'ये देशद्रोह है....,' BMC चुनाव को लेकर ऐसा क्यों बोले राहुल गांधी? चुनाव आयोग से किया सवाल

बीते दिन महाराष्ट्र में हुए नगर निगम चुनाव में मतदाताओं की उंगली पर लगाई गई स्याही को लेकर विवाद शुरू हो गया है. राहुल गांधी ने चुनाव आयोग पर आरोप लगाया है कि वे नागरिकों को गुमराह कर रहे हैं.

Sonee Srivastav

महाराष्ट्र: महाराष्ट्र के हालिया नगर निगम चुनावों में मतदाताओं की उंगली पर लगाई गई स्याही को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. विपक्षी नेताओं और कुछ मतदाताओं का आरोप है कि यह स्याही आसानी से मिटाई जा सकती है, जिससे फर्जी मतदान की आशंका बढ़ जाती है. इस मुद्दे पर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है. 

उन्होंने सोशल मीडिया पर एक मीडिया रिपोर्ट साझा की, जिसमें स्याही के मिटने के दावों का जिक्र था. राहुल गांधी ने लिखा कि चुनाव आयोग द्वारा नागरिकों को गुमराह करना लोकतंत्र में विश्वास के पतन का कारण है. उन्होंने इसे "वोट चोरी" करार देते हुए कहा कि यह एक राष्ट्र-विरोधी कार्य है.

उद्धव ठाकरे ने निलंबन की मांग की 

यह विवाद मुख्य रूप से बृहनमुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) समेत 29 नगर निगमों के चुनाव के दौरान सामने आया. शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने राज्य चुनाव आयुक्त पर सत्ताधारी गठबंधन के पक्ष लेने का आरोप लगाया. उन्होंने आयुक्त दिनेश वाघमारे के निलंबन की मांग की. 

विपक्ष का कहना है कि सोशल मीडिया पर कई वीडियो वायरल हुए हैं, जिनमें स्याही को हैंड सैनिटाइजर, एसीटोन या नेल पॉलिश रिमूवर से मिटाते दिखाया गया है.कांग्रेस नेता वर्षा गायकवाड़ ने भी ऐसा एक वीडियो साझा किया था। ऐसे दावों से मतदान की शुचिता पर सवाल उठे हैं. 

राज्य चुनाव आयोग का स्पष्टीकरण

राज्य चुनाव आयोग ने इन आरोपों पर तुरंत कार्रवाई की. आयुक्त दिनेश वाघमारे ने स्पष्ट किया कि इस्तेमाल की गई स्याही अमिट है और इसे आसानी से नहीं मिटाया जा सकता. उन्होंने कहा कि एसीटोन या नेल पॉलिश से स्याही मिटने का दावा गलत है. आयोग ने जांच का आदेश दिया है और भ्रम फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी है. 

आयोग के बयान में कहा गया कि स्याही मिटाने की कोशिश अवैध है. यदि कोई व्यक्ति स्याही हटाकर दोबारा मतदान करने की कोशिश करता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई होगी. मतदान रिकॉर्ड से दोबारा वोटिंग असंभव है, क्योंकि मतदाता का नाम पहले ही दर्ज हो जाता है. आयोग ने मतदान कर्मचारियों को पहले ही निर्देश दे दिए थे कि स्याही मिटाने पर भी दोबारा मतदान की अनुमति नहीं मिलेगी. 

लोकतंत्र में विश्वास की चुनौती

यह विवाद महाराष्ट्र की राजनीति में गहरा असर डाल रहा है. राहुल गांधी की टिप्पणी से साफ है कि विपक्ष चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठा रहा है. चुनाव आयोग ने स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश की है, लेकिन सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो ने जनता में संदेह पैदा किया है.

चुनावी स्याही का मुद्दा पुराना नहीं है, लेकिन इस बार यह इतना बड़ा हो गया कि राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया. लोकतंत्र की मजबूती के लिए ऐसी शिकायतों की निष्पक्ष जांच जरूरी है, ताकि मतदाताओं का भरोसा बना रहे.
 

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