भारत-ईयू की डील से भड़का अमेरिका, रूस-भारत तेल व्यापार को लेकर ट्रंप के मंत्री ने कही ये बड़ी बात
भारत और यूरोपीय संघ ने मुक्त व्यापार समझौते को अंतिम रूप दिया, जबकि अमेरिका ने भारत-रूस तेल व्यापार पर आलोचना की. ट्रंप प्रशासन ने टैरिफ बढ़ाए, वहीं कनाडा भारत के साथ आर्थिक-रणनीतिक संबंध मजबूत कर रहा है.

नई दिल्लीः भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) ने डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ-आधारित व्यापार नीति के प्रभाव को कम करने के उद्देश्य से अपने मुक्त व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया पूरी की है. नई दिल्ली में अधिकारियों ने इसे कानूनी जांच के लिए अंतिम रूप दे दिया है, हालांकि औपचारिक हस्ताक्षर अभी होने हैं. यह समझौता दोनों पक्षों के बीच आर्थिक संबंधों को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.
यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने इस समझौते को "सभी समझौतों की जननी" कहा. समझौते का उद्देश्य अमेरिकी टैरिफ से प्रभावित व्यापार को संतुलित करना और भारत-ईयू आर्थिक संबंधों को बढ़ावा देना है.
अमेरिका का विरोध और रूस-तेल विवाद
इस बीच, अमेरिका ने भारत-रूस तेल व्यापार को लेकर कड़ी टिप्पणियां शुरू कर दी हैं. अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा कि यूरोपीय देशों द्वारा भारत से परिष्कृत रूसी तेल खरीदने से यूक्रेन में युद्ध को अप्रत्यक्ष रूप से वित्तीय मदद मिल रही है. बेसेंट ने स्पष्ट किया कि रूस से तेल भारत आता है, परिष्कृत उत्पाद यूरोप में बेच दिए जाते हैं, जिससे यूरोपीय देश खुद के खिलाफ युद्ध में योगदान दे रहे हैं.
ट्रंप प्रशासन ने भारत पर कुल 50 प्रतिशत टैरिफ लगाया है, जिसमें रूसी तेल पर 25 प्रतिशत टैरिफ शामिल है. बेसेंट ने यह भी कहा कि अमेरिका ने रूस-यूक्रेन संघर्ष को सुलझाने के लिए कई बलिदान दिए हैं और इसके समाधान की दिशा में काम कर रहा है.
ट्रंप का संदेश
भारत के 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुभकामनाएं दीं. उन्होंने अपने संदेश में कहा कि अमेरिका और भारत ऐतिहासिक रूप से मजबूत बंधन साझा करते हैं. यह संदेश ऐसे समय आया है जब ट्रंप प्रशासन के व्यापारिक टैरिफ और कूटनीतिक दबावों के बीच भारत-ईयू समझौते पर चर्चा चल रही थी.
व्हाइट हाउस से राजनीतिक विवाद
ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी के सीनेटर टेड क्रूज ने कहा कि व्हाइट हाउस ही भारत के साथ व्यापार समझौते को रोकने में बाधक बन रहा है. 2025 में भारत पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाया गया था, जिसे अगस्त में 50 प्रतिशत तक बढ़ा दिया गया. क्रूज ने चेताया कि टैरिफ के कारण अमेरिका में राजनीतिक दबाव और महाभियोग जैसी स्थिति पैदा हो सकती है.
कनाडा की नई रणनीति
अमेरिका के व्यापारिक दबावों के बीच, कनाडा भी भारत के साथ अपने संबंधों को मजबूत कर रहा है. प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के नेतृत्व में ओटावा भारत को एक महत्वपूर्ण रणनीतिक और आर्थिक साझेदार के रूप में देख रहा है. कनाडा ने अमेरिकी टैरिफ धमकियों के जवाब में अपनी विदेश नीति में बदलाव किया है, ताकि व्यापारिक साझेदारी को सुरक्षित किया जा सके.
अपनी संप्रभुता की रक्षा करने और 51वें राज्य"के रूप में माने जाने से बचने के लिए ओटावा दस वर्षों के भीतर अपने गैर-अमेरिकी निर्यात को दोगुना करने की दिशा में काम कर रहा है. कनाडा और भारत दोनों वर्तमान में अमेरिका द्वारा लगाए गए उच्च टैरिफ का सामना कर रहे हैं, यह एक साझा समस्या है जिसने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार में 50 अरब डॉलर के लक्ष्य के साथ एक व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (सीईपीए) के लिए उनके प्रयासों को तेज कर दिया है.
रिश्ते सुधारने पर कनाडा का जोर
प्रधानमंत्री कार्नी के मार्च में भारत आने और यूरेनियम, ऊर्जा, खनिज और कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर केंद्रित समझौतों पर हस्ताक्षर करने की उम्मीद है. यह राजनयिक सामंजस्य जस्टिन ट्रूडो के कार्यकाल के दौरान व्याप्त राजनयिक तनाव के बाद आया है, जिसका केंद्र बिंदु एक सिख अलगाववादी नेता की हत्या से संबंधित विवाद था.
विश्लेषकों का कहना है कि कनाडा के लिए, भारत एक स्थिर लोकतांत्रिक साझेदार और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अमेरिकी प्रभुत्व के लिए एक रणनीतिक प्रतिसंतुलन का प्रतिनिधित्व करता है. भारत इस साझेदारी को महत्वपूर्ण ऊर्जा स्रोतों को सुरक्षित करने और उत्तरी अमेरिकी बाजार में अपनी पहुंच बढ़ाने के अवसर के रूप में देख सकता है, ऐसे समय में जब उसके अपने निर्यात पर अमेरिका की ओर से काफी टैरिफ का दबाव है.


