कर्रेगुट्टा हिल्स नें सुरक्षाबलों का बड़ा ऑपरेशन, 24,000 जवानों ने 1 हजार नक्सलियों को बनाया निशाना

तेलंगाना और छत्तीसगढ़ की सीमा पर फैले कर्रेगुट्टा पहाड़ियों में भारत का अब तक का सबसे बड़ा नक्सल विरोधी अभियान चलाया जा रहा है. लगभग 24,000 सुरक्षाकर्मियों ने भीषण गर्मी और कठिन भौगोलिक स्थितियों में एक सप्ताह से अधिक समय तक अभियान चलाकर करीब 1,000 नक्सलियों को उनके गढ़ से खदेड़ दिया है. यह अभियान गृह मंत्री अमित शाह के मार्च 2026 तक वामपंथी उग्रवाद को समाप्त करने के संकल्प के तहत संचालित किया जा रहा है.

Yaspal Singh
Edited By: Yaspal Singh

तेलंगाना और छत्तीसगढ़ की सीमा पर स्थित कर्रेगुट्टा पहाड़ियों में देश का अब तक का सबसे व्यापक नक्सल विरोधी अभियान जारी है. भीषण गर्मी और बेहद कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बीच  केंद्रीय और राज्य सुरक्षा बलों के करीब 24,000 जवानों ने एक हफ़्ते से अधिक समय तक चले इस ऑपरेशन में लगभग 1,000 माओवादियों को उनके छिपने के ठिकानों से बाहर निकालने में सफलता हासिल की है.

इस अभियान को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा मार्च 2026 तक नक्सलवाद को जड़ से खत्म करने की नीति के तहत चलाया जा रहा है. सुरक्षा बलों ने करीब 800 वर्ग किलोमीटर में फैले इस माओवादी गढ़ को पूरी तरह से घेर लिया है और छिपे हुए उग्रवादियों को दो टूक संदेश दिया है. आत्मसमर्पण करें या मारे जाएं.

नक्सलियों के ठिकानों से गुफाएं, बंकर और हथियार बरामद

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि अभियान के दौरान कई माओवादी ठिकानों का खुलासा हुआ है, जिनमें बड़ी प्राकृतिक गुफाएं, भूमिगत बंकर और हथियारों के जखीरे शामिल हैं. ये बरामदगी सुरक्षा बलों को माओवादियों के संगठनात्मक ढांचे को तोड़ने में मददगार साबित हो रही है.

लगातार जारी है तलाशी और मुठभेड़

बीते सप्ताह सुरक्षा बलों और माओवादियों के बीच कई मुठभेड़ें हुईं. हालांकि अभी तक केवल तीन महिला उग्रवादियों के शव बरामद हुए हैं, लेकिन खुफिया इनपुट के अनुसार माओवादियों को भारी नुकसान पहुंचा है. अधिकारी मानते हैं कि कुछ शीर्ष माओवादी नेता अभी भी इलाके में छिपे हो सकते हैं.

IED से जर्जर इलाका, ड्रोन से निगरानी

सुरक्षा बल धीरे-धीरे विस्फोटकों से भरे इस क्षेत्र में प्रवेश कर रहे हैं. ऑपरेशन को सफल बनाने के लिए ड्रोन और एयर सर्विलांस का सहारा लिया जा रहा है. सुरक्षाकर्मी हर कदम फूंक-फूंक कर रख रहे हैं क्योंकि क्षेत्र में कई जगह प्रेशर बम और IED लगे हैं.

जवानों की जुझारू भूमिका

इस ऑपरेशन में कोबरा, STF और DRG जैसी विशेष इकाइयों के जवान शामिल हैं. अभियान के दौरान तीन जवान IED विस्फोटों में घायल हुए हैं, वहीं तापमान 41 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंचने के कारण कई जवानों को डिहाइड्रेशन की समस्या के चलते अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा है.

अभियान का लक्ष्य

संचालन का मुख्य उद्देश्य दंडकारण्य विशेष क्षेत्रीय समिति (DKSZC), तेलंगाना राज्य समिति (TSC), पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (PLGA) की पहली बटालियन और अन्य नक्सली इकाइयों के प्रभुत्व को समाप्त करना है, जिन्होंने इस क्षेत्र को अपनी गतिविधियों का सुरक्षित अड्डा बना रखा था. अधिकारियों के अनुसार, यह ऑपरेशन तब तक जारी रहेगा जब तक कि इस पूरे 800 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र को माओवादियों से मुक्त नहीं कर दिया जाता.

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