छोटी मुलाकात, बड़ा मैसेज: जानें PM मोदी की यूएई राष्ट्रपति के 3 घंटे की हाई-लेवल मीटिंग के राज

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान की संक्षिप्त मुलाकात में परमाणु ऊर्जा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रक्षा, ऊर्जा सुरक्षा और आतंकवाद विरोधी सहयोग जैसे अहम मुद्दों पर गहन चर्चा हुई, जिसने भारत-यूएई रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा दी.

Yogita Pandey
Edited By: Yogita Pandey

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को अपनी संक्षिप्त लेकिन अत्यंत प्रभावशाली भारत यात्रा के दौरान संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के साथ व्यापक बातचीत की। महज दो घंटे की इस मुलाकात में भारत-यूएई रणनीतिक साझेदारी के कई अहम पहलुओं पर गहन चर्चा हुई।

इस उच्चस्तरीय वार्ता में परमाणु ऊर्जा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), रक्षा सहयोग, ऊर्जा सुरक्षा और आतंकवाद विरोधी रणनीति जैसे मुद्दे प्रमुख रूप से सामने आए। दोनों देशों के रिश्तों की मजबूती का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि चर्चा निजी स्तर से लेकर प्रतिनिधिमंडल स्तर तक हुई और कई समझौतों व आशय पत्रों का आदान-प्रदान भी किया गया।

भारत-यूएई रिश्तों में नई ऊर्जा

विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने बताया कि दोनों नेताओं के बीच "बेहद सौहार्दपूर्ण और घनिष्ठ संबंध" हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी और शेख मोहम्मद के नेतृत्व में भारत-यूएई साझेदारी लगातार नई ऊंचाइयों को छू रही है।

यूएई प्रतिनिधिमंडल में अबू धाबी और दुबई के शाही परिवारों के सदस्य और वरिष्ठ मंत्री शामिल थे। इनमें दुबई के क्राउन प्रिंस, यूएई के उप प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री शेख हमदान बिन मोहम्मद बिन मकतूम भी मौजूद रहे।

ऊर्जा सुरक्षा और एलएनजी समझौते पर फोकस

बैठक में ऊर्जा सुरक्षा को लेकर विशेष चर्चा हुई। भारत और यूएई ने हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड और एडीएनओसी गैस के बीच हुए 10 वर्षीय एलएनजी आपूर्ति समझौते का स्वागत किया। इस समझौते के तहत 2028 से भारत को प्रतिवर्ष 0.5 मिलियन टन द्रवीकृत प्राकृतिक गैस की आपूर्ति की जाएगी।

इस करार के साथ यूएई भारत के सबसे बड़े एलएनजी आपूर्तिकर्ताओं में शामिल हो गया है। दोनों देशों ने वैश्विक अस्थिरता के दौर में भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में यूएई की बढ़ती भूमिका को रेखांकित किया।

नागरिक परमाणु सहयोग को मिलेगा विस्तार

द्विपक्षीय एजेंडे में नागरिक परमाणु सहयोग एक नया और महत्वपूर्ण विषय बनकर उभरा। दोनों पक्षों ने उन्नत परमाणु तकनीकों में साझेदारी की संभावनाओं पर सहमति जताई। इसमें बड़े परमाणु रिएक्टरों और छोटे मॉड्यूलर रिएक्टरों (SMR) के विकास और तैनाती पर सहयोग शामिल है।

अधिकारियों के अनुसार, भारत में शांति कानून लागू होने के बाद परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सहयोग के नए अवसर खुले हैं। प्रस्तावित सहयोग में उन्नत रिएक्टर प्रणालियां, परमाणु संयंत्रों का संचालन-रखरखाव और परमाणु सुरक्षा भी शामिल होगी।

