घूसघोर पंडत के खिलाफ योगी सरकार ने दिया FIR का आदेश, मायावती ने भी ब्राह्मणों को लेकर कही ये बात

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सख्त निर्देश पर लखनऊ के हजरतगंज पुलिस स्टेशन में फिल्म के निर्देशक, निर्माता और टीम के सदस्यों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है. अब घूसघोर पंडत के निर्माता और अभिनेता की तरफ से सफाई आई है. बीएसपी प्रमुख ने भी इस सीरीज पर सवाल खड़े किए हैं.

Yaspal Singh
Edited By: Yaspal Singh

लखनऊः उत्तर प्रदेश में नई नेटफ्लिक्स फिल्म 'घूसखोर पंडित' को लेकर तीखा विवाद खड़ा हो गया है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सख्त निर्देश पर लखनऊ के हजरतगंज पुलिस स्टेशन में फिल्म के निर्देशक, निर्माता और टीम के सदस्यों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है. आरोप है कि फिल्म का शीर्षक और उसकी सामग्री ब्राह्मण समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचाती है तथा सामाजिक सद्भाव को खतरे में डालती है.

योगी सरकार की सख्त कार्रवाई

शुक्रवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जनता की शिकायतों पर ध्यान देते हुए कानून-व्यवस्था के अधिकारियों को तुरंत एक्शन लेने का आदेश दिया. कई संगठनों और व्यक्तियों ने शिकायत की कि 'घूसखोर' (रिश्वतखोर) शब्द को 'पंडित' के साथ जोड़ना ब्राह्मण समाज के प्रति अपमानजनक है. पुलिस ने इसे धार्मिक-जातिगत भावनाओं को आहत करने और अशांति फैलाने की आशंका के आधार पर मामला दर्ज किया.

हजरतगंज थाने के इंस्पेक्टर के निर्देश पर यह एफआईआर दर्ज हुई, जिसमें फिल्म के निर्देशक और अन्य सदस्यों के नाम शामिल हैं. यह कदम योगी सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति का हिस्सा माना जा रहा है, जो ऐसी सामग्री के खिलाफ त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करती है.

मायावती ने क्या कहा?

उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा कि यह बड़े दुख व चिन्ता की बात है कि पिछले कुछ समय से अकेले यू.पी. में ही नहीं बल्कि अब तो फिल्मों में भी ’पंडत’ को घूसखोर आदि बताकर पूरे देश में जो इनका अपमान व अनादर किया जा रहा है तथा जिससे समूचे ब्राह्मण समाज में इस समय ज़बरदस्त रोष व्याप्त है, इसकी हमारी पार्टी भी कड़े शब्दों में निन्दा करती है. ऐसी इस जातिसूचक फिल्म (वेब सीरीज) ’घूसखोर पंडत’ पर केन्द्र सरकार को तुरन्त प्रतिबन्ध लगाना चाहिये, बी.एस.पी. की यह मांग. साथ ही, इसको लेकर लखनऊ पुलिस द्वारा प्राथमिकी दर्ज करना उचित कदम.

नीरज पांडे का स्पष्टीकरण

निर्देशक-निर्माता नीरज पांडे ने विवाद बढ़ने पर सोशल मीडिया पर बयान जारी किया. उन्होंने कहा कि फिल्म पूरी तरह काल्पनिक पुलिस ड्रामा है और 'पंडित' शब्द सिर्फ एक काल्पनिक किरदार के बोलचाल वाले नाम के रूप में इस्तेमाल किया गया है. कहानी किसी व्यक्ति की गलतियों, भ्रष्टाचार और आत्म-सुधार की यात्रा पर आधारित है, न कि किसी जाति, धर्म या समुदाय पर टिप्पणी करती है.

पांडे ने लिखा कि वे अपनी जिम्मेदारी को समझते हैं और सम्मानजनक कहानियां सुनाना चाहते हैं. जनता की चिंताओं का सम्मान करते हुए टीम ने सभी प्रचार सामग्री, टीजर सहित, हटाने का फैसला किया है. उनका मानना है कि फिल्म को पूरा देखकर ही समझा जाना चाहिए, न कि सिर्फ झलकियों से.

मनोज बाजपेयी की सफाई

फिल्म में मुख्य किरदार निभाने वाले अभिनेता मनोज बाजपेयी ने भी अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर विस्तृत पोस्ट किया. उन्होंने कहा कि वे जनभावनाओं का पूरा सम्मान करते हैं और लोगों की चिंताओं को गंभीरता से लेते हैं. अभिनेता के अनुसार, उनका किरदार एक त्रुटिपूर्ण पुलिस अधिकारी का है, जो भ्रष्टाचार में फंसा है और अपनी आत्म-साक्षात्कार की यात्रा पर है. इसका मकसद किसी समुदाय को निशाना बनाना नहीं था. बाजपेयी ने नीरज पांडे की फिल्म निर्माण शैली की तारीफ की और कहा कि प्रचार सामग्री हटाने का फैसला लोगों की भावनाओं की गंभीरता को दर्शाता है.

अन्य संगठनों की आपत्ति

विवाद सिर्फ राजनीतिक या सामाजिक स्तर तक सीमित नहीं रहा. फिल्म मेकर्स कंबाइन जैसी संस्था ने भी शीर्षक के लिए अनिवार्य अनुमति न लेने पर नोटिस जारी किया. मुंबई के वकील आशुतोष दुबे ने नेटफ्लिक्स और टीम को अलग से कानूनी नोटिस भेजा, जिसमें इसे मानहानिकारक बताया गया. दिल्ली हाई कोर्ट में भी फिल्म पर रोक लगाने की याचिका दायर हुई है.
 

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