न्याय न मिलने पर किसान ने FB लाइव कर खुद को मारी गोली, थाना प्रभारी समेत कई पुलिसकर्मियों पर गिरी गाज

उत्तराखंड में जमीन धोखाधड़ी से परेशान किसान सुखवंत सिंह की आत्महत्या के बाद पुलिस प्रशासन पर कार्रवाई हुई है. थाना प्रभारी समेत 2 पुलिसकर्मी निलंबित और 10 लाइन हाजिर किए गए हैं, जबकि मामले में निष्पक्ष जांच की मांग तेज हो गई है.

Shraddha Mishra

उत्तराखंड: जमीन धोखाधड़ी से परेशान किसान सुखवंत सिंह की आत्महत्या के मामले ने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया है. इस संवेदनशील मामले में अब पुलिस प्रशासन पर बड़ी कार्रवाई की गई है. काशीपुर के आईटीआई थाना प्रभारी कुंदन रौतेला और उपनिरीक्षक प्रकाश बिष्ट को निलंबित कर दिया गया है, जबकि पैगा पुलिस चौकी प्रभारी समेत कुल 10 पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से लाइन हाजिर किया गया है. यह कार्रवाई चार करोड़ रुपये की कथित जमीन धोखाधड़ी और पुलिस की लापरवाही के आरोपों के बाद की गई है.

किसान सुखवंत सिंह जमीन से जुड़े एक बड़े फ्रॉड का शिकार हुआ था. आरोप है कि सुखवंत को एक जमीन दिखाकर दूसरी जमीन थमा दी गई और उनसे करीब चार करोड़ रुपये की ठगी की गई. मानसिक तनाव और लगातार न्याय न मिलने की पीड़ा के चलते सुखवंत सिंह ने हल्द्वानी पहुंचकर कथित तौर पर खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली. आत्महत्या से पहले सुखवंत ने फेसबुक पर चार मिनट से अधिक का लाइव वीडियो किया, जिसमें उसने अपनी आपबीती बताई और 27 लोगों पर गंभीर आरोप लगाए. 

पुलिस पर लापरवाही के आरोप

सुखवंत सिंह का कहना था कि उसने जमीन धोखाधड़ी के संबंध में आईटीआई थाना, पैगा चौकी और उच्च पुलिस अधिकारियों को लिखित शिकायतें दी थीं, लेकिन कहीं भी उनकी एफआईआर दर्ज नहीं की गई. उसने आरोप लगाया कि थाने में उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया और मामले को दबाने के लिए पुलिस को रिश्वत दी गई. लगातार अनदेखी और उत्पीड़न के चलते वह गहरे अवसाद में चले गए.

मृतक किसान के सुसाइड नोट में पुलिसकर्मियों सहित कुल 27 लोगों के नाम सामने आए हैं. इन सभी पर जमीन हड़पने, धोखाधड़ी और मानसिक उत्पीड़न के आरोप लगाए गए हैं. परिजनों का साफ कहना है कि अगर समय रहते पुलिस ने शिकायत पर कार्रवाई की होती, तो आज सुखवंत सिंह जिंदा होते.

परिजनों और किसानों का आक्रोश

घटना के बाद परिजनों ने शव रखकर प्रदर्शन की चेतावनी दी थी और सीबीआई जांच की मांग उठाई थी. किसान संगठनों ने भी इस मामले को गंभीर बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग तेज कर दी. किसान नेताओं का कहना है कि यह सिर्फ एक व्यक्ति की मौत नहीं, बल्कि सिस्टम की विफलता का नतीजा है.

ताजा खबरें

ट्रेंडिंग वीडियो

close alt tag