बाएं इशारा, दाएं वार...फिर मोदी की रणनीति में उलझा पाकिस्तान, नहीं पढ़ पाया शांत चेहरे के पिछे का मजबूत इरादा

प्रधानमंत्री मोदी ने 2019 की बालाकोट स्ट्राइक और 2025 के ऑपरेशन सिंदूर से पहले अपने इरादे छिपाए रखे. शांत चेहरे और सामान्य भाषणों के पीछे बड़ी कार्रवाई की तैयारी चल रही थी. युद्ध अभ्यास को भ्रम का हिस्सा बनाया गया. मोदी की रणनीति है. बाएं इशारा, दाएं वार..जिसे पाकिस्तान अब तक समझ नहीं पाया.

Deeksha Parmar
Edited By: Deeksha Parmar

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब भी पाकिस्तान पर कोई बड़ा एक्शन लेते हैं, तो उसका अंदाज ऐसा होता है कि सामने वाला सोच भी नहीं पाता. जैसे कोई बाएं मुड़ने का इशारा करे, और अचानक दाएं घूमकर वार कर दे. यही हुआ 2019 में बालाकोट एयरस्ट्राइक के समय, और फिर 7 मई 2025 को "ऑपरेशन सिंदूर" के दौरान. दोनों ही बार पाकिस्तान कुछ समझ ही नहीं पाया, क्योंकि मोदी ने हर बार अपनी चालें बड़ी चतुराई से छिपाई.

26 फरवरी 2019 को जब भारत ने पाकिस्तान के बालाकोट में आतंकियों के ठिकानों पर एयरस्ट्राइक की, तो उससे ठीक एक दिन पहले PM मोदी दिल्ली में राष्ट्रीय युद्ध स्मारक का उद्घाटन कर रहे थे. उन्होंने सेना की वीरता की बात की, लेकिन किसी को ये अंदाजा तक नहीं हुआ कि अगले ही दिन भारत, पाकिस्तान के भीतर घुसकर हमला करने वाला है.

शांत चेहरा, मजबूत इरादा

रात 9 बजे, जब भारतीय वायुसेना हमला करने निकल चुकी थी, तब भी प्रधानमंत्री एक मीडिया ग्रुप के कार्यक्रम में भाषण दे रहे थे. चेहरे पर न कोई तनाव, न कोई डर. बस एक शांत और आत्मविश्वास से भरे नेता की छवि. 7 मई 2025 को जब "ऑपरेशन सिंदूर" के तहत भारत ने एलओसी पार 9 आतंकी ठिकानों पर निशाना साधा, तब भी पीएम मोदी ने वही पुराना स्टाइल अपनाया.

एक दिन पहले वे एक मीडिया कार्यक्रम में देश के विकास, 2047 तक भारत को महाशक्ति बनाने और राष्ट्रहित की बात कर रहे थे. न पाकिस्तान का नाम, न गुस्सा, न संकेत — बस वही ‘कूल’ अंदाज. उनके भाषण में एक बात जरूर छिपे इशारे की तरह थी  उन्होंने कहा कि कई बार सरकारें "लोग क्या कहेंगे" सोचकर कोई फैसला नहीं ले पाती. लेकिन असली नेतृत्व वही है जो सिर्फ राष्ट्रहित को प्राथमिकता दे.

युद्ध अभ्यास भी बना छलावा

भारत में जगह-जगह युद्ध अभ्यास की खबरें फैलाई गईं — ताकि पाकिस्तान को लगे कि भारत अभी तैयारी में जुटा है. लेकिन असलियत में हमला पहले ही प्लान हो चुका था. यानी पाकिस्तान को लगा कि अभी वक्त है, और भारत ने उसी भ्रम में उसे चौंका दिया.

मोदी को समझना है मुश्किल

कई लोग कहते हैं कि युद्ध की सबसे बड़ी तैयारी होती है. दुश्मन को भ्रम में रखना. और यही PM मोदी करते हैं. वो जो बोलते हैं, उसमें छिपा होता है असली इशारा. वो जो नहीं कहते, वही सबसे बड़ा संकेत होता है. पाकिस्तान अब चाहे तो मोदी के पुराने भाषणों, हावभाव और सार्वजनिक कार्यक्रमों को जितना मर्जी स्टडी करे. लेकिन शायद वो कभी भी मोदी के असली इरादे नहीं पढ़ पाएगा. क्योंकि मोदी वही नेता हैं जो बाएं इशारा करते हैं… और सीधा दाएं जाकर वार करते हैं. और पाकिस्तान हर बार सिर्फ देखता रह जाता है.

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