शेख हसीना के तख्तापलट के बाद हिंदुओं के लिए नर्क बन गया है बांग्लादेश! 35 दिनों में हुई 11 हत्याएं

बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय के खिलाफ हिंसा बढ़ती जा रही है. पिछले 35 दिनों में कम से कम 11 हिंदुओं की हत्या हुई है, जिससे पूरा देश दहला पड़ा है.

Sonee Srivastav

नई दिल्ली: बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय के खिलाफ हिंसा की घटनाएं बढ़ती जा रही है. पिछले 35 दिनों में कम से कम 11 हिंदुओं की हत्या हुई है, जो शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद की अस्थिरता को दर्शाती है. ये हत्याएं गोली मारने, पीट-पीटकर मारने और आग लगाने जैसी क्रूर तरीकों से हुई. अंतरिम सरकार इन घटनाओं को सांप्रदायिक नहीं बताती, लेकिन मानवाधिकार संगठन और रिपोर्ट्स लक्षित हमलों की ओर इशारा करते हैं. 

हिंसा की बढ़ती घटनाएं

2 दिसंबर 2025 से शुरू हुई इस श्रृंखला में पहली हत्याएं नरसिंगदी और फरीदपुर में हुई. एक स्वर्ण व्यापारी और एक मछली व्यापारी को बेरहमी से मारा गया. 7 दिसंबर को रंगपुर में 1971 के मुक्ति योद्धा और उनकी पत्नी का गला काटकर हत्या कर दी गई. इसके बाद कुमिला में एक युवा ऑटो चालक का शव खेत में मिला.

18 दिसंबर को मयमनसिंह में दीपू चंद्र दास की लिंचिंग ने पूरे देश का ध्यान खींचा. भीड़ ने उन्हें पीटा, पेड़ से लटकाया और जला दिया. जांच में ईशनिंदा के आरोप बेबुनियाद पाए गए. 24 दिसंबर को राजबारी में अमृत मंडल को भीड़ ने मार डाला, हालांकि पुलिस ने इसे आपराधिक विवाद बताया. 29 दिसंबर को एक पैरामिलिट्री सदस्य की गोली से मौत हुई. 

नए साल की पूर्व संध्या पर शरियातपुर में एक फार्मेसी मालिक को चाकू मारकर जलाया गया, जिससे अस्पताल में मौत हो गई. 5 जनवरी 2026 को जेस्सोर में एक पत्रकार और बर्फ फैक्ट्री मालिक को गोली मारकर गला काट दिया गया. उसी दिन नरसिंगदी में एक किराना दुकानदार पर हमला हुआ, जिससे मौत हो गई. 

अंतरिम सरकार का रुख

मुहम्मद यूनुस की अगुवाई वाली अंतरिम सरकार ने इन घटनाओं की निंदा की है और कुछ गिरफ्तारियां भी हुई. सरकार का कहना है कि ज्यादातर मामले आपराधिक या राजनीतिक हैं, सांप्रदायिक नहीं. कई हत्याओं को लूट या व्यक्तिगत दुश्मनी से जोड़ा गया. हालांकि, हिंदू संगठनों और अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स में इसे लक्षित हिंसा माना जा रहा है. सरकार ने अल्पसंख्यकों की सुरक्षा का वादा किया है, लेकिन कानून-व्यवस्था की कमजोरी साफ दिख रही है.

बांग्लादेश में होने वाला है चुनाव 

बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल उठाती हैं. हिंदू समुदाय डर में जी रहा है. मानवाधिकार संगठन अल्पसंख्यक मामलों के लिए अलग मंत्रालय बनाने और सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं. भारत ने भी इन हत्याओं की निंदा की है और दोषियों को सजा देने की उम्मीद जताई है. 

बांग्लादेश में जल्द चुनाव होने वाले हैं, ऐसे में शांति बहाल करना जरूरी है. ये हत्याएं न सिर्फ समुदाय को तोड़ रही हैं, बल्कि पूरे देश की स्थिरता को खतरे में डाल रही हैं.

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