बांग्लादेश चुनाव तय होते ही यूनुस की विदाई लगभग तय, पाकिस्तान झुकाव पर दबाव बढ़ा

बांग्लादेश ने 12 फरवरी 2026 को होने वाले संसदीय चुनाव का आधिकारिक एलान कर दिया है, जिससे पाकिस्तान समर्थक अंतरिम प्रमुख मोहम्मद यूनुस की विदाई लगभग निश्चित मानी जा रही है।

Lalit Sharma
Edited By: Lalit Sharma

चुनाव आयोग ने 12 फरवरी की तारीख घोषित कर दी है. टीवी पर संबोधन के जरिए यह जानकारी दी गई. यह 13वां संसदीय चुनाव होगा. छात्रों के आंदोलन के बाद पहला बड़ा चुनाव है. इस घोषणा से सत्ता संतुलन बदलता दिखता है. पाकिस्तान समर्थक यूनुस की भूमिका अब समाप्त मानी जा रही है. चुनाव के बाद नया नेतृत्व आएगा.

छात्र आंदोलन के बाद हालात कैसे बदले?

अगस्त 2024 में छात्र विद्रोह भड़क गया था. शेख हसीना की सरकार गिर गई थी. उन्हें देश छोड़ना पड़ा था. इसके बाद अंतरिम सरकार बनी थी. यूनुस को उसका मुखिया बनाया गया था. सोलह महीने बीत चुके हैं. अब चुनाव के साथ अध्याय बदल रहा है. यूनुस की विदाई समय का संकेत बन चुका है.

CEC ने राष्ट्र को क्या संदेश दिया?

CEC नासिर उद्दीन ने टीवी पर अपील की. उन्होंने कहा कि जनता फेक न्यूज से बचे. अफवाह चुनाव को नुकसान पहुंचा सकती है. उन्होंने कहा कि देश स्वतंत्र चुनाव कराने को तैयार है. आम चुनाव और जुलाई चार्टर रेफरेंडम साथ होंगे. 300 सीटों पर मतदान होगा. विदेश में रहने वाले ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे. आयोग ने पारदर्शिता पर जोर दिया.

पूरा चुनाव शेड्यूल कैसे तय किया गया?

नामांकन की आखिरी तारीख 29 दिसंबर है. कागजात की जांच 30 दिसंबर से चार जनवरी तक होगी. अपील जमा करने की अंतिम तारीख 11 जनवरी तय है. आयोग 12 से 18 जनवरी के बीच फैसले लेगा. उम्मीदवार 20 जनवरी तक नाम वापस ले सकेंगे. अंतिम सूची उसके बाद जारी होगी. यह प्रक्रिया राजनीतिक सरगर्मी बढ़ा रही है. मुकाबला कड़ा दिख रहा है.

यूनुस का पाकिस्तान झुकाव क्यों विवाद में है?

यूनुस ने कई फैसलों में पाकिस्तान के प्रति नरम रुख दिखाया. अंतरराष्ट्रीय हलकों में यह चर्चा का विषय बना. भारत भी इसे लेकर सतर्क है. घरेलू राजनीति में उनको तटस्थ न होने का आरोप लगा. विरोधियों ने उनकी नीतियों पर सवाल उठाए. अब चुनाव नई दिशा तय करेगा. यूनुस को हर हाल में पद छोड़ना होगा. उनका अध्याय समाप्त माना जा रहा है.

क्या बांग्लादेश में नई राजनीतिक तस्वीर बन रही है?

चुनाव घोषणा के बाद पार्टियों ने तैयारी तेज कर दी है. हसीना की वापसी को लेकर सस्पेंस है. विपक्ष सक्रिय हो चुका है. युवा नेतृत्व के उभरने की उम्मीद है. अंतरराष्ट्रीय नजरें ढाका पर टिकी हैं. जनता स्थिरता चाहती है. चुनाव सत्ता का नया संतुलन बनाएगा. कई समीकरण बदल सकते हैं.

जनता इस चुनाव को किस नजर से देख रही है?

मतदाता शांतिपूर्ण वोटिंग की उम्मीद रखते हैं. पिछले आंदोलन की घटनाएं उन्हें याद हैं. लोग बदलाव चाह रहे हैं. फर्जी खबरों से माहौल बिगड़ने का डर है. आयोग ने जिम्मेदारी की अपील की है. सुरक्षा इंतजाम बढ़ाए जा रहे हैं. जनता नई सरकार से बेहतर दिशानिर्देश की उम्मीद कर रही है.

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