गणतंत्र दिवस से पहले दिल्ली में यूरोपीय संघ के नेता, भारत-EU रिश्तों को मिलेगी नई ऊंचाई
यूरोपीय संघ और भारत अब हाथ मिलाकर कई रोमांचक क्षेत्रों में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं. शहरों का स्मार्ट विकास, हरित ऊर्जा, डिजिटल क्रांति और व्यापार. यह साझेदारी दोनों के लिए नए अवसर खोल रही है और आने वाले समय को ज्यादा हरा-भरा व तकनीकी रूप से मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम है.

नई दिल्ली: भारत और यूरोपीय संघ के बीच रणनीतिक साझेदारी को नई ऊंचाई देने की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए भारत सरकार ने यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन को 25 से 27 जनवरी तक के राजकीय दौरे का निमंत्रण दिया है. सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह यात्रा भारत-EU संबंधों को अपनी वैश्विक और यूरोपीय रणनीति का एक केंद्रीय स्तंभ बनाने की मंशा को दर्शाती है.
सरकारी बयान के अनुसार, भारत और यूरोपीय संघ के बीच लंबे समय से विकसित होते रिश्ते अब संस्थागत स्तर पर और अधिक मजबूत हो रहे हैं. व्यापार, प्रौद्योगिकी, कनेक्टिविटी और जलवायु जैसे क्षेत्रों में बढ़ता सहयोग दोनों पक्षों के बीच गहराते तालमेल को रेखांकित करता है.
गणतंत्र दिवस पर EU नेतृत्व की विशेष मौजूदगी
प्रेस इंफॉर्मेशन ब्यूरो ने शनिवार को बताया कि यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय संघ की विदेश नीति प्रमुख काजा कालास के दिल्ली पहुंचने के साथ ही यह उच्चस्तरीय दौरा शुरू हो गया है. यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा रविवार को राष्ट्रीय राजधानी पहुंचने वाले हैं.
दोनों यूरोपीय नेता 26 जनवरी को भारत के गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे, जो भारत-EU संबंधों के बढ़ते महत्व का प्रतीक माना जा रहा है.
ट्रेड एंड टेक्नोलॉजी काउंसिल
यूरोपीय संसद के अनुसार, ट्रेड एंड टेक्नोलॉजी काउंसिल की घोषणा यूरोपीय आयोग ने अप्रैल 2022 में की थी और इसे फरवरी 2023 में औपचारिक रूप से लॉन्च किया गया. यह अमेरिका के बाद किसी अन्य देश के साथ यूरोपीय संघ की दूसरी ऐसी पहल है.
इस परिषद का उद्देश्य द्विपक्षीय सहयोग को बढ़ाना, व्यापार और निवेश को प्रोत्साहित करना और साझा मूल्यों को बनाए रखते हुए तकनीकी व औद्योगिक नेतृत्व सुनिश्चित करना है. TTC की दूसरी मंत्रीस्तरीय बैठक 28 फरवरी 2025 को नई दिल्ली में हुई थी. संयुक्त बयान में दोनों पक्षों ने वैश्विक भू-राजनीतिक परिदृश्य में बदलाव के बीच अपने बढ़ते रणनीतिक अभिसरण पर जोर दिया.
इस संदर्भ में, दोनों पक्षों ने एक बार फिर नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के महत्व और संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता, पारदर्शिता और विवादों के शांतिपूर्ण समाधान के सिद्धांतों के पूर्ण सम्मान पर जोर दिया.
ग्लोबल गेटवे के तहत बहु-क्षेत्रीय सहयोग
ग्लोबल गेटवे रणनीति के तहत भारत और यूरोपीय संघ शहरी विकास, हरित ऊर्जा, डिजिटल परिवर्तन और व्यापार जैसे प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग को और तेज कर रहे हैं. यह रणनीति वैश्विक स्तर पर अधिक मजबूत और टिकाऊ कनेक्टिविटी बनाने के लिए यूरोप की रूपरेखा के रूप में देखी जा रही है.
1 दिसंबर 2021 को शुरू की गई यह रणनीति पेरिस जलवायु समझौते और 2030 सतत विकास लक्ष्यों से जुड़ी प्राथमिकताओं पर आधारित है. विशेषज्ञों का कहना है कि भारत और EU दोनों इन लक्ष्यों को लेकर एकमत हैं.
भारत की गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित ऊर्जा क्षमता तीन गुना बढ़ चुकी है और वह पेरिस समझौते के लक्ष्यों को हासिल करने वाला पहला G20 देश बन गया है. भारत ने 2025 में ही अपनी स्थापित बिजली क्षमता का 50% गैर-जीवाश्म स्रोतों से प्राप्त कर लिया, जो उसके राष्ट्रीय निर्धारित योगदान लक्ष्य से पांच साल पहले है.
जलवायु कार्रवाई पर भारत-EU की साझा सोच
रीन्यू के संस्थापक, चेयरमैन और CEO सुमंत सिन्हा ने कहा कि वैश्विक भूराजनीतिक चुनौतियों के बावजूद भारत और यूरोपीय संघ जलवायु परिवर्तन पर कार्रवाई कर रहे हैं. दोनों देशों के महत्वाकांक्षी नेट-जीरो लक्ष्य हैं और वे प्रतिस्पर्धात्मकता और स्थिरता के बीच संतुलन बनाने का प्रयास कर रहे हैं.
उन्होंने आगे कहा कि भारत और यूरोपीय संघ के बीच कार्बन मूल्य निर्धारण तंत्रों को संरेखित करना आर्थिक हितों की रक्षा करते हुए जलवायु महत्वाकांक्षा को आगे बढ़ाने की दिशा में एक व्यावहारिक कदम है. यूरोपीय संघ के सीबीएएम कार्बन सीमा समायोजन तंत्र के तहत पारस्परिक मान्यता से दोहरे कार्बन कराधान से बचा जा सकेगा, निर्यात लागत कम होगी और उच्च गुणवत्ता वाले कार्बन बाजारों में विश्वास बढ़ेगा, जिससे भारत अनुच्छेद 6.2 और 6.4 के तहत प्रमाणित कार्बन क्रेडिट के प्रमुख आपूर्तिकर्ता के रूप में स्थापित होगा.
16 अप्रैल 2025 को नई दिल्ली में आयोजित IMEC पर उच्चस्तरीय गोलमेज बैठक को संबोधित करते हुए केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि यह सिर्फ एक व्यापार मार्ग नहीं है, बल्कि आधुनिक समय का सिल्क रूट है. बराबरी की साझेदारी, जो समन्वय, कनेक्टिविटी और समावेशी समृद्धि को बढ़ावा देता है.


