नई दिल्ली में हुए फैसलों ने पीछे छोड़े इस्लामाबाद के तमाम दावे... भारत-यूएई डील के आगे पाकिस्तान के सपने फिके
यूएई राष्ट्रपति की संक्षिप्त भारत यात्रा में दोनों देशों ने 2032 तक 200 अरब डॉलर के व्यापार का लक्ष्य तय किया. यह साझेदारी निवेश, तकनीक, रक्षा और अंतरिक्ष तक फैली है, जिसने पाकिस्तान के सीमित दावों को पीछे छोड़ दिया.

नई दिल्ली: अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में यह बात अक्सर कही जाती है कि असली काम शोर-शराबे से नहीं, बल्कि ठोस फैसलों से होता है. हाल के घटनाक्रम ने इसी बात को एक बार फिर सही साबित कर दिया है. पाकिस्तान जहां सऊदी अरब के साथ अपनी डील को बड़ी उपलब्धि बताकर प्रचार में जुटा रहा, वहीं नई दिल्ली में बेहद कम समय में ऐसा फैसला हुआ जिसने इस्लामाबाद के तमाम दावों को पीछे छोड़ दिया. संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान की भारत यात्रा भले ही कुछ घंटों की रही हो, लेकिन इसके नतीजे दूरगामी और बेहद असरदार साबित हुए हैं.
भारत और यूएई ने आपसी व्यापार को लेकर 2032 तक 200 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य तय किया है. यह आंकड़ा न केवल पाकिस्तान के दावों से कई गुना बड़ा है, बल्कि भारत की मजबूत आर्थिक स्थिति को भी दिखाता है. जहां पाकिस्तान 20 अरब डॉलर के लक्ष्य को हासिल करने के लिए संघर्ष कर रहा है, वहीं भारत और यूएई पहले ही 100 अरब डॉलर के व्यापार का स्तर पार कर चुके हैं.
पाकिस्तान की बात करें तो वहां की सरकार ने सऊदी अरब के साथ 20 अरब डॉलर के व्यापार और निवेश का सपना जरूर दिखाया है, लेकिन हकीकत यह है कि दोनों देशों के बीच मौजूदा व्यापार करीब 5 से 6 अरब डॉलर तक ही सीमित है. इतना ही नहीं, पाकिस्तान अभी शुरुआती 5 अरब डॉलर के निवेश के लिए भी लगातार प्रयास कर रहा है.
कम समय की मुलाकात, बड़े फैसले
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यूएई राष्ट्रपति का स्वागत औपचारिकता से हटकर किया और एयरपोर्ट पर उन्हें गले लगाकर अपनापन दिखाया. इसके बाद प्रधानमंत्री आवास में हुई करीब डेढ़ घंटे की बैठक में ऐसे फैसले लिए गए, जो भारत की दीर्घकालिक रणनीति को दर्शाते हैं.
विदेश मंत्रालय के अनुसार, 2022 में हुए व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA) के बाद भारत-यूएई व्यापार में तेजी से बढ़ोतरी हुई है. अब नए लक्ष्य के तहत भारत के छोटे और मध्यम उद्योगों को पश्चिम एशिया, अफ्रीका और यूरेशिया के बाजारों से जोड़ने की योजना बनाई गई है.
भविष्य की तकनीक पर निवेश
भारत और यूएई की साझेदारी केवल व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि भविष्य की तकनीकों पर भी केंद्रित है. गुजरात के धोलेरा स्पेशल इन्वेस्टमेंट रीजन में यूएई बड़े पैमाने पर निवेश करेगा. यहां अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, स्मार्ट शहर और नया बंदरगाह विकसित किया जाएगा. यह पूरा निवेश सीधे तौर पर होगा, किसी कर्ज के रूप में नहीं.
इसके अलावा अंतरिक्ष क्षेत्र में भी दोनों देश साथ मिलकर काम करेंगे. भारत की संस्था ‘इन-स्पेस’ और यूएई की स्पेस एजेंसी मिलकर सैटेलाइट निर्माण और लॉन्च से जुड़ी परियोजनाओं पर काम करेंगी. न्यूक्लियर एनर्जी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी है.
रक्षा और रणनीतिक साझेदारी
रक्षा क्षेत्र में भी भारत और यूएई ने नई दिशा में कदम बढ़ाया है. अब साझेदारी केवल हथियार खरीदने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि मिलकर रक्षा उपकरण बनाने पर भी जोर दिया जाएगा. माना जा रहा है कि यूएई भारत के रक्षा उद्योग में बड़े स्तर पर निवेश कर सकता है.
सोच और सामर्थ्य का फर्क
यह पूरा घटनाक्रम सिर्फ आंकड़ों की तुलना नहीं है, बल्कि सोच और क्षमता का अंतर भी दिखाता है. पाकिस्तान का लक्ष्य ज्यादातर कर्ज और मदद पर आधारित है, जबकि भारत का लक्ष्य मजबूत आर्थिक आधार और पहले से हासिल उपलब्धियों पर टिका हुआ है. जिस रकम के लिए पाकिस्तान महीनों प्रयास करता है, उतना निवेश भारत एक ही परियोजना में आकर्षित कर लेता है.


