गुजरात में खत्म होगा ‘लव जिहाद’! अब पहचान छिपाकर शादी करना होगा मुश्किल, विवाह पंजीकरण नियमों में बदलाव की तैयारी
गुजरात सरकार विवाह पंजीकरण कानून में संशोधन की तैयारी कर रही है. उपमुख्यमंत्री Harsh Sanghavi ने कहा कि नई व्यवस्था में माता-पिता को सूचना देना और विस्तृत जानकारी देना अनिवार्य होगा. प्रस्ताव पर 30 दिनों तक जनता से सुझाव मांगे गए हैं.

गुजरात: 'लव जिहाद' वाली शादियों पर रोक लगाने के लिए गुजरात सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है, जिससे प्रेम विवाह और उसकी पंजीकरण प्रक्रिया को लेकर नई बहस छिड़ गई है. राज्य सरकार 'विवाह पंजीकरण कानून' में बदलाव की तैयारी कर रही है. प्रस्तावित संशोधनों के बाद अपनी पहचान छिपाकर या परिवार को बिना बताए शादी दर्ज कराना पहले जैसा आसान नहीं रहेगा. सरकार का कहना है कि यह कदम प्रक्रिया को पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए उठाया जा रहा है.
राज्य विधानसभा में उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने बताया कि मौजूदा नियमों का दुरुपयोग होने की शिकायतें मिल रही थीं. कई सामाजिक संगठनों और नागरिकों ने विवाह पंजीकरण प्रक्रिया में सुधार की मांग की थी. सरकार अब 'विवाह पंजीकरण अधिनियम' में संशोधन लाने जा रही है ताकि कथित खामियों को दूर किया जा सके. सदन में बोलते हुए उन्होंने 'लव जिहाद' का जिक्र किया और इसे सांस्कृतिक चुनौती बताया. उनका कहना था कि राज्य सरकार इस मुद्दे को नजरअंदाज नहीं कर सकती और जरूरी कानूनी कदम उठाए जाएंगे.
नए नियमों में क्या बदलाव होंगे?
सरकार के मसौदे के अनुसार अब हर विवाह पंजीकरण आवेदन सहायक पंजीयक के सामने पेश करना अनिवार्य होगा. दूल्हा-दुल्हन को यह लिखित घोषणा देनी होगी कि उन्होंने अपने माता-पिता को शादी की जानकारी दी है या नहीं. इसके अलावा आवेदन में माता-पिता के नाम, पता, आधार संख्या और संपर्क विवरण देना जरूरी होगा.
सहायक पंजीयक की जांच के बाद दस कार्यदिवस के भीतर माता-पिता को सूचना भेजी जाएगी. जब सभी शर्तें पूरी हो जाएंगी, तब आवेदन संबंधित जिला या तालुका पंजीयक को भेजा जाएगा. पुष्टि होने के 30 दिन बाद ही विवाह पंजीकृत किया जाएगा. पूरी प्रक्रिया को एक नए ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा, जिसे सरकार विकसित करेगी.
जनता से मांगा सुझाव
सरकार ने प्रस्तावित संशोधनों पर 30 दिनों तक आम जनता से आपत्तियां और सुझाव मांगे हैं. लोग स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की वेबसाइट के माध्यम से अपनी राय दर्ज कर सकते हैं. प्राप्त सुझावों के आधार पर अंतिम नियम जारी किए जाएंगे.
राजनीतिक समर्थन और आपत्ति
इस प्रस्ताव को कुछ विधायकों का समर्थन भी मिला है. आम आदमी पार्टी के विधायक हेमंत आहिर और भाजपा विधायक लविंगजी ठाकोर ने इसे समय की जरूरत बताया. उनका आरोप है कि मौजूदा प्रक्रिया की कमियों का फायदा उठाकर कुछ लोग गलत तरीके से युवतियों को प्रभावित करते हैं.
हालांकि, कानूनी विशेषज्ञों की राय अलग है. उनका कहना है कि विवाह पंजीकरण एक प्रशासनिक प्रक्रिया है, जिसे वयस्कों की व्यक्तिगत स्वतंत्रता के साथ संतुलित करना जरूरी है. सुप्रीम कोर्ट पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि बालिग व्यक्ति को अपनी पसंद से शादी करने का अधिकार है, जो मौलिक अधिकारों का हिस्सा है. ऐसे में नए नियमों की संवैधानिक वैधता और गोपनीयता से जुड़े पहलुओं पर सवाल उठ सकते हैं. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम सामाजिक और सांस्कृतिक मुद्दों के साथ-साथ चुनावी माहौल पर भी असर डाल सकता है.


