क्या जेल से बाहर आएंगे उमर खालिद, शरजील इमाम? दिल्ली दंगों केस में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला आज

उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से जुड़े यूएपीए मामले में सुप्रीम कोर्ट आज बड़ा फैसला सुनाएगा. उमर खालिद, शरजील इमाम समेत सात आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर यह निर्णय लंबे समय से प्रतीक्षित है.

Shraddha Mishra

साल 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से जुड़े एक अहम मामले में सुप्रीम कोर्ट सोमवार को बड़ा फैसला सुनाने वाला है. यह फैसला कार्यकर्ता उमर खालिद, शोधकर्ता शरजील इमाम और पांच अन्य आरोपियों द्वारा दायर जमानत याचिकाओं पर आएगा. यह मामला पिछले पांच वर्षों से अधिक समय से चल रहा है और अब यह केवल अदालतों तक सीमित न रहकर राजनीतिक और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बन चुका है.

न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति एनवी अंजारी की दो सदस्यीय पीठ ने दिसंबर में इस मामले में सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद दिसंबर में फैसला सुरक्षित रख लिया था. आरोपियों ने दिल्ली उच्च न्यायालय के सितंबर 2023 के आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें आरोपों की गंभीरता का हवाला देते हुए जमानत देने से इनकार कर दिया गया था. 

किन लोगों पर हैं आरोप

इस मामले में उमर खालिद, शरजील इमाम, गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर, शिफा उर रहमान, मोहम्मद सलीम खान और शादाब अहमद को आरोपी बनाया गया है. इन सभी पर गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी यूएपीए और भारतीय दंड संहिता की धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज है. पुलिस का आरोप है कि फरवरी 2020 में हुई हिंसा के पीछे यही लोग मुख्य साजिशकर्ता थे. इन दंगों में 53 लोगों की मौत हुई थी और सैकड़ों लोग घायल हुए थे.

हिंसा के पीछे गहरी साजिश 

दिल्ली पुलिस ने जमानत का विरोध करते हुए कहा है कि यह हिंसा अचानक नहीं भड़की थी, बल्कि इसके पीछे एक गहरी और पहले से तैयार की गई साजिश थी. पुलिस का दावा है कि दंगों का मकसद देश को अस्थिर करना और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि को नुकसान पहुंचाना था. अभियोजन पक्ष के अनुसार, कॉल रिकॉर्ड, चैट संदेश और गवाहों के बयान इस साजिश की ओर इशारा करते हैं.

पुलिस के मुताबिक, उमर खालिद ने ‘चक्का जाम’ की रणनीति को आगे बढ़ाया और कई बैठकों के जरिए विरोध को हिंसक रूप देने की योजना बनाई. वहीं शरजील इमाम पर आरोप है कि उसने भड़काऊ भाषण देकर लोगों को उकसाया और अलग-अलग जगहों पर सड़क जाम की बात कही. पुलिस यह भी कहती है कि अंतरराष्ट्रीय ध्यान खींचने के लिए घटनाओं का समय जानबूझकर चुना गया था.

बचाव पक्ष की दलील

आरोपियों के वकीलों ने लंबी हिरासत और मुकदमे में हो रही देरी को जमानत का आधार बताया है. उमर खालिद और शरजील इमाम सितंबर 2020 से जेल में हैं और अभी तक आरोप तय करने की प्रक्रिया भी पूरी नहीं हो पाई है. बचाव पक्ष का कहना है कि इतने लंबे समय तक बिना सजा के जेल में रखना न्यायसंगत नहीं है.

अंतरिम जमानत और राजनीतिक प्रतिक्रिया

हाल ही में एक निचली अदालत ने उमर खालिद को अपनी बहन की शादी में शामिल होने के लिए सीमित समय की अंतरिम जमानत दी थी. इसके बाद राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई. कुछ नेताओं ने इसे देर से मिली राहत बताया, तो वहीं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस मामले को लेकर बयान सामने आए.

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