अमेरिकी परमाणु युद्धपोत की तैनाती पर ईरान की कड़ी चेतावनी,‘किसी भी हमले का दिया जाएगा करारा जवाब’

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ गया है, जब USS अब्राहम लिंकन एयरक्राफ्ट कैरियर स्ट्राइक ग्रुप और F‑35, THAAD, Patriot मिसाइल तैनात किए गए. ईरान ने चेतावनी दी कि किसी भी हमले का जवाब “भारी और पछतावा दिलाने वाला” होगा. ईरान में विरोध प्रदर्शन जारी हैं, हजारों लोग मारे गए. चीन ने मध्य-पूर्व में कूटनीतिक सक्रियता बढ़ाई. वैश्विक शक्ति संतुलन और क्षेत्रीय स्थिरता पर असर पड़ने की संभावना है.

Utsav Singh
Edited By: Utsav Singh

नई दिल्ली : मध्य-पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच संबंध एक तनावपूर्ण मोड़ पर हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने USS अब्राहम लिंकन एयरक्राफ्ट कैरियर स्ट्राइक ग्रुप को परमाणु पनडुब्बियों, F 35C लड़ाकू विमानों और Arleigh Burke क्लास के विध्वंसक जहाजों के साथ मध्य-पूर्व भेजा. इस तैनाती का उद्देश्य ईरान के खतरों के प्रति “एहतियात” बरतना है, लेकिन तेहरान ने साफ संकेत दिया कि किसी भी हमले का जवाब “भारी और पछतावा दिलाने वाला” होगा. अमेरिकी सैन्य हस्तक्षेप में KC 135 रिफ्यूलर विमान, C 130 कार्गो विमान और THAAD व Patriot मिसाइल बैटरियों का समावेश किया गया है, जिससे क्षेत्र में अमेरिकी हड़ताल क्षमता और भी मजबूत हो गई है.

ईरान में विरोध प्रदर्शन और हिंसा

आपको बता दें कि ईरान में आर्थिक कठिनाइयों, मुद्रास्फीति और नागरिक असंतोष के चलते बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं. इन प्रदर्शनों में अब तक हजारों लोगों की मौत हुई है. इंटरनेट ब्लैकआउट के बाद धीरे-धीरे स्थिति की भयावहता सामने आई है, जिससे हिंसा और सरकारी कार्रवाई के गंभीर परिणाम स्पष्ट हुए हैं. Human Rights Activists News Agency (HRANA) के अनुसार, लगभग 17,000 मौतों की जांच चल रही है. यह स्थिति ईरान की आंतरिक स्थिरता के लिए खतरा उत्पन्न कर रही है और अमेरिका की सैन्य तैनाती इसे और जटिल बना रही है.

चीन की कूटनीतिक सक्रियता
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच, चीन ने मध्य-पूर्व में कूटनीतिक पहल तेज कर दी है. चीनी उपराष्ट्रपति वांग यी ने 57 देशों वाले इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) के महासचिव के साथ बीजिंग में अहम बैठक की. वांग यी ने क्षेत्रीय स्थिरता, राजनीतिक समाधान और सैन्य टकराव से बचाव के लिए साझेदारी पर जोर दिया. उनका मानना है कि संवाद और सहयोग के माध्यम से ही क्षेत्र में स्थिरता लाई जा सकती है. उन्होंने कहा कि चीन दुनिया को “जंगल के कानून” की ओर लौटने से रोकने का प्रयास करेगा और वैश्विक शक्ति संतुलन बनाए रखने में जिम्मेदार भूमिका निभाएगा.

वैश्विक प्रभाव और भविष्य की संभावनाएं
विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिका की सैन्य तैनाती और ईरान की चेतावनी केवल क्षेत्रीय तनाव तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वैश्विक शक्ति संतुलन और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर भी असर डाल सकती हैं. यदि संघर्ष और बढ़ता है, तो मध्य-पूर्व में सैन्य टकराव की संभावना गंभीर रूप से बढ़ जाएगी. वहीं, कूटनीतिक प्रयास तनाव कम करने और क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने के लिए निर्णायक साबित हो सकते हैं. चीन की मध्यस्थता इस मामले में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संतुलन स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है.

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