क्या सऊदी अरब के पास है गुप्त परमाणु बम? ईरान के पूर्व कमांडर ने किया सनसनीखेज दावा
ईरान के पूर्व IRGC अधिकारी ने दावा किया है कि सऊदी अरब के पास परमाणु हथियार हैं और अमेरिका व इजरायल को इसकी जानकारी है. अब्राहम अकॉर्ड से जुड़ी चर्चाओं में भी इस मुद्दे के शामिल होने का आरोप लगाया गया है.

तेहरान: मध्य पूर्व की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है. ईरान के एक पूर्व सैन्य अधिकारी ने सऊदी अरब को लेकर ऐसा दावा किया है, जिसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई बहस छेड़ दी है. उनका कहना है कि सऊदी अरब के पास परमाणु बम मौजूद है और इस बात की जानकारी अमेरिका को भी है. यह बयान ऐसे समय आया है जब क्षेत्र पहले से ही तनावपूर्ण हालात से गुजर रहा है.
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के पूर्व वरिष्ठ पदाधिकारी हुसैन कनानी मोघदम ने एक इंटरव्यू में कहा कि सऊदी अरब के पास परमाणु हथियार हैं, भले ही वह सार्वजनिक रूप से इससे इनकार करता रहा हो. अमेरिकी पत्रकार रिक सांचेज से बातचीत में उन्होंने दावा किया कि यह केवल ईरान की जानकारी नहीं है, बल्कि अमेरिका और इजरायल भी इस सच्चाई से अवगत हैं.
"We have solid intelligence Saudi Arabia has a NUCLEAR BOMB, and the U.S. and Israel are fully aware of it." - former high-ranking IRGC commander Hussein Kanani Moghadam drops a geopolitical bombshell.
We dive into the explosive claim, covert Mossad-fueled unrest, and the… https://t.co/7vJ7jRap5b pic.twitter.com/DlAcEXVQFb— Rick Sanchez (@RickSanchezTV) February 9, 2026
उनके अनुसार, सऊदी अरब लंबे समय से इस मुद्दे पर अमेरिका और इजरायल के साथ बातचीत करता रहा है. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सऊदी के परमाणु कार्यक्रम को लेकर कुछ शर्तों पर चर्चा हुई थी, जिनका संबंध इजरायल को मान्यता देने से जोड़ा गया था.
अब्राहम अकॉर्ड और परमाणु चर्चा
हुसैन कनानी मोघदम ने कहा कि इजरायल के साथ संबंध सामान्य करने वाले अब्राहम अकॉर्ड की बातचीत के दौरान सऊदी अरब के संभावित परमाणु कार्यक्रम का मुद्दा भी उठा था. उनके मुताबिक, अमेरिका की ओर से एक अनौपचारिक प्रस्ताव था, जिसके तहत सऊदी को कुछ छूट मिल सकती थी, बशर्ते वह समझौते पर हस्ताक्षर करे. उन्होंने ईरानी खुफिया सूत्रों का हवाला देते हुए दावा किया कि इस विषय पर बातचीत हुई थी, लेकिन बाद में यह प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी और मामला ठंडा पड़ गया.
सऊदी का आधिकारिक रुख
हालांकि, आधिकारिक रूप से सऊदी अरब ने कभी यह स्वीकार नहीं किया कि उसके पास परमाणु हथियार हैं. अंतरराष्ट्रीय मंचों पर वह खुद को परमाणु हथियारों से दूर बताता रहा है. फिर भी, सऊदी नेतृत्व ने कई मौकों पर यह संकेत दिया है कि यदि क्षेत्र में शक्ति संतुलन बिगड़ता है तो वह अपनी सुरक्षा के लिए कदम उठा सकता है. सऊदी अरब ने परमाणु क्षमता रखने वाले पाकिस्तान के साथ भी सुरक्षा समझौता किया हुआ है. इस समझौते के तहत दोनों देशों में से किसी एक पर हमला होने की स्थिति में सहयोग का प्रावधान है.
क्षेत्रीय हालात और आगे की स्थिति
सऊदी अरब ने अब तक अब्राहम अकॉर्ड पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं. 2023 में गाजा में हुए संघर्ष के बाद यह प्रक्रिया और भी धीमी हो गई. इजरायल और सऊदी के बीच अब तक औपचारिक कूटनीतिक संबंध स्थापित नहीं हुए हैं. ईरान के इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है. फिर भी, इस बयान ने मध्य पूर्व की राजनीति में नई चर्चा शुरू कर दी है. आने वाले समय में यह मुद्दा अंतरराष्ट्रीय मंचों पर चर्चा का विषय बन सकता है.


