भारत-ईयू व्यापार समझौता शुल्क और संरक्षणवाद के खिलाफ मजबूत संदेश देग बोले एंटोनियो कोस्टा
भारत और यूरोपीय संघ के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौता वैश्विक स्तर पर शुल्क और संरक्षणवाद के खिलाफ एक मजबूत संदेश देने जा रहा है. यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा के मुताबिक, यह समझौता नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यापार व्यवस्था को मजबूती देगा.

नई दिल्ली: यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा ने कहा है कि भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौता केवल आर्थिक सहयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि यह वैश्विक मंच पर शुल्क और बढ़ते संरक्षणवाद के खिलाफ एक सशक्त राजनीतिक संदेश भी देता है. मौजूदा समय में जब वैश्विक व्यापार और भू-आर्थिक परिदृश्य अस्थिरता से गुजर रहा है, ऐसे में यह समझौता नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था की रक्षा की दिशा में अहम भूमिका निभा सकता है.
गणतंत्र दिवस समारोह में यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन के साथ मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए कोस्टा ने भारत-ईयू शिखर सम्मेलन से पहले एक विशेष साक्षात्कार में कहा कि दोनों पक्ष मिलकर वैश्विक स्तर पर "स्थिरता, संरक्षणशीलता और विश्वसनीयता के मजबूत प्रदाता” बन सकते हैं. उन्होंने जोर दिया कि यह साझेदारी न केवल व्यापार बल्कि सुरक्षा और रक्षा सहयोग के लिहाज से भी बेहद महत्वपूर्ण है.
भारत-ईयू साझेदारी से नियम-आधारित वैश्विक व्यवस्था को बल
कोस्टा ने कहा, "हमारे बहुध्रुवीय विश्व में, यह आवश्यक है कि यूरोपीय संघ और भारत घनिष्ठ साझेदार बनें क्योंकि हम मिलकर अंतरराष्ट्रीय संबंधों में स्थिरता, संरक्षणशीलता और विश्वसनीयता के मजबूत प्रदाता बन सकते हैं और अपनी अंतरराष्ट्रीय नियम-आधारित व्यवस्था की रक्षा कर सकते हैं."
उनके मुताबिक, भारत और ईयू की नजदीकी वैश्विक अनिश्चितताओं के दौर में संतुलन बनाए रखने में मदद कर सकती है.
मुक्त व्यापार समझौता देगा भू-राजनीतिक स्थिरता
भारत-ईयू शिखर सम्मेलन में मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) से जुड़ी वार्ताओं के निष्कर्ष सामने आने की उम्मीद है. इसके साथ ही सुरक्षा एवं रक्षा साझेदारी और भारतीय छात्रों व पेशेवरों के आवागमन को आसान बनाने वाले एक ढांचागत समझौते को भी अंतिम रूप दिया जा सकता है.
कोस्टा ने कहा, "मुझे लगता है कि हमारा व्यापार समझौता एक बहुत ही महत्वपूर्ण भू-राजनीतिक स्थिरता प्रदान करने वाला कारक है और यह दर्शाता है कि अंतरराष्ट्रीय नियमों पर आधारित व्यापार की रक्षा करना कैसे संभव है."
भारत ईयू का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार
यूरोपीय संघ भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है. वर्ष 2024 में दोनों के बीच 120 अरब यूरो का माल व्यापार हुआ, जो भारत के कुल व्यापार का 11.5% है. वहीं सेवाओं का व्यापार 2023 में 59.7 अरब यूरो तक पहुंचा.
भारत में यूरोपीय संघ का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश भी लगातार बढ़ा है और 2023 में यह 140.1 अरब यूरो रहा, जो 2019 में 82.3 अरब यूरो था.
एफटीए से भारतीय निर्यात को मिल सकता है बड़ा फायदा
एक बार एफटीए पर हस्ताक्षर होने और यूरोपीय संसद से मंजूरी मिलने के बाद जिसमें कम से कम एक वर्ष लग सकता है.द्विपक्षीय व्यापार के विस्तार की संभावना है. इससे भारतीय निर्यात, खासकर वस्त्र और आभूषण जैसे सेक्टर को राहत मिल सकती है, जो अगस्त के अंत से 50% अमेरिकी टैरिफ से प्रभावित रहे हैं.
संरक्षणवाद के दौर में टैरिफ के खिलाफ संदेश
कोस्टा ने कहा कि भारत-ईयू एफटीए दुनिया को यह स्पष्ट संकेत देगा कि दोनों पक्ष टैरिफ की बजाय व्यापार समझौतों में विश्वास रखते हैं. उन्होंने कहा, "यह दुनिया को एक महत्वपूर्ण राजनीतिक संदेश देगा कि भारत और यूरोपीय संघ टैरिफ की तुलना में व्यापार समझौतों में अधिक विश्वास करते हैं," ऐसे समय में जब संरक्षणवाद बढ़ रहा है और कुछ देशों ने टैरिफ बढ़ाने का फैसला किया है.
सुरक्षा और रक्षा सहयोग होगा और मजबूत
सुरक्षा एवं रक्षा साझेदारी के तहत साइबर सुरक्षा, आतंकवाद-रोधी प्रयासों और समुद्री सुरक्षा में मौजूदा सहयोग को और मजबूती मिलेगी. कोस्टा ने कहा, "हम ऑपरेशन एस्पाइड्स में भारत के साथ मिलकर काम कर रहे हैं और यह हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा के लिए और भूमध्य सागर और लाल सागर के माध्यम से हिंद-प्रशांत और अटलांटिक के बीच मुक्त और खुले व्यापार को बनाए रखने के लिए बहुत महत्वपूर्ण रहा है."


