पूर्व CM शिबू सोरेन को पद्म भूषण से किया जाएगा सम्मानित, पूरा झारखंड मनाएगा जश्न
झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और आदिवासी नेता स्वर्गीय शिबू सोरेन को गणतंत्र दिवस 2026 के दिन मरणोपरांत पद्म भूषण से सम्मानित किया जाएगा. यह सम्मान उन्हें लोक कल्याण और सार्वजनिक कार्यों के क्षेत्र में दिया जाएगा.

नई दिल्ली: झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और आदिवासी नेता स्वर्गीय शिबू सोरेन को मरणोपरांत पद्म भूषण से सम्मानित किया जाएगा. यह सम्मान उन्हें लोक कल्याण और सार्वजनिक कार्यों के क्षेत्र में दिए गए योगदान के लिए मिल रहा है. गणतंत्र दिवस 2026 की पूर्व संध्या पर केंद्र सरकार ने पद्म पुरस्कारों की सूची जारी की, जिसमें शिबू सोरेन का नाम शामिल है.
आदिवासियों के मसीहा दिशोम गुरु
शिबू सोरेन को आदिवासी समुदाय 'दिशोम गुरु' कहकर पुकारता था. 'दिशोम' का अर्थ है दिशा दिखाने वाला और यहां यह आदिवासी क्षेत्र को संदर्भित करता है. उन्होंने आदिवासियों के अधिकारों, भूमि सुरक्षा और शोषण के खिलाफ लंबा संघर्ष किया. उनकी वजह से झारखंड के किसान, मजदूर और काश्तकार एकजुट हुए और बेहतर जीवन की उम्मीद जगी.
शिबू सोरेन संघर्ष की शुरुआत
11 जनवरी 1944 को रामगढ़ जिले के नेमरा गांव में जन्मे शिबू सोरेन संथाल जनजाति से थे. स्कूली पढ़ाई के दौरान उनके पिता की हत्या हो गई. मात्र 18 साल की उम्र में उन्होंने संथाल नवयुवक संघ बनाया, जो आदिवासी युवाओं को संगठित करने का माध्यम बना.
1972 में बिनोद बिहारी महतो और एके रॉय के साथ मिलकर उन्होंने झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) की स्थापना की. सोरेन इसके महासचिव बने. झामुमो ने जनजातीय भूमि वापसी के लिए बड़े आंदोलन चलाए.
सोरेन का राजनीतिक सफर
शिबू सोरेन तीन बार झारखंड के मुख्यमंत्री रहे. पहली बार 2005 में सिर्फ 10 दिन, फिर 2008-2009 और 2009-2010 में. वे दुमका से कई बार लोकसभा सांसद चुने गए (1980-84, 1989-98, 2002-2019). केंद्र में तीन बार कोयला मंत्री भी रहे. उनके बेटे हेमंत सोरेन वर्तमान में झारखंड के मुख्यमंत्री हैं.
4 अगस्त 2025 को दिल्ली के एक अस्पताल में 81 वर्ष की उम्र में उनका निधन हो गया. पद्म भूषण से सम्मान उनके आदिवासी उत्थान, सामाजिक न्याय और लोक कल्याण के कार्यों को मान्यता देता है. शिबू सोरेन की सादगी और संघर्ष की भावना झारखंड और पूरे देश में याद की जाएगी.


