18 दिनों में छठी हिंदू हत्या! जशोर में गोली मारी, नरसिंगड़ी में घोंपा चाकू
बांग्लादेश में हिन्दुओं पर लगातार हमला हो रहा है. 24 घंटे के अंदर दो अलग-अलग जगहों पर दो हिंदू व्यक्तियों की जान ले ली गई. इनमे से एक दूकानदार और दूसरा कारोबारी और पत्रकार था.

नई दिल्ली: बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर हमलों का सिलसिला जारी है. पिछले 24 घंटों में दो अलग-अलग घटनाओं में दो हिंदू व्यक्तियों की जान चली गई. इन वारदातों ने देश में सांप्रदायिक तनाव को और बढ़ा दिया है. हिंदू समुदाय के लोग अब खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं.
हिन्दू दुकानदार की बेरहमी से हत्या
नरसिंगड़ी जिले के पलाश क्षेत्र में स्थित चोरसिंदूर बाजार में एक किराना दुकान चलाने वाले 40 साल के शरत चक्रवर्ती मणि (मोनी चक्रवर्ती) पर अज्ञात लोगों ने धारदार हथियारों से हमला किया. यह घटना 5 जनवरी की रात करीब 10 बजे हुई. गंभीर रूप से घायल मणि को अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन उनकी जान नहीं बच सकी.
गवाहों के अनुसार, हमला अचानक हुआ और हमलावर मौके से भाग निकले. ढाका के करीब होने के कारण यह घटना ज्यादा चिंताजनक है. स्थानीय लोग मानते हैं कि यह हमला सिर्फ इसलिए हुआ क्योंकि पीड़ित हिंदू था.
जशोर में कारोबारी और पत्रकार को मारी गोली
इसी दिन शाम करीब 6 बजे जशोर जिले के मणिरामपुर क्षेत्र के कोपालिया बाजार में 38-45 साल के राणा प्रताप बैरागी की हत्या कर दी गई. राणा एक आइस फैक्ट्री के मालिक थे और एक स्थानीय अखबार के कार्यकारी संपादक भी.
मोटरसाइकिल सवार कुछ लोग आए, उन्हें फैक्ट्री से बाहर बुलाया और एक गली में ले जाकर सिर में गोलियां चला दी. पुलिस को मौके से खाली कारतूस मिले हैं. कुछ रिपोर्टों में इसे व्यक्तिगत या आपराधिक कारण बताया गया है, लेकिन समुदाय इसे लक्षित हमला मान रहा है.
पिछले 18 दिनों में छठी घटना
ये दोनों हत्याएं पिछले 18 दिनों में हिंदू समुदाय पर हुई छठी लक्षित वारदात हैं. इससे पहले:
- 18 दिसंबर को मयमनसिंह में दीपू चंद्र दास की भीड़ ने पीट-पीटकर हत्या की.
- 24 दिसंबर को राजबारी में अमृत मंडल को मार डाला गया.
- 29-30 दिसंबर को बजेंद्र बिस्वास की गोली मारकर हत्या हुई.
- 31 दिसंबर को शरियतपुर में खोकन चंद्र दास पर हमला हुआ, जिनकी 3 जनवरी को मौत हो गई.
हिंदू संगठनों का कहना है कि दिसंबर में ही कई हमले हुए और कट्टरपंथी ताकतें अल्पसंख्यकों को डराने की कोशिश कर रही हैं.
बढ़ता तनाव और अंतरराष्ट्रीय चिंता
ये घटनाएं दिसंबर 2025 में एक कट्टरपंथी नेता की मौत के बाद शुरू हुई हिंसा से जुड़ी बताई जा रही है. अंतरिम सरकार पर अल्पसंख्यकों की सुरक्षा न करने के आरोप लग रहे हैं. भारत ने इन हमलों पर गहरी चिंता जताई है. मानवाधिकार संगठनों ने भी कानून-व्यवस्था की गिरावट की आलोचना की है. हिंदू समुदाय में डर का माहौल है और लोग सुरक्षित भविष्य की मांग कर रहे हैं.


