UGC Bill 2026 : क्या है UGC का नया नियम, जिसका विरोध कर रहे सवर्ण, जानिए इससे पिछड़ी जातियों को कितना फायदा होगा
UGC 2026 के नए एक्ट को लेकर देशभर में विरोध प्रदर्शन हो रहा है. नए नियमों को लेकर यह कहा जा रहा है कि इससे कॉलेज और यूनिवर्सिटी कैंपस में माहौल खराब हो सकता है. इस कानून को लेकर सवर्ण जातियों में आक्रोश काफी बढ़ गया है. वे इसे कैंपस का माहौल बिगाड़ने और झूठी शिकायतों की आशंका बता रहे है.

नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से UGC समानता विनियम 2026 जारी किए हैं. इन नियमों का मकसद विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में वंचित वर्गों से जुड़ी शिकायतों के समाधान के लिए एक संगठित और जवाबदेह व्यवस्था तैयार करना है. यह पहल रोहित वेमुला और पायल ताडवी की माताओं द्वारा दायर याचिका के बाद सामने आई है. हालांकि, इन नए प्रावधानों को लेकर देश के एक वर्ग में तीखी नाराजगी भी देखने को मिल रही है.
अगड़ी जातियों में असंतोष, कैंपस माहौल पर सवाल
UGC was meant to protect education, not dilute it. Today, degrees are cheaper, standards are weaker, and students are the experiment. If education becomes a factory, don’t be surprised when minds stop thinking. Who is UGC really serving students or systems? pic.twitter.com/rbYhuJb5j2
— Jyotiraditya Singh (@AmJyotiraditya) January 24, 2026
क्या है UGC का नया नियम ?
नए विनियमों के तहत हर उच्च शिक्षण संस्थान में एक **समान अवसर केंद्र स्थापित करना अनिवार्य किया गया है. इस केंद्र को नागरिक समाज संगठनों, जिला प्रशासन, पुलिस, मीडिया और संस्थान के कर्मचारियों व शिक्षकों के साथ समन्वय स्थापित करना होगा. इसके अलावा, कानूनी सहायता उपलब्ध कराने के लिए जिला और राज्य विधिक सेवा प्राधिकरणों से भी संपर्क रखा जाएगा. इन नियमों में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति के साथ-साथ अन्य पिछड़ा वर्ग को भी जाति-आधारित भेदभाव की श्रेणी में शामिल किया गया है, जिस पर सबसे अधिक आपत्ति जताई जा रही है.
पिछड़े वर्गों में संतोष, सोशल मीडिया पर तीखी बहस
जहां एक ओर अगड़ा समाज इन नियमों का विरोध कर रहा है, वहीं पिछड़े और वंचित वर्गों में इसे एक सकारात्मक कदम के रूप में देखा जा रहा है. सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को लेकर बहस तेज हो गई है. समर्थकों का मानना है कि इससे लंबे समय से अनदेखी झेल रहे वर्गों को संस्थागत सुरक्षा मिलेगी.
समान अवसर केंद्र की संरचना
संस्थान प्रमुख द्वारा गठित समान अवसर केंद्र में ओबीसी, एससी, एसटी, दिव्यांगजन और महिलाओं के प्रतिनिधि शामिल होंगे. यह केंद्र समानता से जुड़ी नीतियों के क्रियान्वयन, वंचित समूहों को शैक्षणिक और वित्तीय मार्गदर्शन देने और प्रशासनिक व सामाजिक संस्थाओं से तालमेल बनाने का कार्य करेगा. इसके तहत अब पिछड़े वर्गों के छात्र, शिक्षक और कर्मचारी अपने साथ होने वाले भेदभाव या उत्पीड़न की शिकायत सीधे इस केंद्र में दर्ज करा सकेंगे.
जाति-आधारित भेदभाव की परिभाषा पर विवाद
UGC के नए नियमों में ‘जाति-आधारित भेदभाव’ की परिभाषा को लेकर सबसे अधिक विवाद सामने आया है. नियमों के अनुसार, एससी, एसटी और ओबीसी समुदाय के सदस्यों के साथ केवल उनकी जाति या जनजाति के आधार पर किया गया व्यवहार जातिगत भेदभाव माना जाएगा. इसी परिभाषा को लेकर आलोचकों का कहना है कि इससे झूठी शिकायतों की संभावना बढ़ सकती है.
सोशल मीडिया पर #ShameOnUGC ट्रेंड
माइक्रोब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म X पर UGC के नए नियमों के विरोध में #ShameOnUGC ट्रेंड कर रहा है. कई यूजर्स का आरोप है कि ये नियम सामान्य वर्ग के हितों की अनदेखी करते हैं और उन्हें बिना पर्याप्त सुरक्षा के छोड़ देते हैं. कुछ पोस्ट्स में यहां तक कहा गया कि विश्वविद्यालय परिसर धीरे-धीरे जातीय टकराव के केंद्र बनते जा रहे हैं.
बढ़ती शिकायतों के बीच सवाल
हालांकि ओबीसी को विश्वविद्यालयों में नामांकन और फैकल्टी भर्ती में वर्षों पहले आरक्षण दिया गया, इसके बावजूद उच्च शिक्षा में उनकी भागीदारी सीमित बनी हुई है. वहीं, बढ़ते आंकड़े यह संकेत देते हैं कि भेदभाव की समस्या अब भी गंभीर है. ऐसे में UGC के नए नियमों को लेकर देश में चल रही बहस यह तय करेगी कि ये प्रावधान समाधान बनेंगे या नई चुनौतियों को जन्म देंगे.


