'पुरस्कार सरकार नहीं, स्वतंत्र नोबेल कमेटी तय करती है...', ट्रंप के नोबेल वाले मैसेज पर नॉर्वे PM का पलटवार
नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गाहर स्टोरे ने कहा है कि सरकार का नोबेल पुरस्कार देने वालों के चयन में बिल्कुल कोई हाथ नहीं है. यह प्रतिष्ठित पुरस्कार पूरी तरह स्वतंत्र नोबेल कमिटी द्वारा दिया जाता है, न कि नॉर्वे की राजनीतिक सत्ता द्वारा.

नई दिल्ली: नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गार स्टोरे ने सोमवार को एक बयान जारी कर पुष्टि की कि उन्हें रविवार दोपहर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का एक टेक्स्ट मैसेज मिला. इस संदेश में ट्रंप ने कहा कि ग्रीनलैंड को अपने नियंत्रण में लेने की उनकी कोशिश का एक कारण उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार न मिल पाने की निराशा भी है.
नॉर्वेजियन प्रधानमंत्री ने ट्रंप को जवाब देते हुए यह स्पष्ट कर दिया है कि नोबेल शांति पुरस्कार के चयन में नॉर्वे सरकार की कोई भूमिका नहीं होती. उन्होंने जोर देकर कहा कि यह पुरस्कार पूरी तरह स्वतंत्र नोबेल समिति द्वारा दिया जाता है और इसका राजनीतिक निर्णयों से कोई संबंध नहीं है.
नोबेल पर सरकार की भूमिका
प्रधानमंत्री जोनास गार स्टोरे ने अपने बयान में कहा कि मैंने राष्ट्रपति ट्रंप समेत सभी को स्पष्ट रूप से समझा दिया है कि यह पुरस्कार नॉर्वे सरकार द्वारा नहीं बल्कि एक स्वतंत्र नोबेल समिति द्वारा प्रदान किया जाता है. उन्होंने बताया कि ट्रंप का यह संदेश उस समय आया, जब उन्होंने और फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब ने अमेरिका द्वारा प्रस्तावित टैरिफ बढ़ोतरी का विरोध करते हुए ट्रंप से संपर्क किया था.
टैरिफ विवाद के बीच ट्रंप का संदेश
स्टोरे के अनुसार, यह संदेश उसी दिन आया जब उन्होंने फिनलैंड के राष्ट्रपति के साथ मिलकर ट्रंप को एक संक्षिप्त टेक्स्ट भेजा था. इसमें नॉर्वे, फिनलैंड और अन्य यूरोपीय देशों पर प्रस्तावित अमेरिकी टैरिफ बढ़ोतरी को लेकर चिंता जताई गई थी और तनाव कम करने की अपील की गई थी.
प्रधानमंत्री ने कहा कि मैं इस बात की पुष्टि कर सकता हूं कि यह एक टेक्स्ट मैसेज है जो मुझे कल दोपहर राष्ट्रपति ट्रंप से प्राप्त हुआ था. यह उसी दिन पहले मेरे द्वारा भेजे गए एक छोटे से टेक्स्ट मैसेज के जवाब में आया था, जो मैंने और फिनलैंड के राष्ट्रपति ने भेजा था.
नोबेल न मिलने को लेकर ट्रंप का आरोप
स्टोरे के अनुसार, ट्रंप के जवाब का रुख बिल्कुल अलग था. ट्रंप ने अपने संदेश में लिखा कि यह देखते हुए कि आपके देश ने मुझे 8 युद्धों को रोकने के बावजूद नोबेल शांति पुरस्कार नहीं दिया, मुझे अब केवल शांति के बारे में सोचने की कोई बाध्यता महसूस नहीं होती. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि अब वह केवल संयुक्त राज्य अमेरिका के लिए क्या अच्छा और उचित है? इसपर ध्यान केंद्रित करेंगे.
ग्रीनलैंड पर फिर जताया अमेरिकी दावा
इसके बाद ट्रंप ने अपना रुख ग्रीनलैंड की ओर मोड़ दिया. उन्होंने डेनमार्क के अधीन अर्ध-स्वायत्त क्षेत्र ग्रीनलैंड को लेकर दावा किया कि डेनमार्क रूस या चीन से उसकी रक्षा करने में सक्षम नहीं है.
ट्रंप ने डेनमार्क के ग्रीनलैंड पर ऐतिहासिक दावे पर भी सवाल उठाया और कहा कि वैश्विक सुरक्षा के लिए अमेरिका का नियंत्रण जरूरी है. जब तक ग्रीनलैंड पर हमारा पूर्ण और समग्र नियंत्रण नहीं होगा, तब तक दुनिया सुरक्षित नहीं है.
नॉर्वे का डेनमार्क को समर्थन
नॉर्वे के प्रधानमंत्री ने बताया कि ट्रंप ने यह संदेश अन्य नाटो नेताओं के साथ भी साझा किया. उन्होंने ट्रंप के दावों को खारिज करते हुए नॉर्वे की स्पष्ट स्थिति दोहराई.


