क्या कनाडा को मिलेगी नई दिल्ली से संजीवनी? ट्रंप की कार्रवाई से डरे मार्क कार्नी जल्द कर सकते हैं भारत का दौरा
डोनाल्ड ट्रंप की संरक्षणवादी नीतियों के दबाव में कनाडा भारत को रणनीतिक और आर्थिक साझेदार मान रहा है. कनाडा के पीएम मार्क कार्नी मार्च में भारत का दौरा कर सकते हैं. व्यापार समझौते, ऊर्जा और खनिज सहयोग, तथा अमेरिकी टैरिफ के बीच द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करना मुख्य उद्देश्य है.

नई दिल्लीः डोनाल्ड ट्रंप की अमेरिका-केंद्रित नीतियों और कनाडा के खिलाफ दिए गए टैरिफ के संकेतों ने ओटावा को विदेश नीति में बदलाव के लिए प्रेरित किया है. अब कनाडा भारत को एक महत्वपूर्ण रणनीतिक और आर्थिक साझेदार के रूप में देख रहा है. यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के नेतृत्व में ओटावा-बीजिंग संबंधों में कड़वाहट कम हो रही है. कनाडा अमेरिकी संरक्षणवादी नीतियों के बावजूद अपने व्यापार और संप्रभुता को सुरक्षित रखना चाहता है.
भारत दौरे की तैयारियां
सूत्रों के मुताबिक, प्रधानमंत्री मार्क कार्नी मार्च के पहले सप्ताह में भारत दौरे पर आ सकते हैं. यह दौरा द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से हो रहा है. भारतीय उच्चायुक्त दिनेश पटनायक के अनुसार, इस दौरान ऊर्जा, यूरेनियम, खनिज और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में कई समझौतों पर हस्ताक्षर किए जाने की संभावना है. यह कदम ऐसे समय में महत्व रखता है जब भारत अमेरिकी टैरिफ दबाव का सामना कर रहा है.
जयशंकर-अनंद की सार्थक बातचीत
भारत के 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद और विदेश मंत्री एस. जयशंकर के बीच हुई बैठक को सार्थक बताया गया. दोनों नेताओं ने आर्थिक साझेदारी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता में सहयोग और उच्च स्तरीय आदान-प्रदान को बढ़ाने पर चर्चा की. आनंद ने कहा कि कनाडा को अमेरिकी दबाव से विचलित नहीं होना चाहिए और व्यापार विविधीकरण के जरिए अगले दस वर्षों में निर्यात को दोगुना करने की योजना बनाई जा रही है.
ट्रंप के टैरिफ का प्रभाव
हालिया ट्रंप प्रशासन की धमकियों में कहा गया कि अगर कनाडा चीन के सामानों के लिए ड्रॉप-ऑफ पोर्ट बनता है, तो 100% टैरिफ लगाया जाएगा. कनाडा को खाद्य पदार्थों और ईवी के व्यापार में रियायत देने के समझौते के कारण अमेरिकी प्रशासन यह कदम उठा रहा है. अमेरिका और कनाडा के बीच पिछले साल 280 अरब डॉलर का निर्यात और 322 अरब डॉलर का आयात हुआ, लेकिन अमेरिकी दृष्टि में चीन के साथ ओटावा का जुड़ाव चिंता का विषय है.
भारत और कनाडा में समान दबाव
भारत और कनाडा दोनों को अमेरिकी उच्च शुल्क का सामना करना पड़ रहा है. भारत को 50% और कनाडा को 35% शुल्क लागू है. इस समान दबाव ने दोनों देशों को व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA) के लिए मजबूर किया, जिसका लक्ष्य 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 50 अरब डॉलर तक बढ़ाना है.
रणनीतिक और सुरक्षा हित
कनाडा भारत के साथ अपने रक्षा और आर्थिक संबंधों को मजबूत कर रहा है. भारतीय खनिज, गैस और ऊर्जा संसाधन कनाडा के लिए महत्व रखते हैं. वहीं भारत के लिए यह कदम उत्तरी अमेरिकी बाजार में पहुंच बढ़ाने और ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने का अवसर है. अनीता आनंद ने कहा कि व्यापार विविधीकरण ही हमारी अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाएगा.
नाजुक संतुलन
कनाडा के ऊर्जा मंत्री टिम हॉजसन जल्द ही गोवा में भारतीय अधिकारियों से मिलेंगे. दोनों पक्षों के बीच खनिज, यूरेनियम और LNG पर समझौते की संभावना है. विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका के साथ निकट संबंधों में दरार कनाडा के लिए आर्थिक जोखिम बढ़ा सकती है, इसलिए ओटावा अपने विकल्पों में संतुलन बना रहा है.


