नए साल की शुरुआत में चमकेगा वुल्फ सुपरमून, आज इन शहरों से दिखेगा ये खास नजारा
3 जनवरी की रात वुल्फ सुपरमून आकाश में दिखाई देगा. यह 2026 की पहली पूर्णिमा और साल के तीन सुपरमून में से एक होगा, जो सामान्य पूर्णिमा से अधिक बड़ा और चमकीला नजर आएगा.

नए साल की शुरुआत खगोल प्रेमियों के लिए एक शानदार नजारे के साथ होने जा रही है. 3 जनवरी की रात आसमान में एक बेहद चमकीला और आकर्षक 'वुल्फ सुपरमून' दिखाई देगा. यह चंद्रमा सामान्य पूर्णिमा की तुलना में थोड़ा बड़ा और अधिक उज्ज्वल नजर आएगा, जिससे रात का आसमान और भी सुंदर हो जाएगा. यह पूर्णिमा साल 2026 की पहली पूर्णिमा होगी और इस साल में दिखाई देने वाले कुल तीन सुपरमून में से एक है.
जब चंद्रमा पृथ्वी के काफी पास होता है और उसी समय पूर्णिमा होती है, तो उसे सुपरमून कहा जाता है. इस कारण चंद्रमा सामान्य से अधिक चमकीला और बड़ा दिखाई देता है. चंद्रमा की पृथ्वी के चारों ओर की कक्षा गोल नहीं, बल्कि अंडाकार होती है. इसी वजह से कभी वह पृथ्वी के ज्यादा करीब आता है और कभी थोड़ा दूर चला जाता है.
3 जनवरी को चंद्रमा लगभग 3 लाख 62 हजार किलोमीटर की दूरी पर होगा, जो इसे और खास बना देता है. इस स्थिति में चंद्रमा अपने सबसे दूर वाले स्थान की तुलना में आकार में 6-14% बड़ा और रोशनी में 13-30% अधिक चमकीला दिखाई देगा.
जनवरी में चंद्रमा क्यों दिखता है ज्यादा चमकीला?
इस बार की पूर्णिमा को एक तरह से 'तीन गुना फायदा' मिल रहा है. पहला यह पूर्णिमा है, दूसरा यह पेरिगी के करीब है और तीसरा, इसी समय पृथ्वी सूर्य के भी अपेक्षाकृत करीब होती है. इन तीनों कारणों से चंद्रमा पर पड़ने वाली सूर्य की रोशनी बढ़ जाती है, जिससे वह और ज्यादा चमकता हुआ दिखाई देता है। हालांकि नंगी आंखों से देखने पर आकार का फर्क बहुत ज्यादा महसूस नहीं होता, लेकिन चमक में अंतर साफ नजर आता है.
क्यों कहा जाता है इसे वुल्फ मून?
जनवरी की पूर्णिमा को पारंपरिक रूप से वुल्फ मून कहा जाता है. यह नाम उत्तरी देशों की पुरानी लोककथाओं से जुड़ा है, जहां सर्दियों की लंबी रातों में भेड़ियों की आवाजें सुनाई देती थीं. आज के समय में यह नाम एक सांस्कृतिक पहचान बन चुका है और हर महीने की पूर्णिमा को अलग नाम से पहचानने का तरीका माना जाता है.
कब और कैसे देखें यह नज़ारा?
चंद्रमा 3 जनवरी की रात लगभग 10 बजे (ग्रीनविच समय) पूरी तरह पूर्ण होगा. हालांकि इसके एक दिन पहले और बाद भी यह लगभग पूर्ण ही दिखाई देगा. सबसे सुंदर दृश्य चंद्रमा के उदय के समय देखने को मिलेगा, जब वह क्षितिज के पास होता है और हल्का पीला या नारंगी रंग लिए होता है.
क्या भारत में दिखेगा सुपरमून?
हां, यह अद्भुत नजारा पूरे भारत में साफ देखा जा सकेगा. भारतीय समय के अनुसार लोग इसे सूर्यास्त के तुरंत बाद, करीब शाम 5:45 से 6 बजे के बीच देख पाएंगे. यह चंद्रमा पूरी रात आकाश में रहेगा और सुबह होते-होते पश्चिम दिशा में अस्त हो जाएगा. यह साल की सबसे खूबसूरत खगोलीय घटनाओं में से एक है, जिसे बिना किसी उपकरण के भी देखा जा सकता है. अगर आपके पास कैमरा या दूरबीन हो, तो इसका अनुभव और भी खास बन सकता है.


