लादेन के अल-कायदा की 'एनाकोंडा' रणनीति, इस देश में बना डाली छाया सरकार

पश्चिम अफ्रीकी देश माली इस समय बेहद खतरनाक दौर से गुजर रहा है. यहां आतंकी संगठन अल-कायदा और JNIM जैसे संगठनों का प्रभाव लगातार बढ़ रहा है और हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि कई विशेषज्ञ इसे अफगानिस्तान में तालिबान की वापसी जैसा मान रहे हैं.

Anuj Kumar
Edited By: Anuj Kumar

नई दिल्ली: पश्चिम अफ्रीकी देश माली इस समय बेहद खतरनाक दौर से गुजर रहा है. यहां आतंकी संगठन अल-कायदा और JNIM जैसे संगठनों का प्रभाव लगातार बढ़ रहा है और हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि कई विशेषज्ञ इसे अफगानिस्तान में तालिबान की वापसी जैसा मान रहे हैं. कभी लोकतंत्र की ओर बढ़ता माली अब इस कदर कमजोर हो चुका है कि सरकार सिर्फ कुछ बड़े सैन्य ठिकानों और प्रमुख शहरों में ही नियंत्रण बनाए रख पा रही है. बाकी अधिकांश हिस्सों पर जिहादी संगठन जेएनआईएम (JNIM) का प्रभाव साफ दिखाई देता है.

आतंकियों ने बनाई 'छाया सरकार'

सहेल क्षेत्र जिसमें माली, बुर्किना फासो, चाड, नाइजर और मॉरिटानिया शामिल हैं. पहले से ही जलवायु परिवर्तन, खाद्य संकट और राजनीतिक अस्थिरता से जूझ रहा था. ऐसे में उग्रवादी समूहों को फैलने का मौका मिला. साल 2022 में जब माली की सैन्य सरकार अपने ही आंतरिक संघर्षों में उलझी हुई थी, तब जेएनआईएम ने तेजी से खाली स्थान भर लिया और एक तरह की 'छाया सरकार' बना ली. कई ग्रामीण इलाकों में उनकी अपनी अदालतें और टैक्स वसूली प्रणाली चलने लगी, जो सरकारी व्यवस्था से ज्यादा प्रभावी दिखने लगी.

जिहादियों के कब्जे में होगा 70 फीसदी क्षेत्र

2025 की शुरुआत तक अनुमान है कि माली के 70% से अधिक क्षेत्र या तो पूरी तरह जिहादियों के कब्जे में होंगे या लगातार संघर्ष का मैदान बने रहेंगे. इस साल हालात और भी खराब हो गए. जुलाई में उग्रवादियों ने ईंधन सप्लाई रोक दी, जो सेनेगल और आइवरी कोस्ट के जरिए आती है. सितंबर में उन्होंने दक्षिणी हिस्सों की मुख्य सड़कों को बंद कर दिया. अक्टूबर में अमेरिकी दूतावास ने बढ़ते आतंकवादी हमलों की चेतावनी देते हुए नागरिकों को तुरंत देश छोड़ने को कहा था. नवंबर में पांच भारतीय नागरिकों का अपहरण भी हुआ, जिससे सुरक्षा स्थिति की गंभीरता स्पष्ट हो गई.

20 लाख लोग हुए विस्थापित

इन हालात का असर केवल माली तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पड़ोसी देशों- नाइजर, बुर्किना फासो, मॉरिटानिया और अल्जीरिया पर भी पड़ रहा है. जिहादी बेखौफ होकर सीमाओं के पार अपनी गतिविधियां चला रहे हैं. माली में करीब 20 लाख लोग अपने घरों से विस्थापित हो चुके हैं. खेती नष्ट हो गई है और कई क्षेत्रों में लड़कियों की शिक्षा लगभग बंद कर दी गई है. सहायता संगठनों का कहना है कि माली में धीरे-धीरे तालिबान जैसा माहौल बनता जा रहा है.

जिहादियों की पकड़ मजबूत 

राजधानी बामाको में सैन्य शासक मीडिया पर नियंत्रण और सैनिक परेड के जरिए अपनी मजबूती दिखाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन ग्रामीण और दूरस्थ इलाकों में उनकी कोई पकड़ नहीं बची है. वहां जिहादियों की पकड़ इतनी मजबूत हो चुकी है कि लोग न्याय, सुरक्षा और रोजमर्रा के फैसलों के लिए उन्हीं पर निर्भर हैं.

अल कायदा का सबसे स्थिर और बड़ा गढ़

अगर जिहादी समूह राजधानी पर भी कब्जा कर लेते हैं, तो माली अलकायदा का सबसे स्थिर और बड़ा गढ़ बन सकता है. यह इलाका सोने की खदानों, तस्करी के रास्तों और बड़ी आबादी वाला क्षेत्र है, जिसे यह संगठन बलपूर्वक और स्थानीय गठबंधनों के सहारे चला रहे हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि माली का पतन दो तरह से हो सकता है- पहला अफगानिस्तान मॉडल, जिसमें सेना टूट जाती है, विदेशी सुरक्षा ठेकेदार भाग जाते हैं और शासन ढह जाता है या दूसरा सोमालिया मॉडल, जिसमें सिर्फ राजधानी का कुछ हिस्सा बच रहता है और बाकी पूरा देश उग्रवादी समूहों के नियंत्रण में चला जाता है.

चेकपोस्ट बनाकर टैक्स वसूली शुरू

इस बीच राजधानी बामाको भी घेराबंदी झेल रहा है. जिहादियों ने तमाम प्रमुख रास्तों पर चेकपोस्ट बनाकर टैक्स वसूली शुरू कर दी है. ट्रक शहर तक नहीं पहुंच पा रहे, जिससे जरूरी सामान- खाना, ईंधन और दवाइयां भारी कमियों से जूझ रहे हैं. बाजारों में महंगाई चरम पर है. कई गांवों में जिहादियों ने अपनी अदालतें और नियम लागू कर दिए हैं, जिसे विशेषज्ञ “छाया सरकार” कहते हैं.

सेना को कमजोर किया

माली की सैन्य सरकार, जिसने 2020 और 2021 के तख्तापलट के बाद सत्ता संभाली थी, अब अपनी ही व्यवस्था बनाए रखने में संघर्ष कर रही है. पश्चिमी सहयोगियों से दूरी और विदेशी भाड़े के लड़ाकों पर निर्भरता ने सेना को कमजोर कर दिया है. मनोबल गिर चुका है और संसाधनों की भारी कमी है. जैसे-जैसे इन्फ्रास्ट्रक्चर और सुरक्षा तंत्र टूट रहे हैं, जनता का सरकार से विश्वास खत्म होता जा रहा है.

ताजा खबरें

ट्रेंडिंग वीडियो

close alt tag