कैसे किया जाता है गणतंत्र दिवस पर झांकियों का चयन? कौन करता है विषय का चुनाव
गणतंत्र दिवस परेड की झांकियां भारत की संस्कृति, विरासत और विकास को दर्शाती हैं. रक्षा मंत्रालय तय थीम पर राज्यों और मंत्रालयों से प्रस्ताव मंगवाकर विशेषज्ञ समिति द्वारा कई चरणों में सर्वश्रेष्ठ झांकियों का चयन करता है.

नई दिल्लीः हर वर्ष 26 जनवरी को भारत अपना गणतंत्र दिवस पूरे उत्साह और गौरव के साथ मनाता है. इस राष्ट्रीय पर्व का सबसे बड़ा आकर्षण नई दिल्ली के कर्तव्य पथ पर आयोजित भव्य गणतंत्र दिवस परेड होती है. इस परेड में शामिल रंग-बिरंगी झांकियां देश की सांस्कृतिक विविधता, ऐतिहासिक विरासत और आधुनिक उपलब्धियों को जीवंत रूप में प्रस्तुत करती हैं. लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि इन झांकियों को चुनने की प्रक्रिया कितनी जटिल और प्रतिस्पर्धात्मक होती है.
77वें गणतंत्र दिवस की झलक
इस वर्ष 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर कुल 30 झांकियां कर्तव्य पथ पर नजर आएंगी. इनमें 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की तथा 13 केंद्रीय मंत्रालयों की झांकियां शामिल हैं. इन सभी झांकियों को “स्वतंत्रता का मंत्र: वंदे मातरम” और “समृद्धि का मंत्र: आत्मनिर्भर भारत” जैसी व्यापक थीम के अंतर्गत तैयार किया गया है. झांकियों में वंदे मातरम के 150 वर्ष पूरे होने का उत्सव, भारत की सांस्कृतिक समृद्धि और आत्मनिर्भरता की दिशा में हुई प्रगति को रचनात्मक ढंग से दर्शाया जाएगा.
झांकी की थीम कैसे तय होती है?
गणतंत्र दिवस परेड की समग्र जिम्मेदारी रक्षा मंत्रालय के पास होती है. मंत्रालय अन्य केंद्रीय विभागों से विचार-विमर्श के बाद हर साल परेड की मुख्य थीम को अंतिम रूप देता है. इसके बाद राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और मंत्रालयों को उसी थीम के अनुरूप झांकी प्रस्ताव भेजने के लिए आमंत्रित किया जाता है. चूंकि स्थान सीमित होते हैं, इसलिए सभी प्रस्तावों का चयन नहीं हो पाता.
प्रस्ताव आमंत्रण
आमतौर पर सितंबर महीने में रक्षा मंत्रालय इस प्रक्रिया की शुरुआत करता है. सभी 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों, विभिन्न मंत्रालयों, विभागों और कुछ संवैधानिक संस्थाओं को औपचारिक पत्र भेजकर झांकी डिजाइन भेजने के लिए कहा जाता है. इसके बाद विशेषज्ञ समिति द्वारा इन प्रस्तावों की जांच शुरू होती है.
झांकी में क्या होना जरूरी है?
हर झांकी को तय थीम के भीतर रहते हुए अपने क्षेत्र या विभाग की विशिष्ट पहचान को उजागर करना होता है. झांकियों में सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और विकासात्मक पहलुओं का संतुलित समावेश आवश्यक है. आधुनिक तकनीक जैसे एलईडी लाइटिंग, इलेक्ट्रॉनिक डिस्प्ले, रोबोटिक्स, 3डी प्रिंटिंग और विशेष दृश्य प्रभावों के उपयोग को बढ़ावा दिया जाता है. साथ ही, पर्यावरण के अनुकूल सामग्री का प्रयोग अनिवार्य होता है और प्लास्टिक से बचने के निर्देश दिए जाते हैं.
विशेषज्ञ समिति की भूमिका
झांकियों के चयन के लिए रक्षा मंत्रालय कला, संस्कृति, वास्तुकला, संगीत, नृत्य और मूर्तिकला जैसे क्षेत्रों के प्रतिष्ठित विशेषज्ञों की एक समिति गठित करता है. पहले चरण में झांकी के स्केच और अवधारणा को देखा जाता है. आवश्यक होने पर सुधार के सुझाव भी दिए जाते हैं. यदि झांकी में नृत्य शामिल है, तो पारंपरिक लोकनृत्य, वेशभूषा और वाद्य यंत्र अनिवार्य होते हैं.
अंतिम चयन की कठिन राह
प्रारंभिक स्वीकृति के बाद प्रतिभागियों को अपनी झांकी का त्रि-आयामी मॉडल प्रस्तुत करना होता है. इसके बाद कई दौर की बैठकों में दृश्य प्रभाव, विषय की प्रासंगिकता, जन प्रभाव, संगीत, तकनीकी नवाचार और समग्र प्रस्तुति जैसे पहलुओं के आधार पर अंतिम चयन किया जाता है. आमतौर पर छह से सात चरणों में यह प्रक्रिया पूरी होती है, जिसमें हर चरण में कुछ प्रस्ताव बाहर हो जाते हैं.


