चीन ने कंडोम और गर्भनिरोधक पर लगा दिया भारी TAX...जानें जिनपिंग सरकार को क्यों लेना पड़ा ये बड़ा फैसला
घटती जन्मदर से चिंतित चीन ने कंडोम और अन्य गर्भनिरोधकों पर 13% सेल्स टैक्स लागू कर दिया है, जो 1 जनवरी 2026 से प्रभावी है. सरकार का मानना है कि इससे जनसंख्या वृद्धि को बढ़ावा मिलेगा. हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि सिर्फ टैक्स बढ़ाने से जन्मदर नहीं बढ़ेगी, क्योंकि महंगाई, रोजगार और सामाजिक कारण भी परिवार नियोजन को प्रभावित करते हैं.

नई दिल्ली : दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था चीन इस समय गंभीर जनसांख्यिकीय संकट से गुजर रहा है. कभी अत्यधिक जनसंख्या को नियंत्रित करने के लिए कठोर नीतियां अपनाने वाला चीन अब घटती जन्मदर को लेकर चिंता में है. इसी पृष्ठभूमि में शी जिनपिंग सरकार ने गर्भनिरोधकों को लेकर एक अहम और विवादित फैसला लिया है. लंबे समय से टैक्स छूट के दायरे में रहे कंडोम और अन्य गर्भनिरोधक उत्पादों पर अब 13 प्रतिशत सेल्स टैक्स लागू कर दिया गया है, जो 1 जनवरी 2026 से प्रभावी हो चुका है.
टैक्स नीति में बदलाव का कारण
गिरती जन्मदर और बढ़ती चिंता
आंकड़े चीन की चिंता को साफ दर्शाते हैं. वर्ष 2024 में लगातार तीसरे साल देश की कुल जनसंख्या में गिरावट दर्ज की गई. इसी साल केवल 95.4 लाख बच्चों का जन्म हुआ, जो 2016 के मुकाबले लगभग आधा है. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यही रुझान जारी रहा तो आने वाले दशकों में चीन को श्रमबल की भारी कमी का सामना करना पड़ेगा. इससे न केवल उत्पादन प्रभावित होगा, बल्कि पेंशन और स्वास्थ्य सेवाओं पर सरकार का खर्च भी कई गुना बढ़ जाएगा.
बुजुर्ग आबादी बन रही है चुनौती
चीन में 60 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों की संख्या 2024 में 31 करोड़ के पार पहुंच चुकी है. संयुक्त राष्ट्र के अनुमानों के अनुसार, देश की कुल आबादी में बुजुर्गों का अनुपात 20 प्रतिशत से अधिक हो गया है और वर्ष 2100 तक आधी आबादी वृद्ध हो सकती है. जानकार चेतावनी दे रहे हैं कि चीन “अमीर होने से पहले बूढ़ा” हो सकता है, जो उसकी आर्थिक रफ्तार को कमजोर कर देगा.
सरकार की दोहरी रणनीति
जहां एक ओर गर्भनिरोधकों पर टैक्स लगाकर अप्रत्यक्ष रूप से जन्मदर बढ़ाने की कोशिश की जा रही है, वहीं दूसरी ओर सरकार बच्चों के जन्म को प्रोत्साहित करने के लिए आर्थिक योजनाएं भी चला रही है. 1 जनवरी 2025 के बाद जन्म लेने वाले हर बच्चे पर सालाना 3600 युआन की सब्सिडी दी जा रही है, जिसे तीन साल बाद बढ़ाकर 10,800 युआन किया जाएगा. इसके साथ ही चाइल्ड केयर सब्सिडी को टैक्स फ्री कर दिया गया है और मुफ्त पब्लिक प्री-स्कूल योजनाएं भी शुरू की गई हैं.
विशेषज्ञों की आशंका
हालांकि कई विशेषज्ञ इस नीति को लेकर आशंकित हैं. उनका कहना है कि कंडोम और गर्भनिरोधकों को महंगा करने से जन्मदर पर खास असर नहीं पड़ेगा. उल्टा, आर्थिक रूप से कमजोर युवा जोखिम भरे फैसले ले सकते हैं, जिससे स्वास्थ्य और सामाजिक समस्याएं बढ़ सकती हैं. विशेषज्ञों के अनुसार, जन्मदर बढ़ाने के लिए केवल टैक्स नीति नहीं, बल्कि महंगाई, नौकरी की असुरक्षा और जीवनशैली से जुड़े मुद्दों पर भी ध्यान देना जरूरी है.
कुल मिलाकर, चीन की यह नई नीति देश की बदलती जनसंख्या संरचना को लेकर उसकी बेचैनी को दर्शाती है, लेकिन यह देखना अभी बाकी है कि क्या यह फैसला वास्तव में जन्मदर बढ़ाने में कारगर साबित होगा या नहीं.


