1800 करोड़ की जमीन डील में पार्थ पवार को क्लीन चिट, जांच रिपोर्ट में दो अफसरों पर कार्रवाई की सिफारिश

महाराष्ट्र के चर्चित 1800 करोड़ रुपये के जमीन सौदे में बड़ा अपडेट सामने आया है. जांच समिति की 1000 पन्नों की रिपोर्ट में पार्थ पवार को क्लीन चिट दे दी गई है, जबकि प्रक्रिया में लापरवाही को लेकर दो सरकारी अधिकारियों पर कार्रवाई की सिफारिश की गई है.

Yogita Pandey
Edited By: Yogita Pandey

मुंबई: महाराष्ट्र की राजनीति से जुड़े 1800 करोड़ रुपये के चर्चित जमीन सौदे में पूर्व डिप्टी सीएम अजित पवार के बेटे पार्थ पवार को बड़ी राहत मिली है. जांच समिति ने अपनी विस्तृत रिपोर्ट में पार्थ पवार को किसी भी आपराधिक भूमिका से मुक्त बताया है. हालांकि, इस सौदे की प्रक्रिया में लापरवाही को लेकर दो सरकारी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की गई है.

अजित पवार के हालिया निधन के बाद राज्य की राजनीति में कई घटनाक्रम तेजी से बदले हैं. इसी बीच आई इस रिपोर्ट ने जमीन सौदे से जुड़े विवाद पर अहम मोड़ ला दिया है. यह मामला पुणे के पॉश इलाके मुंधवा की 41 एकड़ जमीन से जुड़ा है, जिसकी अनुमानित कीमत 1800 करोड़ रुपये बताई गई थी.

आईएएस अधिकारी की अगुवाई में हुई जांच

इस मामले की जांच आईएएस अधिकारी विकास शंकर खरागे की अध्यक्षता में गठित समिति ने की. समिति ने करीब 1000 पन्नों की विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर विभागीय मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले को सौंप दी है. अब इस रिपोर्ट को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के समक्ष प्रस्तुत किया जाना है.

रिपोर्ट के अनुसार, पार्थ पवार के खिलाफ ऐसा कोई प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं मिला, जिससे यह सिद्ध हो सके कि उन्होंने जमीन सौदे में कोई आपराधिक कृत्य किया हो.

1800 करोड़ बनाम 300 करोड़ की डील

विवाद की जड़ उस सौदे में है, जिसमें 1800 करोड़ रुपये मूल्य की जमीन को कथित तौर पर 300 करोड़ रुपये में खरीदा गया. यह सौदा Amedia Enterprises LLP के नाम पर हुआ था. इस फर्म में मुख्य हिस्सेदारी पार्थ पवार की बताई गई है, जबकि उनके चचेरे भाई दिग्विजय भी साझेदार हैं.

आरोप यह भी लगे थे कि इस डील में लगभग 21 करोड़ रुपये की स्टांप ड्यूटी नहीं वसूली गई. इन्हीं आरोपों के आधार पर मामला सुर्खियों में आया था.

दो अधिकारियों पर गिरी गाज

जांच रिपोर्ट में जमीन सौदे की प्रक्रिया में अनियमितताओं का उल्लेख किया गया है. इसके लिए सूर्यकांत येवाले और रविंद्र तारू नामक दो सरकारी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की गई है.

सूर्यकांत येवाले वर्तमान में हवेली तहसील के तहसीलदार हैं, जबकि रविंद्र तारू असिस्टेंट रजिस्ट्रार के पद पर तैनात हैं. जमीन सौदे पर सवाल उठने के बाद दोनों को पहले ही निलंबित किया जा चुका है और वे फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं.

राजनीतिक पृष्ठभूमि और विवाद

पार्थ पवार भले सक्रिय राजनीति में प्रमुख भूमिका नहीं निभाते हों, लेकिन उनके पिता अजित पवार महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम रहे थे. इसी कारण जमीन सौदे में उनका नाम सामने आने पर मामला राजनीतिक रूप से भी चर्चित हो गया था.

अब जांच समिति की रिपोर्ट ने पार्थ पवार को राहत देते हुए स्पष्ट किया है कि उनके खिलाफ आपराधिक संलिप्तता का कोई ठोस प्रमाण नहीं मिला है.

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