AI, डेटा और डिजिटल सहयोग को बढ़ावा

कृत्रिम बुद्धिमत्ता और उभरती तकनीकों को प्राथमिकता वाले क्षेत्र के रूप में चिह्नित किया गया। दोनों देशों ने भारत में सुपरकंप्यूटिंग क्लस्टर स्थापित करने और डेटा सेंटर क्षमता में यूएई निवेश की संभावनाओं पर चर्चा की।

इसके अलावा डिजिटल अवसंरचना के लिए पारस्परिक संप्रभुता पर आधारित "डिजिटल दूतावास" की अवधारणा पर भी विचार किया गया। शेख मोहम्मद ने फरवरी 2026 में भारत द्वारा आयोजित AI इम्पैक्ट समिट के लिए समर्थन व्यक्त किया।

रक्षा सहयोग और आतंकवाद पर सख्त रुख

रक्षा क्षेत्र में सामरिक साझेदारी को आगे बढ़ाने के लिए एक आशय पत्र पर हस्ताक्षर किए गए। नेताओं ने हाल के सैन्य अभ्यासों और सेना प्रमुखों के आपसी आदान-प्रदान से बनी सकारात्मक गति का उल्लेख किया।

दोनों पक्षों ने सीमा पार आतंकवाद सहित सभी प्रकार के आतंकवाद की कड़ी निंदा की और इस बात पर सहमति जताई कि दोषियों, वित्तपोषकों और समर्थकों को न्याय के कटघरे में लाया जाना चाहिए। साथ ही, आतंकवाद के वित्तपोषण और धन शोधन के खिलाफ FATF ढांचे के तहत सहयोग जारी रखने पर सहमति बनी।

व्यापार, निवेश और एसएमई पर जोर

आर्थिक सहयोग भी बातचीत का प्रमुख स्तंभ रहा। 2022 में व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA) के बाद वित्त वर्ष 2024-25 में द्विपक्षीय व्यापार 100 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। दोनों देशों ने 2032 तक इसे 200 अरब डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य तय किया है।

बैठक में गुजरात के धोलेरा विशेष निवेश क्षेत्र में यूएई की भागीदारी सहित निवेश परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई। इसमें अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, ग्रीनफील्ड बंदरगाह, ऊर्जा सुविधाएं और स्मार्ट टाउनशिप शामिल हैं।

अंतरिक्ष, कृषि और जन-संबंध

भारत और यूएई ने अंतरिक्ष विज्ञान और प्रौद्योगिकी के व्यावसायीकरण के लिए संयुक्त पहल पर सहमति जताई, जिसमें प्रक्षेपण सुविधाएं और उपग्रह निर्माण शामिल है।

खाद्य सुरक्षा और कृषि सहयोग पर भी चर्चा हुई। खाद्य सुरक्षा और तकनीकी मानकों से जुड़े समझौता ज्ञापन से भारतीय किसानों को लाभ मिलने और यूएई की खाद्य स्थिरता मजबूत होने की उम्मीद जताई गई।

जन-संपर्क को लेकर दोनों नेताओं ने बताया कि यूएई में लगभग 45 लाख भारतीय रहते हैं। युवा आदान-प्रदान को बढ़ावा देने और अबू धाबी में सांस्कृतिक विरासत स्थल के रूप में ‘हाउस ऑफ इंडिया’ स्थापित करने पर भी सहमति बनी।

क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर साझा दृष्टिकोण

बैठक में क्षेत्रीय और वैश्विक घटनाक्रमों पर भी विचार हुआ। दोनों देशों ने पश्चिम एशिया में शांति और स्थिरता के समर्थन को दोहराया। यूएई ने 2026 में भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता का समर्थन किया, जबकि भारत ने उसी वर्ष यूएई द्वारा आयोजित संयुक्त राष्ट्र जल सम्मेलन के लिए समर्थन जताया।

शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान ने प्रधानमंत्री मोदी को गर्मजोशी भरे स्वागत के लिए धन्यवाद दिया और इस यात्रा को भारत-यूएई रणनीतिक संबंधों के निरंतर विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।

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