भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता निर्णायक मोड़ पर, जल्द हो सकता है समझौता
भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से अटके द्विपक्षीय व्यापार समझौते को लेकर बड़ी सफलता के संकेत मिले हैं. सूत्रों के अनुसार, बातचीत के अधिकांश मुद्दों पर सहमति बन चुकी है और अब दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व की मंजूरी का इंतजार है.

नई दिल्ली: सूत्रों के अनुसार, भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से अटके द्विपक्षीय व्यापार समझौते (Bilateral Trade Agreement) को लेकर बातचीत अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुकी है. दोनों देशों के वार्ताकारों ने इस दिशा में "काफी महत्वपूर्ण" प्रगति की है और समझौते को अंतिम रूप दिए जाने की संभावनाएं पहले से कहीं अधिक मजबूत हो गई हैं.
मामले से परिचित लोगों का कहना है कि भारतीय वार्ताकार यूरोपीय संघ (EU) के साथ मेगा मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को अंतिम रूप देने के साथ-साथ अमेरिकी समकक्षों के साथ भी लगातार संपर्क में रहे. हालांकि, इस समझौते को लागू करने से पहले दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व की औपचारिक मंजूरी अभी बाकी है.
अमेरिका के साथ अधिकांश बातचीत पूरी
नाम न छापने की शर्त पर सूत्रों ने बताया कि अमेरिका के साथ प्रस्तावित व्यापार समझौते को लेकर अधिकांश बातचीत पूरी हो चुकी है. यह प्रक्रिया उस समय धीमी पड़ गई थी जब पिछले साल राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भारतीय सामानों पर भारी टैरिफ लगा दिए थे.
सूत्रों के अनुसार, अब दोनों पक्ष समझौते को साकार होते देखने के बेहद करीब हैं. एक व्यक्ति ने कहा, "जहां तक अमेरिका के साथ हुए समझौते का सवाल है, हमने इस दिशा में काफी महत्वपूर्ण प्रगति की है. हम इसे साकार होते देखने के बेहद करीब हैं. दोनों पक्ष संपर्क में हैं."
ईयू समझौता अमेरिका के खिलाफ नहीं
सूत्रों ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते को अमेरिका के साथ संबंधों में आई किसी गिरावट के जवाब के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए. भारत के लिए अमेरिकी बाजार उतना ही अहम है जितना कि यूरोपीय संघ का.
एक अन्य सूत्र ने कहा, “यूरोपीय संघ को भारत का निर्यात 76 अरब डॉलर का है, जबकि अमेरिका का 86 अरब डॉलर का. अमेरिका भी हमारे लिए उतना ही महत्वपूर्ण बाजार है.”
एस जयशंकर की वाशिंगटन यात्रा अहम
विदेश मंत्री एस जयशंकर की 4-5 फरवरी को वाशिंगटन यात्रा प्रस्तावित है, जहां वे महत्वपूर्ण खनिजों पर अमेरिका के नेतृत्व में आयोजित पहली मंत्रिस्तरीय बैठक में हिस्सा लेंगे. इस दौरान उनकी अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के साथ द्विपक्षीय बैठक की भी संभावना है.
सूत्रों के मुताबिक, यह यात्रा द्विपक्षीय व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में सहायक हो सकती है.
महत्वपूर्ण खनिज और आपूर्ति श्रृंखला पर फोकस
मंत्रिस्तरीय बैठक में दुर्लभ धातुओं की वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने पर चर्चा होगी. भारत के पैक्स सिलिका में शामिल होने की भी उम्मीद है, जो सेमीकंडक्टर और एआई तकनीक के लिए सुरक्षित आपूर्ति श्रृंखला बनाने की अमेरिका की अहम पहल मानी जाती है.
टैरिफ और अन्य मुद्दों से बिगड़ा था माहौल
भारत और अमेरिका के बीच पिछले साल कई दौर की बातचीत हुई थी, लेकिन ट्रम्प द्वारा भारतीय वस्तुओं पर 25% पारस्परिक शुल्क और रूसी तेल खरीद पर 25% दंडात्मक शुल्क लगाने के बाद वार्ता में गतिरोध आ गया.
इसके अलावा, द्विपक्षीय रिश्तों पर अन्य मुद्दों का भी असर पड़ा, जिनमें भारत-पाकिस्तान संघर्ष को लेकर ट्रम्प के दावे, अमेरिका की सख्त आव्रजन नीति और रूस के साथ भारत के ऊर्जा व रक्षा संबंधों पर अमेरिकी आलोचना शामिल रही.
आरसीईपी पर रुख में कोई बदलाव नहीं
चीन के संदर्भ में सूत्रों ने कहा कि भारत की क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक साझेदारी (RCEP) में शामिल न होने के फैसले पर फिलहाल पुनर्विचार की कोई योजना नहीं है. भारत ने 2020 में आर्थिक चिंताओं के चलते इस समझौते से बाहर रहने का निर्णय लिया था.
सूत्रों ने यह भी बताया कि यूरोपीय संघ के कई देश चीन के साथ अपने संबंधों को फिर से संतुलित कर रहे हैं, ताकि अत्यधिक निर्भरता कम की जा सके और मजबूत आपूर्ति श्रृंखलाओं का निर्माण किया जा सके.


