ईरानी हमलों से खाड़ी देशों में अफरा-तफरी, आनन-फानन में पहुंचे UN, तत्काल बहस की मांग

ईरान और अमेरिका के बीच संघर्ष तेज होकर खाड़ी देशों तक फैल गया है, जहां ईरान ऊर्जा ठिकानों और अमेरिकी बेस पर हमले कर रहा है. इन हमलों से तेल-गैस कीमतों में उछाल आया है और डरे हुए खाड़ी देशों ने संयुक्त राष्ट्र में तुरंत हस्तक्षेप की मांग की है.

Suraj Mishra
Edited By: Suraj Mishra

मध्य पूर्व में जारी तनाव अब एक बड़े युद्ध का रूप ले चुका है, जहां ईरान और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच टकराव लगातार तेज होता जा रहा है. ईरान ने जवाबी कार्रवाई के तहत खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है. इसके साथ ही तेल और गैस से जुड़ी महत्वपूर्ण ऊर्जा परियोजनाओं पर भी हमले किए जा रहे हैं, जिससे वैश्विक स्तर पर ऊर्जा संकट की आशंका बढ़ गई है.

खाड़ी देशों ने अंतरराष्ट्रीय मंच का किया रुख 

इन हमलों से घबराए खाड़ी देशों ने तुरंत अंतरराष्ट्रीय मंच का रुख किया है. संयुक्त राज्य अमेरिका में इस मुद्दे पर तत्काल बहस की मांग की गई है. रिपोर्ट्स के अनुसार, बहरीन, जॉर्डन, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब, संयुक्त अबर अमीरात ने जिनेवा स्थित मानवाधिकार परिषद में एक संयुक्त प्रस्ताव पेश किया है. इसमें ईरान द्वारा नागरिक इलाकों और ऊर्जा ढांचे पर किए जा रहे ड्रोन और मिसाइल हमलों को अंतरराष्ट्रीय शांति के लिए गंभीर खतरा बताया गया है.

यह संघर्ष अब अपने तीसरे सप्ताह में प्रवेश कर चुका है और इसके असर पूरे खाड़ी क्षेत्र में दिखने लगे हैं. ईरान की ओर से की जा रही कार्रवाई में न सिर्फ सैन्य ठिकाने, बल्कि तेल रिफाइनरी और गैस संयंत्र भी निशाने पर हैं. इससे न केवल क्षेत्रीय सुरक्षा पर खतरा बढ़ा है, बल्कि आम नागरिकों की जिंदगी भी प्रभावित हो रही है. खाड़ी देशों का कहना है कि उन्होंने पहले ही ईरान को आश्वासन दिया था कि उनकी जमीन का इस्तेमाल किसी भी तरह के ईरान-विरोधी हमलों के लिए नहीं किया जाएगा, इसके बावजूद उन पर हमले हो रहे हैं.

तेल और गैस की कीमतों में भारी उछाल 

स्थिति को और गंभीर तब बना दिया जब होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने की आशंका सामने आई. यह जलडमरूमध्य वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है. इसके बंद होने या बाधित होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल और गैस की कीमतों में भारी उछाल आ गया है. ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 114 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई, जो युद्ध से पहले काफी कम थी.

हाल ही में कतर की एक प्रमुख गैस सुविधा और कुवैत की तेल रिफाइनरियों पर हुए हमलों ने स्थिति को और विस्फोटक बना दिया है. कतर की यह गैस परियोजना दुनिया की बड़ी हिस्सेदारी को ऊर्जा आपूर्ति करती है. इसलिए उस पर हमला वैश्विक स्तर पर असर डाल सकता है.

खाड़ी देशों ने अपने प्रस्ताव में इन हमलों की कड़ी निंदा करते हुए ईरान से तुरंत इन्हें रोकने की मांग की है. साथ ही नागरिकों, बुनियादी ढांचे और पर्यावरण को हुए नुकसान के लिए मुआवजे की भी मांग उठाई गई है. अब पूरी दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि संयुक्त राष्ट्र इस संकट पर क्या कदम उठाता है.

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