Bangladesh Election : वोटिंग के दिन हुई थी कम से कम 18 हत्याएं...बांग्लादेश में बिना खून- खराबे के क्यों नहीं होते कोई चुनाव ?
बांग्लादेश 12 फरवरी को अपने ऐतिहासिक आम चुनाव के लिए तैयार है, जो पूर्व पीएम शेख हसीना के अपदस्थ होने के बाद पहला चुनाव है. छात्र आंदोलन के बाद से बांग्लादेश में मुहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार चल रही है. 2014 का चुनाव बहिष्कार और हिंसा से प्रभावित था, जहां कम मतदान और कई मौतें हुईं. अब इस चुनाव के होने से लोकतंत्र की नई शुरुआत होने की उम्मीद है.

नई दिल्ली : आज बांग्लादेश एक महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़ा है. 12 फरवरी 2026 को होने वाला आम चुनाव देश के इतिहास में ऐतिहासिक होगा. यह चुनाव पिछले साल अगस्त 2024 में छात्रों के नेतृत्व वाले आंदोलन के बाद पहला राष्ट्रीय मतदान है, जिसने लंबे समय तक सत्ता संभालने वाली शेख हसीना को सत्ता से हटा दिया. नोबेल पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार ने देश को संभाला है. यह चुनाव स्वतंत्र और निष्पक्ष होने की उम्मीद को जगाता है, जबकि 2014 का चुनाव हिंसा और बहिष्कार की काली यादें ताजा करता है.
2014 का दर्दनाक और विवादास्पद चुनाव
आपको बता दें कि 2014 में बांग्लादेश का आम चुनाव बेहद विवादास्पद रहा. विपक्षी दल बीएनपी ने बहिष्कार किया, जिससे कई सीटें बिना मुकाबले जीती गईं. मतदान के दिन हिंसा भड़की, जिसमें कम से कम 18 लोग मारे गए थे. कई मतदान केंद्र जला दिए गए. विपक्ष ने हड़ताल और प्रदर्शन किए, जिससे देश में अराजकता फैल गई. यह चुनाव लोकतंत्र पर गहरा सवाल उठाता रहा.
2011 में खत्म हुई केयरटेकर सरकार की व्यवस्था
दरअसल, 2006-2008 के संकट के बाद अवामी लीग ने 2011 में केयरटेकर सरकार की व्यवस्था खत्म कर दी. पहले यह व्यवस्था धांधली रोकने के लिए थी, लेकिन सत्ता में आने के बाद अवामी लीग ने इसे हटा दिया. बीएनपी ने इसका विरोध किया और चुनाव केयरटेकर सरकार के तहत कराने की मांग की. सरकार ने इनकार किया, जिससे तनाव बढ़ा.
अक्टूबर 2013 से विपक्ष ने हड़ताल और ब्लॉकेड शुरू किए. खालिदा जिया ने चुनाव बहिष्कार का ऐलान किया. 5 जनवरी 2014 को मतदान के दौरान पुलिस फायरिंग से कई मौतें हुईं. रंगपुर और निलफामारी में प्रदर्शनकारियों पर गोली चली. विपक्ष ने इसे फर्जी चुनाव बताया. मानवाधिकार संगठनों ने हिंसा की निंदा की.
लीग ने 300 में से 232 सीटें जीतीं थी
मतदान प्रतिशत सिर्फ 39.8% रहा. अवामी लीग ने 300 में से 232 सीटें जीतीं, जिनमें से आधी बिना विरोध के मिलीं. कई जिले बिना मुकाबले तय हो गए. खालिदा जिया को घर में नजरबंद किया गया. यह चुनाव बांग्लादेश के लोकतांत्रिक इतिहास में एक काला अध्याय बना. अब 2026 का चुनाव छात्र आंदोलन की जीत के बाद हो रहा है. यूनुस सरकार ने सुधारों का वादा किया है. लोग स्वतंत्र मतदान की उम्मीद कर रहे हैं. 2014 की गलतियों से सबक लेकर देश आगे बढ़ सकता है. यह चुनाव बांग्लादेश के लोकतंत्र के भविष्य को तय करेगा.


