भारत से मेरा पुराना रिश्ता...ओआईसी कार्ड दिखाते हुए बोले यूरोपीय संघ के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा

भारत-ईयू व्यापार समझौते के दौरान यूरोपीय परिषद अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा ने अपने गोवा संबंधों का खुलासा किया, ओसीआई कार्ड दिखाया और बताया कि उनका भारत से व्यक्तिगत और सांस्कृतिक जुड़ाव गहरा है, जिसे मोदी और यूरोपीय नेताओं ने सराहा.

Yaspal Singh
Edited By: Yaspal Singh

नई दिल्लीः भारत और यूरोपीय संघ के बीच ऐतिहासिक व्यापार समझौते की घोषणा के दौरान एक बेहद भावनात्मक और अनौपचारिक क्षण देखने को मिला. इस मौके पर यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो लुइस सैंटोस दा कोस्टा ने मंच पर ऐसा कदम उठाया, जिसने सभी का ध्यान खींच लिया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन की मौजूदगी में कोस्टा ने अपनी जेब से ओसीआई कार्ड निकालते हुए भारत से अपने निजी रिश्ते की कहानी साझा की.

प्रधानमंत्री मोदी ने कोस्टा की बातों को मुस्कान के साथ सुना और उनके गोवा से जुड़े पारिवारिक संबंधों को भारत-यूरोप की गहराती साझेदारी से जोड़कर देखा.

मैं यूरोपीय नेता ही नहीं, प्रवासी भारतीय भी हूं

संयुक्त प्रेस ब्रीफिंग को संबोधित करते हुए कोस्टा ने कहा कि मैं यूरोपीय परिषद का अध्यक्ष हूं, लेकिन साथ ही मैं एक प्रवासी भारतीय नागरिक भी हूं. उन्होंने यह बात कहते हुए अपना ओसीआई कार्ड दिखाया, जिससे माहौल भावुक हो गया.

पूर्व पुर्तगाली प्रधानमंत्री रहे कोस्टा ने कहा कि भारत से उनका रिश्ता केवल औपचारिक नहीं, बल्कि दिल से जुड़ा हुआ है. उनके अनुसार, यूरोप और भारत के बीच बढ़ते संबंध उनके लिए व्यक्तिगत महत्व रखते हैं क्योंकि उनकी पारिवारिक जड़ें भारत में हैं.

गोवा से जुड़ी पारिवारिक विरासत

एंटोनियो कोस्टा के पिता का जन्म और पालन-पोषण गोवा में हुआ था, जब यह क्षेत्र पुर्तगाल का उपनिवेश था. गोवा की मुक्ति के बाद, उनके पिता 18 वर्ष की उम्र में पुर्तगाल चले गए. बचपन में कोस्टा को कोंकणी भाषा में प्यार से बाबुश कहा जाता था. कोस्टा का जन्म 1961 में लिस्बन में हुआ, लेकिन किशोरावस्था में उन्होंने अपने माता-पिता के साथ पहली बार गोवा की यात्रा की. यह यात्रा उनके जीवन की यादगार यात्राओं में से एक रही.

साहित्य, गोवा और सांस्कृतिक जुड़ाव

कोस्टा के पिता ऑरलैंडो कोस्टा एक प्रसिद्ध कवि और उपन्यासकार थे. उनकी रचनाओं में गोवा की संस्कृति, इतिहास और जीवनशैली की गहरी छाप देखने को मिलती है. उन्होंने रवींद्रनाथ टैगोर पर भी महत्वपूर्ण लेखन किया था.

2017 में भारत यात्रा के दौरान कोस्टा ने कहा था कि भले ही उनके पिता लिस्बन में रहे, लेकिन गोवा हमेशा उनकी लेखनी में जीवित रहा. उस यात्रा में वे अपने पिता के नाटक के अंग्रेजी अनुवाद के विमोचन के लिए भारत आए थे.

मारगाओ में आज भी मौजूद पैतृक घर

कोस्टा का पैतृक घर आज भी गोवा के मारगाओ में अबादे फारिया रोड पर स्थित है. यह घर करीब 200 साल पुराना है और अब भी उनका परिवार वहीं रहता है. 2017 की यात्रा में कोस्टा ने इस घर का दौरा किया और अपने रिश्तेदारों से मुलाकात की थी.

‘लिस्बन का गांधी’ कहे जाने वाले नेता

64 वर्षीय एंटोनियो कोस्टा को उनकी शांत, संतुलित और संवाद-प्रधान राजनीति के कारण अक्सर “लिस्बन का गांधी” कहा जाता है. गोवा से जुड़ी उनकी विरासत और अहिंसक दृष्टिकोण इस छवि को और मजबूत करता है.

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