UGC बिल से सवर्ण समाज में मचा हड़कंप! बृजभूषण शरण सिंह ने कानून को लेकर तोड़ी चुप्पी
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के नए नियमों को लेकर पूरे देशभर में जमकर प्रदर्शन किया जा रहा है. सवर्ण समाज के लोग इस नियम से बिलकुल भी खुश नहीं है. ऐसे में बृजभूषण सिंह चुप्पी तोड़ते हुए मीडिया से बात की है.

UGC Bill 2026: देश भर में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए नियमों ने तहलका मचा दिया है. 13 जनवरी 2026 को अधिसूचित 'उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने वाले विनियम, 2026' 15 जनवरी से लागू हो गए. इन नियमों का मकसद कॉलेजों और यूनिवर्सिटियों में जाति आधारित भेदभाव को खत्म करना है, लेकिन सवर्ण समाज में इसे लेकर भारी विरोध देखने को मिल रहा है. उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, बिहार समेत कई राज्यों में प्रदर्शन हो रहे हैं. ऐसे में बृजभूषण शरण सिंह ने पहली बार इस मुद्दे पर बात की है.
UGC के इन विनियमों में SC, ST के साथ अब OBC छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों को भी जातीय भेदभाव से सुरक्षा मिलेगी. हर संस्थान में समान अवसर प्रकोष्ठ (Equal Opportunity Cell) बनाना अनिवार्य है. यूनिवर्सिटी स्तर पर समानता समिति गठित होगी, जिसमें SC, ST, OBC, महिलाओं और दिव्यांगों के प्रतिनिधि शामिल होंगे. यह समिति हर छह महीने में रिपोर्ट UGC को सौंपेगी. शिकायत दर्ज होने पर संस्थान को जांच करनी होगी और कार्रवाई करनी होगी.
क्यों नाराज है सवर्ण समाज?
सवर्ण संगठनों का आरोप है कि यह नियम उनके खिलाफ दुरुपयोग हो सकता है. कोई भी SC, ST या OBC सदस्य सवर्ण के खिलाफ शिकायत कर सकता है, जिससे उन्हें बार-बार सफाई देनी पड़ सकती है. उनका कहना है कि OBC को पहले से आरक्षण मिल रहा है, अब यह कानून सवर्णों को और अलग-थलग करेगा. कई जगह फोरम बनाकर विरोध जुटाया जा रहा है. कुछ लोग इसे 'रिवर्स डिस्क्रिमिनेशन' बता रहे हैं.
यति नरसिंहानंद ने उठाई आवाज
डासना देवी मंदिर के पीठाधीश्वर यति नरसिंहानंद गिरि ने इस नियम का खुलकर विरोध किया. उन्होंने कहा कि हर वर्ग की बात हो रही है, लेकिन ब्राह्मण, राजपूत, कायस्थ जैसे सवर्णों के हितों का क्या? अगर उनके साथ अन्याय होता है तो वे कहां शिकायत करेंगे? उन्होंने धरना देने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने रोक दिया.
बृजभूषण शरण सिंह का बयान
पूर्व सांसद और कुश्ती महासंघ से जुड़े बृजभूषण शरण सिंह से जब इस पर सवाल किया गया, तो उन्होंने साफ कहा, "मैं अभी इसका अध्ययन कर रहा हूं. जो बोलूंगा, सोच-समझकर बोलूंगा." इससे लगता है कि भाजपा के वरिष्ठ नेता भी इस मुद्दे पर सतर्क हैं और जल्दबाजी में बयान से बच रहे है.
फिलहाल विरोध बढ़ता देख UGC पर नियम वापस लेने या संशोधन की चर्चा है. 2027 में यूपी-उत्तराखंड चुनावों से पहले सरकार युवाओं और सवर्ण वोटरों को नाराज नहीं करना चाहती. यह मुद्दा अब राजनीतिक रंग ले चुका है और उच्च शिक्षा में समानता बनाम भेदभाव की बहस तेज हो गई है,


