पंजाब को चाहिए 20,000 करोड़, सिर्फ 1600 करोड़ से नहीं ... राहुल गांधी ने PM मोदी को लिखा पत्र

2025 में पंजाब में आई भीषण बाढ़ ने पिछले 30 सालों का रिकॉर्ड तोड़ दिया. राज्य के सभी 23 जिले प्रभावित हुए, 2000 से अधिक गांवों में तबाही मची और 50 से ज़्यादा मौतें हुईं. केंद्र ने 1600 करोड़ की राहत दी, जिसे राहुल गांधी ने अपर्याप्त बताया. उन्होंने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर नुकसान का उचित मुआवज़ा और बाढ़ पीड़ितों के लिए ठोस पुनर्वास योजना की मांग की.

Utsav Singh
Edited By: Utsav Singh

Rahul Gandhi letter to PM Modi: साल 2025 में पंजाब ने पिछले 30 वर्षों की सबसे भयानक बाढ़ का सामना किया. प्रदेश की प्रमुख नदियां सतलुज, ब्यास, रावी और घग्गर उफान पर रहीं और उन्होंने राज्य के सभी 23 जिलों में तबाही मचाई. बाढ़ के कारण 2000 से अधिक गांव प्रभावित हुए और करीब चार लाख लोग इसकी चपेट में आए. इस भीषण आपदा में 50 से अधिक लोगों की जान चली गई और हजारों परिवार बेघर हो गए.

1600 करोड़ की केंद्रीय सहायता पर उठे सवाल

बाढ़ के बाद केंद्र सरकार ने पंजाब के लिए 1600 करोड़ रुपये की राहत राशि की घोषणा की. हालांकि, यह राहत राशि अब विवाद का विषय बन गई है. कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने इस राशि को 'गंभीर अन्याय' बताया है. उनका कहना है कि बाढ़ से राज्य को करीब 20,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है और ऐसे में 1600 करोड़ रुपये नाकाफी हैं.

राहुल गांधी का प्रधानमंत्री को पत्र
राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखकर पंजाब में हुई तबाही पर चिंता जताई है. उन्होंने अपने पत्र में लिखा कि केंद्र की ओर से घोषित प्रारंभिक राहत न केवल अपर्याप्त है, बल्कि यह राज्य के प्रति एक अन्याय है. उन्होंने सरकार से मांग की कि पंजाब में तत्काल राहत और पुनर्वास कार्यों को गंभीरता से लागू किया जाए. साथ ही यह भी कहा कि संकट की इस घड़ी में केंद्र को संवेदनशीलता और तत्परता के साथ कदम उठाने चाहिए.

बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा
राहुल गांधी ने 15 सितंबर को पंजाब के बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा किया. इस दौरान उन्होंने स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों से बातचीत की और प्रभावित नागरिकों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं. उन्होंने लोगों की व्यथा और नुकसान को करीब से देखा और महसूस किया. इसके बाद ही उन्होंने केंद्र सरकार को पत्र लिखने का निर्णय लिया ताकि पंजाब की जनता को और अधिक सहायता दिलाई जा सके.

पंजाब में आई यह बाढ़ केवल प्राकृतिक आपदा नहीं थी, बल्कि यह शासन, राहत और राजनीतिक प्रतिक्रिया की भी एक बड़ी परीक्षा बन गई. जहां एक ओर केंद्र की ओर से राहत दी गई, वहीं दूसरी ओर विपक्ष ने इसे अपर्याप्त बताया. अब यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले दिनों में केंद्र सरकार इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाती है और क्या पंजाब को और अधिक राहत मिल पाएगी या नहीं.

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