अमेरिका के बढ़ते दबाव और सख्त प्रतिबंधों का असर? रूस के कच्चे तेल उत्पादन में भारी गिरावट, जानें क्यों नहीं मिल रहे खरीदार
रूस का तेल उत्पादन अब गिरावट की ओर बढ़ रहा है. अमेरिका के बढ़ते दबाव के चलते रूस को अपने कच्चे तेल को बेचना काफी मुश्किल हो गया है. नतीजा? जनवरी में भी उत्पादन में कमी देखी गई. वैश्विक बाजार में रूस की यह चुनौती काफी चर्चा में है.

नई दिल्ली: रूस को दुनिया में तेल बेचने में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है. जनवरी में रूस के कच्चे तेल के उत्पादन में कमी दर्ज की गई है, जो लगातार दूसरा महीना है जब रूस के तेल प्रोडक्शन में गिरावट आई है. यह जानकारी रखने वाले लोगों ने अपनी पहचान उजागर किए बगैर बताया कि पिछले महीने देश ने औसतन 9.28 मिलियन बैरल तेल का उत्पादन किया था.
रूस के तेल उत्पादन में गिरावट के कारण
रूस के तेल उत्पादन में गिरावट के कई कारण हैं. एक कारण यह है कि टैंकरों में रखे रूसी कच्चे तेल की मात्रा में लगातार बढ़ोत्तरी देखने को मिल रही है, जो बताता है कि रूस पर अमेरिकी प्रेशर की वजह से खरीददार ढूंढने में काफी समय लग रहा है.
भारत ने भी कम की तेल खरीद
हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति ने फरवरी के शुरुआती महीने में कहा कि उन्होंने भारत पर लगाए एक्सट्रा 25% टैरिफ को हटा दिया, जिसके बदले में भारत ने रूस से तेल खरीदना बंद कर दिया. भारत की प्राइवेट इंडियन रिफाइनरियों ने भी स्पोर्ट कार्गो की खरीद बंद कर दी है.
रूस का कच्चे तेल का स्टॉक बढ़ा
फरवरी के शुरुआत तक रूस के कच्चे तेल का स्टॉक 143 मिलियन बैरल तक पहुंच गया है, जो एक साल की तुलना में लगभग दो गुना है. यह नवंबर की तुलना में एक चौथाई से ज्यादा है.
रूस को तेल उत्पादन घटने पर क्यों सता रही चिंता?
रूस की चिंता बढ़ना लाजमी है, क्योंकि तेल के प्रोडक्शन में कमी, उसके बजट के लिए जोखिम भरा है. पिछले साल का 23% रेवेन्यू भी तेल और गैस इंडस्ट्री पर निर्भर था. जनवरी में रूसी तेल की कमाई पिछले पांच साल की सबसे निचली गिरावट पर दर्ज की गई थी.


