चीन बना रहा परमाणु शक्ति का खुफिया किला, बिना धमाके के बढ़ेगी न्यूक्लियर ताकत!
चीन के मियांयांग शहर में एक अत्याधुनिक लेजर-प्रज्वलित परमाणु संलयन अनुसंधान केंद्र का निर्माण किया जा रहा है. विशेषज्ञों के अनुसार, यह सुविधा बीजिंग की परमाणु हथियार डिजाइन क्षमताओं और उन्नत ऊर्जा उत्पादन तकनीकों में अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण होगी। यह परियोजना वैज्ञानिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है.

China Nuclear Fusion: चीन अपने दक्षिण-पश्चिमी शहर मियांयांग में एक विशाल लेजर-प्रज्वलित परमाणु संलयन अनुसंधान सुविधा का निर्माण कर रहा है, जो परमाणु हथियार डिजाइनों को उन्नत करने और स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है. विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना चीन की परमाणु शक्ति को बढ़ाने के साथ-साथ इसे वैश्विक ऊर्जा नवाचार में अग्रणी बनाने में मदद कर सकती है.
सैटेलाइट इमेजरी से खुलासा
बता दें कि सैटेलाइट तस्वीरों में एक विशाल परिसर नजर आया है, जिसमें चार बाहरी लेजर बे और एक केंद्रीय प्रयोगशाला कक्ष शामिल हैं. यह केंद्रीय कक्ष हाइड्रोजन समस्थानिकों जैसे ड्यूटेरियम और ट्रिटियम को नियंत्रित वातावरण में रखने के लिए डिज़ाइन किया गया है. इन समस्थानिकों पर शक्तिशाली लेजर किरणों को केंद्रित कर संलयन प्रतिक्रियाओं को उत्प्रेरित किया जाएगा, जिससे विशाल ऊर्जा उत्पन्न होगी.
अमेरिकी डिज़ाइन से मिलता-जुलता
इस सुविधा का डिज़ाइन अमेरिका की नेशनल इग्निशन फैसिलिटी (NIF) से प्रेरित बताया जा रहा है. NIF ने 2022 में वैज्ञानिक इतिहास रचते हुए संलयन प्रक्रिया के माध्यम से अधिक ऊर्जा उत्पादन का रिकॉर्ड बनाया था. विश्लेषकों के अनुसार, मियांयांग में निर्मित प्रयोगशाला NIF से लगभग 50% बड़ी है, जो इसे दुनिया की सबसे उन्नत संलयन अनुसंधान सुविधा बना सकती है.
परमाणु हथियार या स्वच्छ ऊर्जा?
1. परमाणु हथियार क्षमताओं में वृद्धि
विशेषज्ञों को चिंता है कि यह सुविधा चीन को परमाणु हथियारों के डिज़ाइन को उन्नत करने में मदद कर सकती है. "NIF-प्रकार की सुविधा वाला कोई भी देश बिना वास्तविक परीक्षणों के अपने परमाणु हथियारों को परिष्कृत कर सकता है," परमाणु नीति विश्लेषक विलियम एल्बर्क ने कहा. इस तरह की तकनीक चीन को अंतरराष्ट्रीय परीक्षण प्रतिबंधों का पालन करते हुए अपने परमाणु शस्त्रागार को गुप्त रूप से विकसित करने का मौका देती है.
2. उन्नत ऊर्जा अनुसंधान
इस परियोजना का एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू संलयन ऊर्जा उत्पादन है, जिसे "ऊर्जा क्षेत्र की पवित्र ग्रेल" माना जाता है. यदि चीन इस तकनीक में सफलता प्राप्त करता है, तो यह कार्बन मुक्त, असीमित और सस्ती ऊर्जा प्रदान कर सकता है. इससे न केवल चीन को वैश्विक ऊर्जा क्षेत्र में नेतृत्व मिलेगा, बल्कि यह दुनिया की ऊर्जा गतिशीलता को भी बदल सकता है.
चीन की बढ़ती परमाणु शक्ति और भारत के लिए चुनौती
चीन की परमाणु क्षमताएं तेजी से बढ़ रही हैं. रिपोर्ट्स के अनुसार, 2023 में चीन के पास 410 परमाणु हथियार थे, जो 2024 में बढ़कर 500 हो सकते हैं. यदि यह प्रवृत्ति जारी रही, तो चीन इस दशक के अंत तक अमेरिका और रूस की परमाणु शक्ति की बराबरी कर सकता है.
भारत के लिए यह चिंता का विषय है, क्योंकि SIPRI (स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट) की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के पास केवल 172 परमाणु वारहेड हैं, जबकि पाकिस्तान के पास 170 हैं. हालांकि भारत ने अग्नि बैलिस्टिक मिसाइल प्रणाली जैसी परमाणु वितरण प्रणालियों को उन्नत किया है, लेकिन चीन के मुकाबले भारत का परमाणु भंडार सीमित माना जाता है.
इसके अलावा, चीन की यह नई संलयन अनुसंधान सुविधा सैन्य और ऊर्जा क्षेत्र में वैश्विक संतुलन को प्रभावित कर सकती है. एक ओर, यह स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन में क्रांति ला सकती है, तो दूसरी ओर, यह परमाणु हथियार विकास को तेज करने का मार्ग भी प्रशस्त कर सकती है. क्षेत्रीय सुरक्षा विशेषज्ञों की नजरें अब इस पर टिकी हैं कि चीन इस तकनीक का आगामी वर्षों में कैसे उपयोग करता है.


