited By: Yaspal Singh

नई दिल्लीः भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) ने मंगलवार को एक बहुप्रतीक्षित और दूरगामी मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर बातचीत सफलतापूर्वक पूरी कर ली. इसे अब तक दोनों पक्षों के बीच हुआ सबसे बड़ा और सबसे महत्वाकांक्षी व्यापारिक समझौता माना जा रहा है. ऐसे समय में जब वैश्विक अर्थव्यवस्था अनिश्चितता और भू-राजनीतिक तनावों से जूझ रही है, यह करार खुले, पारदर्शी और नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यापार के प्रति भारत और ईयू की साझा सोच को दर्शाता है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस समझौते को 'सभी समझौतों की जननी' करार देते हुए कहा कि भारत और यूरोपीय संघ मिलकर वैश्विक जीडीपी का लगभग एक-चौथाई और दुनिया के कुल व्यापार का करीब एक-तिहाई हिस्सा रखते हैं. उनका मानना है कि यह समझौता कीमतों में कमी, उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूती देने में अहम भूमिका निभाएगा.

भारतीय उपभोक्ताओं को क्या मिलेगा फायदा?

इस समझौते के बाद भारतीय बाजार में कई यूरोपीय उत्पाद सस्ते होने की उम्मीद है. औद्योगिक और तकनीकी वस्तुओं पर आयात शुल्क में भारी कटौती या पूरी तरह समाप्ति की जाएगी.

रसायनों पर लगने वाला 22 प्रतिशत शुल्क हटाया जाएगा. मशीनरी पर 44% तक के ऊंचे टैरिफ में बड़ी राहत मिलेगी, जिससे उत्पादन लागत घटेगी. दवाओं पर लगभग 11% शुल्क समाप्त होने से स्वास्थ्य क्षेत्र को लाभ होगा. वहीं, चिकित्सा और शल्य उपकरणों के करीब 90% उत्पाद शुल्क-मुक्त हो जाएंगे. विमान और अंतरिक्ष से जुड़े अधिकतर उत्पादों पर भी आयात शुल्क नहीं लगेगा.

ऑटोमोबाइल और ऑटो पार्ट्स को बढ़ावा

यूरोपीय कारों के आयात पर शुल्क को चरणबद्ध तरीके से घटाकर 10% किया जाएगा, हालांकि यह 2.5 लाख वाहनों के वार्षिक कोटे के तहत लागू होगा. इससे प्रीमियम कारें भारतीय ग्राहकों के लिए अपेक्षाकृत सस्ती हो सकती हैं. ऑटो पार्ट्स पर लगने वाले शुल्क को 5 से 10 वर्षों में पूरी तरह खत्म किया जाएगा, जिससे घरेलू ऑटो उद्योग और सप्लायर्स को मजबूती मिलेगी.

खाने-पीने की चीजों पर असर

भारतीय उपभोक्ताओं को कुछ आयातित खाद्य और पेय पदार्थों पर भी राहत मिलेगी. जैतून के तेल, कुछ वनस्पति तेलों और मार्जरीन पर शुल्क कम या समाप्त होगा. फलों के रस और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों पर आयात शुल्क हटाया जाएगा. बीयर पर शुल्क घटकर 50% रह जाएगा, जबकि वाइन पर यह धीरे-धीरे 20–30% के स्तर पर आ जाएगा.

व्यापार और निवेश को नई गति

वर्तमान में भारत और यूरोपीय संघ के बीच सालाना व्यापार 180 अरब यूरो से अधिक का है. इस समझौते के तहत भारत में ईयू के 90% से ज्यादा उत्पादों पर कम या शून्य शुल्क लगेगा. इससे यूरोपीय निर्यातकों को हर साल करीब 4 अरब यूरो की बचत होने का अनुमान है, जिसका फायदा अंततः भारतीय उपभोक्ताओं और उद्योगों को मिलेगा.

यह समझौता भारत द्वारा किसी भी व्यापारिक साझेदार को दी गई सबसे बड़ी रियायत माना जा रहा है. इससे यूरोपीय कंपनियों को 1.45 अरब आबादी वाले, तेजी से बढ़ते भारतीय बाजार तक विशेष पहुंच मिलेगी, जबकि छोटे और मध्यम व्यवसायों के लिए अलग प्रावधान कर उन्हें नए अवसरों से जोड़ने की कोशिश की गई है.

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