Bangladesh Election : BNP और जमात में कड़ा मुकाबला...हिंदू समुदाय को लुभाने की कोशिश, जानिए भारत-चीन संबंधों को कैसे तय करेगा परिणाम ?

बांग्लादेश में 12 फरवरी 2026 को संसदीय चुनाव होने जा रहे हैं, जो देश के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ है. शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद यह पहला बड़ा मतदान है, जिसमें बीएनपी और जमात-ए-इस्लामी मुख्य मुकाबले में हैं. 12.7 करोड़ मतदाता 300 सीटों के लिए वोट डालेंगे, साथ ही संवैधानिक सुधारों पर रेफरेंडम भी होगा.

Utsav Singh
Edited By: Utsav Singh

नई दिल्ली : बांग्लादेश 12 फरवरी 2026 को संसदीय चुनाव के लिए तैयार है. यह देश का सबसे महत्वपूर्ण चुनाव है, जो 2024 के छात्र आंदोलन के बाद पहला बड़ा मतदान है. अगस्त 2024 में शेख हसीना की सरकार गिरने और उनकी अवामी लीग पर प्रतिबंध के बाद बीएनपी और जमात-ए-इस्लामी मुख्य मुकाबले में हैं. मुहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार ने चुनाव कराने की तैयारी की है. 12.7 करोड़ मतदाता 300 सीटों के लिए वोट डालेंगे. साथ ही संवैधानिक सुधारों पर रेफरेंडम भी होगा.

BNP और जमात का कड़ा मुकाबला

आपको बता दें कि बीएनपी को जीत की उम्मीद ज्यादा है. तारिक रहमान की वापसी और खालिदा जिया की मौत ने पार्टी को नई ताकत दी है. जमात-ए-इस्लामी गठबंधन में मजबूत चुनौती दे रही है. जमात को अपना अब तक का सबसे अच्छा प्रदर्शन मिल सकता है. दोनों पार्टियां एक-दूसरे पर तंज कस रही हैं. बीएनपी जमात को 1971 की आजादी के दौरान पाकिस्तान का साथ देने का आरोप लगाती है.

2024 के आंदोलन में जेन-जेड ने बड़ी भूमिका

दरअसल, अगस्त 2024 के आंदोलन में जेन-जेड ने बड़ी भूमिका निभाई. नेशनल सिटिजन पार्टी (एनसीपी) जमात के साथ गठबंधन में है. युवा मतदाता भ्रष्टाचार और अर्थव्यवस्था को प्राथमिकता दे रहे हैं. यह चुनाव जेन-जेड से प्रेरित माना जा रहा है. कई युवा कहते हैं कि यह 2009 के बाद पहला असली प्रतिस्पर्धी चुनाव है.

अवामी लीग के मतदाताओं का महत्व

अवामी लीग पर प्रतिबंध है, इसलिए उसके समर्थक अब बीएनपी या जमात की ओर देख रहे हैं. दोनों पार्टियां इन वोटों को लुभाने की कोशिश में हैं. थाकुरगांव के नेता रमेश चंद्र सेन की मौत के बाद दोनों के नेता उनके घर पहुंचे. हिंदू मतदाता भी निर्णायक हो सकते हैं. बीएनपी को हिंदुओं में ज्यादा स्वीकार्यता है, जबकि जमात को अपनी छवि सुधारनी होगी.

नतीजा, भारत और चीन के रिश्तों पर असर डालेगा 

चुनाव का नतीजा भारत और चीन के रिश्तों पर असर डालेगा. बीएनपी को भारत के करीब माना जाता है. जमात की जीत से पाकिस्तान की ओर झुकाव बढ़ सकता है. चीन ने हसीना के बाद अपनी स्थिति मजबूत की है. मतदाता भ्रष्टाचार, रोजगार और अर्थव्यवस्था पर फोकस कर रहे हैं. सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम हैं, लेकिन हिंसा की आशंका बनी हुई है. यह चुनाव बांग्लादेश के लोकतंत्र की नई शुरुआत साबित हो सकता है.

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