पीएम मोदी के 11 साल के कार्यकाल में कितने देशों की यात्रा हुई और सबसे मजबूत करेंसी किस देश की रही?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 11साल के कार्यकाल में भारत की विदेश नीति बदली है. उन्होंने दुनिया के कई देशों की यात्रा की. इन दौरों से भारत की पहचान मजबूत हुई.

New Delhi: पीएम ने 2014 से 2025 के बीच करीब 97 विदेश यात्राएं की हैं. इन यात्राओं में उन्होंने लगभग 79 देशों का दौरा किया. यह संख्या भारत के किसी भी पीएम के दौरों से ज्यादा है. इनका मकसद सिर्फ औपचारिक मुलाकातें नहीं था. हर यात्रा के पीछे भारत के हित जुड़े थे. कहीं व्यापार समझौते हुए. कहीं रणनीतिक भरोसा बढ़ा. यात्राओं से भारत लगातार वैश्विक मंच पर मौजूद रहा और उसकी आवाज मजबूत हुई.
इन यात्राओं से भारत को क्या मिला?
इन विदेश दौरों से भारत के अंतरराष्ट्रीय रिश्ते गहरे हुए. कई देशों के साथ रक्षा और सुरक्षा सहयोग बढ़ा. तकनीक और निवेश के नए रास्ते खुले. प्रवासी भारतीयों से सीधा संवाद बना. भारत को एक भरोसेमंद और संतुलित देश के रूप में देखा जाने लगा. अंतरराष्ट्रीय बैठकों में भारत की राय को अहमियत मिलने लगी. यही वजह है कि आज भारत वैश्विक फैसलों में ज्यादा प्रभावी भूमिका निभा रहा है.
कौन से क्षेत्र रहे प्राथमिकता?
प्रधानमंत्री मोदी का फोकस एशिया तक सीमित नहीं रहा. उन्होंने खाड़ी देशों के साथ रिश्ते मजबूत किए. यूरोप में फ्रांस और जर्मनी जैसे देशों से रणनीतिक साझेदारी बढ़ी. अमेरिका के साथ रक्षा और तकनीक सहयोग आगे बढ़ा. अफ्रीका में विकास और शिक्षा पर चर्चा हुई. पड़ोसी देशों से संवाद बनाए रखा गया. यह विदेश नीति संतुलन और संवाद पर आधारित दिखी.
कौन सी करेंसी सबसे मजबूत निकली?
इन यात्राओं में कई मजबूत अर्थव्यवस्था वाले देश शामिल रहे. लेकिन दुनिया की सबसे मजबूत करेंसी खाड़ी क्षेत्र के एक देश की मानी जाती है. खास तौर पर कुवैत की मुद्रा सबसे ताकतवर मानी जाती है. कुवैती दिनार का मूल्य अमेरिकी डॉलर और भारतीय रुपये से कहीं ज्यादा है. एक कुवैती दिनार कई देशों की मुद्रा पर भारी पड़ता है. यह दुनिया की सबसे मजबूत करेंसी मानी जाती है.
कुवैती दिनार इतना मजबूत क्यों?
कुवैती दिनार की ताकत के पीछे कई कारण हैं. कुवैत की अर्थव्यवस्था तेल पर आधारित है. देश की आबादी कम है. सरकार पर विदेशी कर्ज बहुत कम है. कुवैत के पास बड़ा संप्रभु कोष है. इसकी मुद्रा को मजबूत मुद्राओं की टोकरी से जोड़ा गया है. इससे इसकी कीमत स्थिर बनी रहती है. यही वजह है कि कुवैती दिनार सबसे मजबूत माना जाता है.
विदेश नीति और अर्थव्यवस्था का संबंध?
प्रधानमंत्री मोदी की यात्राओं से कूटनीति और अर्थव्यवस्था जुड़ी दिखी. मजबूत करेंसी वाले देशों से व्यापार बढ़ा. ऊर्जा सुरक्षा पर समझौते हुए. निवेश भारत की ओर आया. रोजगार के नए अवसर बने. भारतीय कंपनियों को वैश्विक बाजार मिले. विदेश नीति का सीधा असर आर्थिक मजबूती पर दिखा. भारत ने खुद को आर्थिक साझेदार के रूप में स्थापित किया.
11 साल में भारत की छवि कैसे बदली?
11 साल में भारत की वैश्विक पहचान बदली है. भारत अब सिर्फ सुनने वाला देश नहीं रहा. वह सुझाव देने और फैसलों में भूमिका निभाने लगा है. प्रधानमंत्री मोदी की सक्रिय विदेश यात्राओं ने यह बदलाव लाया. दुनिया भारत को एक स्थिर और जिम्मेदार ताकत मानने लगी है. मजबूत रिश्ते और आर्थिक भरोसा इसकी पहचान बने हैं. यही इन 11 सालों की सबसे बड़ी उपलब्धि मानी जाती है.


