यूपी में 12वीं के छात्र और बीए ग्रेजुएट ने किया ऑपरेशन, महिला की मौत, दोनों आरोपी गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश के अम्बेडकरनगर में एक स्वास्थ्य सेवाओं की पोल खुल गई है. बसखारी के एक निजी क्लीनिक में बिना मेडिकल डिग्री के दो युवकों ने गर्भवती महिला का सी-सेक्शन कर दिया.और महिला की दर्दनाक मौत गई. क्लीनिक पिछले 5 साल से बिना रजिस्ट्रेशन चल रहा था. एक आरोपी बीए पास, दूसरा 12वीं का छात्र है.

Goldi Rai
Edited By: Goldi Rai

उत्तर प्रदेश के अम्बेडकरनगर जिले से स्वास्थ्य सेवाओं की पोल खोलने वाली एक दर्दनाक घटना सामने आई है. बसखारी थाना क्षेत्र के एक निजी क्लीनिक में बिना किसी मेडिकल डिग्री के दो युवकों ने एक गर्भवती महिला का सिजेरियन ऑपरेशन कर दिया, जिसके परिणामस्वरूप महिला की मौत हो गई. क्लीनिक पिछले पांच साल से बिना रजिस्ट्रेशन के चल रहा था. महिला की मौत के बाद परिजनों के हंगामे के बाद पुलिस ने मामला दर्ज किया और शुक्रवार को मिशन शक्ति टीम ने दोनों फरार आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया.

यह घटना स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही और फर्जी डॉक्टरों के नेटवर्क को उजागर करती है.जहां अनपढ़ या अप्रशिक्षित लोग बड़े ऑपरेशन कर रहे हैं. मीडिया के अनुसार आरोपी 32 वर्षीय योगेश वर्मा बीए ग्रेजुएट हैं, जबकि 19 वर्षीय शुभम विश्वकर्मा अभी 12वीं का छात्र है.

 पूरा मामला

बसखारी थाना क्षेत्र के बुकिया गांव की 28 वर्षीय प्रियंका पत्नी संदीप शर्मा को 5 फरवरी को लेबर पेन होने पर परिजनों ने आजमगढ़ रोड स्थित नवजीवन क्लीनिक में भर्ती कराया. यहां योगेश और शुभम ने मिलकर सी-सेक्शन किया और महिला ने एक पुत्री को जन्म दिया. ऑपरेशन असुरक्षित होने से अत्यधिक बल्ड शुरू हो गया. 6 फरवरी की रात प्रियंका की मौत हो गई. आक्रोशित परिजनों ने शव को क्लीनिक के सामने रखकर हंगामा किया और लापरवाही का आरोप लगाया.

पुलिस कार्रवाई और गिरफ्तारी

पुलिस ने गैर-इरादतन हत्या का मुकदमा दर्ज किया. स्वास्थ्य विभाग ने क्लीनिक को सील कर दिया और मुकदमा दर्ज कराया. जांच में पाया गया कि क्लीनिक बिना पंजीकरण और बिना डिग्री वाले चिकित्सकों से संचालित हो रहा था. शुक्रवार को पुलिस की मिशन शक्ति टीम ने पूर्वी चौराहा से योगेश यादव और शुभम विश्वकर्मा को गिरफ्तार किया. पूछताछ में योगेश ने शुभम के साथ मिलकर प्रियंका का सी-सेक्शन करने की बात कबूल की. दोनों को जेल भेज दिया गया है.

थानाध्यक्ष का बयान

थानाध्यक्ष सुनील कुमार पांडेय ने बताया कि दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है. जांच जारी है जो भी दोषी पाया जाएगा, उसको जेल भेजा जाएगा. नवजीवन क्लीनिक स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के नाक के नीचे वर्षों से बिना विभागीय पंजीकरण के संचालित हो रहा था.

फर्जी डॉक्टरी का बड़ा खेल

अस्पताल में बिना डिग्री के चिकित्सक और अप्रशिक्षित नर्स बेखौफ होकर बड़े ऑपरेशन कर रहे हैं. नवजीवन क्लीनिक अकेला नहीं है, क्षेत्र में आधा दर्जन ऐसे अस्पताल धड़ल्ले से प्रसव करा रहे हैं. कई आशा बहुएं गर्भवती महिलाओं को ऐसे क्लीनिकों में पहुंचाने में भूमिका निभाती हैं और बदले में कमीशन लेती हैं.

आरोपी योगेश के पिता ने क्या कहा?

आरोप है कि योगेश यादव के पिता पूर्व में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर वार्ड बॉय थे. योगेश ने उनके साथ रहकर छोटे-मोटे मरीजों को दवा देने का अनुभव हासिल किया. बताया जाता है कि योगेश की स्वास्थ्य विभाग में मजबूत पकड़ है, जिसके चलते वह बिना रोक-टोक के क्लीनिक चला रहा था और बड़े ऑपरेशन कर रहा था.

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