1.36 करोड़ वोटरों का कटने वाला था नाम! सुप्रीम कोर्ट ने एक हफ्ते का बढ़ाई डेडलाइन; SIR को लेकर सख्त आदेश जारी

आज 9 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने ममता बनर्जी को सख्त चेतावनी दी. साथ ही कोर्ट ने SIR से जुड़े आवेदनों की जांच और आंकड़ों को अंतिम रूप देने की समय सीमा को एक सप्ताह बढ़ा दिया है.

Sonee Srivastav

नई दिल्ली: सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार को स्पष्ट चेतावनी दी कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया में किसी भी तरह की रुकावट या बाधा बर्दाश्त नहीं की जाएगी.

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि प्रक्रिया को समय पर पूरा होना चाहिए और कोई राज्य इसमें बाधा नहीं डालेगा. कोर्ट ने कहा, "हम वास्तविक समस्याओं का समाधान करेंगे, लेकिन SIR रुकने नहीं देंगे."

समय सीमा में एक सप्ताह का विस्तार

कोर्ट ने एसआईआर से जुड़े आवेदनों की जांच और आंकड़ों को अंतिम रूप देने की समय सीमा को एक सप्ताह बढ़ा दिया है. मूल रूप से यह प्रक्रिया 14 फरवरी को पूरी होनी थी, लेकिन अब अतिरिक्त समय मिलने से अंतिम मतदाता सूची प्रकाशन में देरी हो सकती है. यह फैसला इसलिए लिया गया क्योंकि नए अधिकारियों की नियुक्ति और दस्तावेज सत्यापन में अधिक समय लग सकता है.

बंगाल सरकार की मांग पर कोर्ट का जवाब

पश्चिम बंगाल सरकार ने व्हाट्सएप पर जारी निर्देशों को बंद करने, सभी आदेशों को आधिकारिक रूप से चुनाव आयोग की वेबसाइट पर डालने और सूक्ष्म पर्यवेक्षकों को हटाने की मांग की थी. राज्य ने 8,505 ग्रुप बी अधिकारियों को नियुक्त करने का प्रस्ताव दिया. 

वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंहवी ने कहा कि बाहर से आए सूक्ष्म पर्यवेक्षक स्थानीय संस्कृति और हालात से अनजान हैं. कोर्ट ने इन मांगों पर विचार किया और सूक्ष्म पर्यवेक्षकों को केवल सहायता देने वाले की भूमिका बताई, अंतिम फैसला निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ERO) का ही होगा. 

चुनाव आयोग की चिंताएं

चुनाव आयोग के वरिष्ठ अधिवक्ता ने ईआरओ की नियुक्ति पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि केवल 64 अनुभवी अधिकारियों की नियुक्ति हुई, बाकी वेतन के आधार पर. इंजीनियर जैसे अधिकारी न्यायिक फैसले लेने के लिए तैयार नहीं हैं. कोर्ट ने राज्य सरकार को इन अधिकारियों को जल्द रिपोर्ट करने का निर्देश दिया और प्रक्रिया में पारदर्शिता पर जोर दिया. 

मतदाता सूची की स्थिति

एसआईआर में 7.08 करोड़ मतदाताओं का मसौदा तैयार है. 6.75 करोड़ का मानचित्रण हो चुका है, लेकिन 32 लाख का नहीं हुआ और 1.36 करोड़ को "तार्किक विसंगति" में रखा गया. कई मामलों में नाम की छोटी गलतियां जैसे "दत्ता" और "दत्ता" कारण हैं.

कोर्ट ने कहा कि सत्यापन के बाद देखा जाएगा कि कितने नोटिस रद्द होते हैं. अगर ज्यादातर रद्द हुए तो छोटी गलतियां गलत साबित होंगी. कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई जारी रखने का फैसला किया है. 

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