ट्रेड डील पर क्यों किया 'जिउ-जित्सु' का जिक्र? राहुल गांधी का नया बयान क्यों आया चर्चा में
भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर भाषण के दौरान जिउ-जित्सु का उदाहरण देने पर उठे सवालों के बीच राहुल गांधी ने वीडियो जारी कर कहा कि ‘ग्रिप’ और ‘चोक’ राजनीतिक दबाव को सरल तरीके से समझाने के लिए इस्तेमाल किए गए थे.

नई दिल्ली: भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर संसद में दिए गए भाषण के दौरान जब राहुल गांधी ने ‘ग्रिप’ और ‘चोक’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया, तो सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई. लोगों को हैरानी हुई कि व्यापार समझौते पर चर्चा करते समय मार्शल आर्ट का उदाहरण क्यों दिया गया. अब कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने खुद एक वीडियो जारी कर इस तुलना की वजह साफ की है. राहुल गांधी ने अपने बयान में कहा कि जिउ-जित्सु में विरोधी को काबू में करने के लिए पकड़ और गला दबाने जैसी तकनीकों का इस्तेमाल होता है.
उनका कहना है कि राजनीति में भी कई बार इसी तरह का दबाव काम करता है. फर्क सिर्फ इतना है कि खेल में यह सब साफ दिखता है, जबकि राजनीति में यह दबाव छिपा हुआ होता है. उनके अनुसार, ट्रेड डील के मामले में भी प्रधानमंत्री पर ऐसे अदृश्य दबाव थे, जिन्हें आम लोग आसानी से नहीं देख पाते. उन्होंने कहा कि जिउ-जित्सु का उदाहरण इसलिए दिया गया ताकि जटिल राजनीतिक स्थिति को आसान भाषा में समझाया जा सके.
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बिना किसी पारस्परिक वादे के, हर… https://t.co/N3DS9BIEuU— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) February 20, 2026
क्या है जिउ-जित्सु?
ब्राजीलियन जिउ-जित्सु एक ऐसी मार्शल आर्ट है जिसमें जमीन पर लड़ाई की तकनीकें प्रमुख होती हैं. इसमें ताकत से ज्यादा तकनीक, संतुलन और शरीर के सही इस्तेमाल पर जोर दिया जाता है. पकड़, चोक और जोड़ लॉक जैसी विधियों से विरोधी को नियंत्रित किया जाता है.
जिउ-जित्सु शब्द दो जापानी शब्दों से बना है- ‘जू’ जिसका अर्थ है कोमल, और ‘जुत्सु’ जिसका मतलब है कला. इसलिए इसे ‘कोमल कला’ भी कहा जाता है. आज के समय में MMA और UFC जैसी प्रतियोगिताओं में इसका व्यापक उपयोग होता है. राहुल गांधी खुद भी इस कला का अभ्यास करते रहे हैं. भारत जोड़ो न्याय यात्रा के दौरान वे नियमित रूप से इसकी ट्रेनिंग करते नजर आए थे.
जिउ-जित्सु का इतिहास
जिउ-जित्सु की शुरुआत को लेकर अलग-अलग मत हैं. कुछ मानते हैं कि इसकी जड़ें भारत के बौद्ध भिक्षुओं तक जाती हैं, जो आत्मरक्षा के लिए बिना ज्यादा चोट पहुंचाए तकनीकें अपनाते थे. बाद में यह कला जापान पहुंची और वहां विकसित हुई. 20वीं सदी की शुरुआत में जापानी खिलाड़ी मित्सुओ माएदा इसे ब्राजील लेकर गए. वहीं कार्लोस ग्रेसी और हेलियो ग्रेसी जैसे प्रशिक्षकों ने इसे और विकसित किया, जिससे ब्राजीलियन जिउ-जित्सु को नई पहचान मिली.
राजनीति से क्यों की तुलना?
राहुल गांधी का कहना है कि जिउ-जित्सु में बिना शोर किए विरोधी को नियंत्रित किया जाता है. इसी तरह राजनीति में भी कई फैसलों पर अदृश्य दबाव काम करते हैं. ट्रेड डील के संदर्भ में उन्होंने यही समझाने की कोशिश की कि कुछ निर्णय खुलकर नहीं, बल्कि दबाव के बीच लिए जाते हैं. 20 फरवरी 2026 को किए गए अपने हिंदी पोस्ट में भी उन्होंने यही बात दोहराई. उनके मुताबिक, ‘ग्रिप’ और ‘चोक’ जैसे शब्द राजनीतिक दबाव की सही तस्वीर पेश करते हैं.


