नजर बनाए रखिए...PM मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति की कब होगी मुलाकात ? AI समिट में अमेरिकी राजदूत ने दिया ये जवाब
अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026 के भव्य मंच से भारत और अमेरिका के संबंध को सकारात्मक बताया है. उन्होंने कहा कि पीएम मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच जल्द ही मुलाकात होने की संभावना है. हालांकि, उन्होंने मुलाकात को लेकर कोई निश्चित समय-सीमा नहीं बताई है.

नई दिल्ली : भारत और अमेरिका के कूटनीतिक गलियारों में एक बार फिर बड़ी हलचल की सुगबुगाहट शुरू हो गई है. दुनिया के दो सबसे बड़े लोकतंत्रों के प्रमुखों, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बहुप्रतीक्षित मुलाकात को लेकर अब उम्मीदें काफी बढ़ गई हैं. इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के भव्य मंच से अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने इस संबंध में बेहद सकारात्मक संकेत दिए हैं. पिछले एक साल के लंबे कूटनीतिक अंतराल और व्यापारिक चुनौतियों के बाद अब दोनों देशों के रिश्ते एक नई दिशा की ओर बढ़ते दिख रहे हैं.
मुलाकात की बढ़ती संभावना
बता दें कि अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने समिट के दौरान स्पष्ट रूप से संकेत दिया कि दोनों शीर्ष नेताओं की यह महत्वपूर्ण भेंट बहुत जल्द होने वाली है. यद्यपि उन्होंने वर्तमान में किसी निश्चित समय-सीमा का खुलासा नहीं किया, पर उन्होंने विश्लेषकों को स्थिति पर बारीकी से नजर बनाए रखने का सुझाव दिया. गोर के मुताबिक, सही वक्त आने पर यह ऐतिहासिक मीटिंग अवश्य संपन्न होगी. गौरतलब है कि प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप की आखिरी आमने-सामने की मुलाकात करीब एक साल पहले वॉशिंगटन डीसी में हुई थी और तब से दुनिया काफी बदल चुकी है.
कुछ समय से दोनों देश के रिश्तों में तनाव
पिछले कुछ समय से भारत और अमेरिका के द्विपक्षीय संबंधों में व्यापारिक मोर्चे पर थोड़ी स्पष्ट कड़वाहट और कूटनीतिक तनाव देखा गया था. इसकी मुख्य वजह अमेरिका द्वारा भारतीय निर्यात पर लगाया गया 50 फीसदी का भारी टैरिफ था. हालांकि, दोनों देशों के बीच हाल ही में संपन्न हुई एक महत्वपूर्ण ट्रेड डील ने इस तनाव को काफी हद तक कम करने का काम किया है. अब यह टैरिफ घटकर मात्र 18 फीसदी रह गया है, जिससे द्विपक्षीय व्यापारिक गतिविधियों को भविष्य में एक नई ऊर्जा मिलने की प्रबल संभावना नजर आ रही है.
पैक्स सिलिका: एक रणनीतिक गठबंधन
भारत अब अमेरिका के नेतृत्व वाले अत्यंत महत्वपूर्ण रणनीतिक गठजोड़ ‘पैक्स सिलिका’ का एक अभिन्न हिस्सा बन गया है. सर्जियो गोर ने इसे केवल एक प्रतीकात्मक कदम के बजाय दोनों देशों के उज्ज्वल भविष्य के लिए एक बड़ा रणनीतिक फैसला बताया है. इस गठबंधन का प्राथमिक और मुख्य उद्देश्य महत्वपूर्ण खनिजों तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता के लिए एक बेहद लचीली और अटूट वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला का निर्माण करना है. भारत की इंजीनियरिंग प्रतिभा और खनिज प्रसंस्करण क्षमता इस नए अंतरराष्ट्रीय गठबंधन के लिए आवश्यक सभी तकनीकी योग्यताएं बखूबी प्रदान करती हैं.
AI तकनीक साझा करने का भरोसा
अमेरिकी राजदूत ने यह सकारात्मक सुझाव दिया है कि पैक्स सिलिका ढांचे के अंतर्गत अमेरिका अब भारत के साथ अपनी विश्वसनीय एआई प्रौद्योगिकियां साझा करने की दिशा में तेजी से बढ़ सकता है. इंडिया एआई समिट के दौरान केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव की गरिमामयी उपस्थिति में गोर ने भारतीय इंजीनियरिंग कौशल की जमकर प्रशंसा की. उन्होंने कहा कि भारत के पास प्रतिभा का वह अक्षय भंडार है जो वैश्विक प्रतिद्वंद्वियों को कड़ी चुनौती दे सकता है. अमेरिका अब खनिज प्रसंस्करण में भी भारत के साथ पूरी सहभागिता के लिए पूरी तरह तैयार है.
ब्लैकमेलिंग के खिलाफ वैश्विक एकजुटता
अमेरिकी उप विदेश मंत्री जैकब हेलबर्ग ने भारत के इस गठबंधन में शामिल होने के साहसिक फैसले की सराहना की है. उन्होंने पैक्स सिलिका को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में किसी भी तरह के अनुचित दबाव और आर्थिक ब्लैकमेलिंग की रणनीति के खिलाफ एक बड़ी वैश्विक पहल बताया है. इसे सीधे तौर पर चीन के बढ़ते प्रभुत्व और उसकी नीतियों के प्रति एक स्पष्ट कूटनीतिक इशारा माना जा रहा है. हेलबर्ग ने चेतावनी दी कि आज कई सहयोगी देश अपनी संप्रभुता और समृद्धि के बीच चुनाव करने के लिए विवश हो रहे हैं.


