TMC ने शत्रुघ्न सिन्हा को भेजा AAP के लिए प्रचार करने, कांग्रेस के लिए खतरे की घंटी!
दिल्ली में TMC ने कांग्रेस को जोरदार संदेश देते हुए शत्रुघ्न सिन्हा को AAP के लिए प्रचार करने भेजा है. इस कदम से पूर्वांचली वोटरों पर खास असर पड़ने की उम्मीद है. साथ ही, SP और कुछ अन्य पार्टियों का भी AAP को समर्थन बढ़ सकता है. कांग्रेस की मुश्किलें अब और बढ़ने वाली हैं, क्योंकि TMC का यह कदम भारतीय राजनीति में बड़ा बदलाव ला सकता है. जानिए पूरी कहानी में क्या खास है!

Delhi Election 2025: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने कांग्रेस को एक बड़ा संदेश देते हुए दिल्ली में आम आदमी पार्टी (AAP) के लिए प्रचार करने के लिए अभिनेता शत्रुघ्न सिन्हा को भेजने का फैसला किया है. यह कदम कांग्रेस के लिए चौंकाने वाला है, क्योंकि सिन्हा ने पहले कांग्रेस के साथ कई साल बिताए थे और अब वो TMC के समर्थन में प्रचार करेंगे.
पूर्वांचल के वोट पर नजर
शत्रुघ्न सिन्हा का नाम सुनते ही दिल्ली के पूर्वांचली वोटर की याद आ जाती है, जो कि शहर के एक तिहाई मतदाताओं का हिस्सा हैं. सिन्हा, जिन्हें 'बिहारी बाबू' के नाम से जाना जाता है, भाजपा के प्रमुख पूर्वांचली प्रचारकों मनोज तिवारी और रवि किशन से मुकाबला करेंगे. इस फैसले से दिल्ली में मुकाबला और भी दिलचस्प हो सकता है, क्योंकि सिन्हा की मौजूदगी से पूर्वांचली वोटों पर सीधा असर पड़ेगा.
टीएमसी और सपा का समर्थन
TMC और समाजवादी पार्टी (SP) का AAP के लिए प्रचार करना कांग्रेस के लिए और भी चिंताजनक है, क्योंकि इससे भारतीय राजनीति के बड़े दलों में कांग्रेस की स्थिति और कमजोर होती जा रही है. सूत्रों के अनुसार, SP भी कुछ सांसदों को भेजकर AAP के लिए प्रचार कर सकती है. इससे यह साफ हो रहा है कि कई राज्य और पार्टी के नेता दिल्ली में भाजपा और कांग्रेस के खिलाफ AAP को अपना समर्थन दे रहे हैं.
कांग्रेस से TMC की दूरी
TMC का यह कदम कांग्रेस के लिए कड़वा होगा, क्योंकि शत्रुघ्न सिन्हा को कांग्रेस ने पहले भाजपा से दूर करने की कोशिश की थी. हालांकि, 2022 में सिन्हा कांग्रेस छोड़कर TMC में शामिल हो गए थे. अब उनकी यह कदम कांग्रेस को और भी कमजोर बना सकता है, क्योंकि यह संकेत है कि TMC भारतीय राजनीति में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए पूरी तरह से तैयार है.
क्या TMC कांग्रेस को पीछे छोड़ सकती है?
टीएमसी, जो लगातार भाजपा के खिलाफ खड़ी हो रही है, ने अब कांग्रेस की स्थिति पर सवाल उठाना शुरू कर दिया है. ममता बनर्जी के नेतृत्व में TMC ने कई राज्यों में अपनी पकड़ बनाई है और कई दलों ने उन्हें भारत के अगले नेता के रूप में समर्थन दिया है. वहीं, कांग्रेस लगातार चुनावों में भाजपा से हार रही है, और TMC का यह कदम उसे और पीछे धकेल सकता है.
बिहार में कांग्रेस पर दबाव
बिहार में भी कांग्रेस के लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं. लालू प्रसाद यादव और राजद ने कांग्रेस पर दबाव डालने की कोशिश की है, जिससे आने वाले चुनावों में कांग्रेस की स्थिति कमजोर हो सकती है. 2020 के विधानसभा चुनावों में भी कांग्रेस ने 70 सीटों में से केवल 19 सीटें जीती थीं, जबकि राजद ने 144 सीटों में से 75 सीटें जीतकर कांग्रेस को पीछे छोड़ दिया था.
कांग्रेस के लिए मुश्किलें बढ़ने वाली हैं
टीएमसी और अन्य दलों द्वारा AAP के समर्थन से यह साफ हो रहा है कि कांग्रेस के लिए आगे की राह आसान नहीं होगी. दिल्ली में कांग्रेस का प्रदर्शन अगर खराब रहता है, तो पार्टी को अपने नेतृत्व और रणनीतियों पर गंभीर विचार करना होगा. TMC का यह कदम भारतीय राजनीति में एक नया मोड़ ला सकता है, जिसमें कांग्रेस को खुद की जगह फिर से मजबूत बनाने के लिए कई मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा.


