भारत-EU व्यापार समझौते पर पीएम मोदी ने दिया बड़ा बयान, करोड़ों लोगों के लिए बताया बहुत बड़ा अवसर

भारत और EU के बीच समझौते को लेकर पीएम मोदी ने जिक्र किया. उन्होंने इंडिया एनर्जी वीक के उद्घाटन के दौरान कई बड़े मुद्दों पर बात की, जिसमें सबसे बड़ा मुद्दा है EU के साथ समझौता.

Sonee Srivastav

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंडिया एनर्जी वीक के उद्घाटन के दौरान समझौते का जिक्र करते हुए कहा, "कल ही भारत और यूरोपीय संघ के बीच एक बहुत बड़ा समझौता हुआ है. दुनिया भर में लोग इसे 'मदर ऑफ ऑल डील्स' कह रहे हैं." यह डील दोनों पक्षों के लिए ऐतिहासिक है क्योंकि यह दो बड़ी अर्थव्यवस्थाओं को जोड़ती है. यह ग्लोबल जीडीपी के लगभग 25 प्रतिशत और वैश्विक व्यापार के एक-तिहाई हिस्से को कवर करती है.

इस समझौते से व्यापार बढ़ेगा, निवेश आएगा और आर्थिक रिश्ते मजबूत होंगे. पीएम मोदी ने जोर दिया कि यह डेमोक्रेसी और कानून के शासन के प्रति साझा प्रतिबद्धता को भी मजबूती देता है.

18 साल के बाद मिली सफलता

भारत और EU के बीच मुक्त व्यापार समझौते की बातचीत 2007 में शुरू हुई थी. 18 साल की मेहनत के बाद अब यह पूरा हो गया है. आज दिल्ली में भारत-EU शिखर सम्मेलन में इसकी औपचारिक घोषणा हुई. 

पीएम मोदी ने यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा के साथ वार्ता की. समझौते के बाद हस्ताक्षर इस साल होंगे और अगले साल से यह लागू होने की उम्मीद है. यूरोपीय संसद और भारत की कैबिनेट की मंजूरी भी जरूरी होगी. 

व्यापार पर सकारात्मक प्रभाव

इस डील से दोनों तरफ 90 प्रतिशत से ज्यादा वस्तुओं पर आयात शुल्क कम या खत्म हो जाएगा. कपड़ा और जूते जैसे उत्पादों पर शुल्क तुरंत हट सकता है, जबकि बाकी पर 5-10 साल में चरणबद्ध तरीके से कमी आएगी. वर्तमान में EU भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है.

2024-25 में दोनों के बीच व्यापार 136.53 अरब डॉलर रहा, जिसमें भारत का निर्यात 75.85 अरब डॉलर था. यह समझौता अमेरिका के उच्च टैरिफ के बीच वैकल्पिक रास्ता खोलेगा और वैश्विक व्यापार को नई दिशा देगा.

ऊर्जा क्षेत्र में भारत की ताकत

पीएम मोदी ने इंडिया एनर्जी वीक में कहा कि भारत दुनिया में रिफाइनिंग क्षमता में दूसरे नंबर पर है और जल्द पहले नंबर पर होगा. वर्तमान क्षमता 260 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष है, जिसे 300 तक बढ़ाया जा रहा है. भारत पेट्रोलियम उत्पादों के टॉप 5 निर्यातकों में शामिल है और 150 से ज्यादा देशों में निर्यात करता है.

यह डील न केवल व्यापार बढ़ाएगी बल्कि मैन्युफैक्चरिंग, सर्विसेज और निवेश को भी नई ऊर्जा देगी. यह भारत और EU के लोगों के लिए समृद्धि का नया द्वार खोलेगा.
 

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