सोनम वांगचुक की रिहाई के लिए पुणे के लोगों और संगठनों ने निकाली रैली

पुणे में 4 अक्टूबर को सोनम वांगचुक की रिहाई और लद्दाख में सतत विकास की मांग को लेकर 150 से अधिक लोगों ने विरोध मार्च और सार्वजनिक सभा आयोजित की. एनएपीएम सहित 22 संगठनों ने लद्दाख के लोगों के अधिकार, न्याय और पारिस्थितिकी संरक्षण की आवश्यकता पर जोर दिया.

Suraj Mishra
Edited By: Suraj Mishra

पुणे में 4 अक्टूबर को वरिष्ठ पर्यावरणविद् और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की तत्काल रिहाई और लद्दाख में सतत विकास की मांग को लेकर बड़ी सार्वजनिक रैली और विरोध प्रदर्शन हुआ. यह कार्यक्रम संभाजी गार्डन में आयोजित किया गया, जिसमें लगभग 150 लोग रानी झांसी प्रतिमा से संभाजी गार्डन तक मार्च करते हुए बैनर और नारे लेकर पहुंचे. नारे वांगचुक के समर्थन और लद्दाख के स्थायी विकास की मांग को दर्शा रहे थे, जैसे “वांगचुक के लिए न्याय, लोगों के लिए न्याय” और “सोनम वांगचुक को रिहा करो, लोकतंत्र बचाओ.”

कानूनी विशेषज्ञ एडवोकेट असीम सरोदे ने क्या कहा?

कार्यक्रम के दौरान, कानूनी विशेषज्ञ एडवोकेट असीम सरोदे ने कहा कि वांगचुक की गिरफ्तारी पूरी तरह अवैध है. उन्होंने बताया कि वांगचुक को परिवार से मिलने की अनुमति नहीं दी गई और उनकी पत्नी को सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा. सरोदे ने बताया कि वांगचुक की मांग केवल यह थी कि भाजपा लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने का वादा पूरा करे, लेकिन इसके बजाय उन्हें गिरफ्तार किया गया.

अन्य वक्ताओं ने भी गिरफ्तारी की कड़ी निंदा की और चीन द्वारा लगभग 4,000 वर्ग किलोमीटर भारतीय क्षेत्र पर कब्जे के खुलासे के बाद वांगचुक के लगातार उत्पीड़न का आरोप लगाया. उन्होंने वांगचुक की तत्काल रिहाई और लद्दाख में सतत और जन-केंद्रित विकास की आवश्यकता पर जोर दिया.

एनएपीएम ने की गिरफ्तारी की निंदा

नेशनल अलायंस ऑफ पीपुल्स मूवमेंट्स (एनएपीएम) ने भी एक सार्वजनिक बयान जारी कर वांगचुक की गिरफ्तारी की निंदा की और केंद्र व लद्दाखी लोगों के बीच शांतिपूर्ण बातचीत की मांग की. एनएपीएम ने एनएसए के तहत आरोप वापस लेने, हाल की हिंसा में हुई मौतों की न्यायिक जांच, राज्य खर्च पर चिकित्सा सहायता और घायलों के मुआवजे की मांग की. साथ ही, लद्दाख के लोगों को संविधान के तहत पूर्ण राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची के संरक्षण की दिशा में ठोस बातचीत शुरू करने का आग्रह किया.

एनएपीएम ने यह भी कहा कि लद्दाख के संरक्षण से न केवल वहां के लोगों का भविष्य सुरक्षित होगा, बल्कि हिमालयी क्षेत्र के संवेदनशील पारिस्थितिकी तंत्र और सीमा पार राजनीतिक महत्व को भी संरक्षित किया जा सकेगा.

विरोध मार्च और सार्वजनिक बैठक में पुणे के 22 संगठनों ने भाग लिया, जिनमें एनएपीएम, जवाब दो, दिशा विद्यार्थी संगठन, स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया, जन संघर्ष समिति और महाराष्ट्र अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति शामिल थे. इसके अलावा, लद्दाखी छात्र और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस, आम आदमी पार्टी व रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया के प्रतिनिधि भी इसमें शामिल हुए. इस कार्यक्रम ने स्थानीय और राष्ट्रीय स्तर पर लद्दाख के स्थायी विकास और वांगचुक की रिहाई के लिए व्यापक समर्थन दिखाया.

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