"पाकिस्तान से लड़ाई की उम्मीद नहीं...", पाक-अफगान तनाव के बीच तालिबान के प्रवक्ता का बयान
तालिबान प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने कहा कि अफगानिस्तान पाकिस्तान के साथ युद्ध नहीं चाहता. उन्होंने भरोसे और बातचीत के जरिए तनाव कम करने पर जोर दिया और TTP को पाकिस्तान का आंतरिक मामला बताया.

पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच सीमा पर हाल ही में बढ़े तनाव और फायरिंग की घटनाओं के बीच तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने स्पष्ट किया है कि उनकी सरकार पाकिस्तान के साथ किसी भी तरह के युद्ध की उम्मीद नहीं रखती. उनका कहना है कि अफगानिस्तान अच्छे पड़ोसी संबंधों की नीति पर कायम है और किसी भी तरह के टकराव से दोनों देशों को नुकसान होगा.
मुजाहिद ने बताया कि काबुल और इस्लामाबाद के बीच बढ़ता तनाव कई क्षेत्रों पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है और यह किसी रचनात्मक उद्देश्य को पूरा नहीं करता. उन्होंने इस स्थिति के दो संभावित कारण बताए. पहला, पाकिस्तान के कुछ हिस्सों का किसी अन्य देश के प्रभाव में काम करना. दूसरा, यह धारणा कि तालिबान सत्ता में आने के बाद पाकिस्तान के नियंत्रण में रहेगा. उन्होंने स्पष्ट किया कि यह धारणा पाकिस्तान के वास्तविक हितों का प्रतिनिधित्व नहीं करती.
पाकिस्तान के युद्ध का खंडन
जबीहुल्लाह मुजाहिद ने कहा, "यह पाकिस्तान का युद्ध नहीं है. अगर संघर्ष हो रहा है, तो यह किसी तीसरे पक्ष की ओर से थोपी जा रही है. हमलावर भाड़े के सैनिकों की तरह काम कर रहे हैं. या फिर यह गलतफहमी है कि इस्लामिक अमीरात पाकिस्तान का विस्तार है और उसके नियंत्रण में है." सुरक्षा मामलों पर मुजाहिद ने तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) को पाकिस्तान का आंतरिक मामला बताया. उनका कहना था कि TTP का मुख्यालय, कमांड जोन और नियंत्रित क्षेत्र पाकिस्तान के अंदर हैं, इसलिए उन्हें अफगानिस्तान में आने की कोई आवश्यकता नहीं है.
बातचीत और विश्वास बहाली पर जोर
तालिबानी प्रवक्ता ने दोनों देशों के बीच विश्वास बहाल करने और समस्याओं का समाधान बातचीत से करने की अपील की. उन्होंने कहा कि सीमा पर जारी प्रयासों का समर्थन और सहयोग आवश्यक है. इसके अलावा, धार्मिक विद्वानों और राजनीतिक हस्तियों ने वर्चुअल बैठक में दोनों देशों के बीच तुरंत बातचीत शुरू करने का सुझाव दिया.
तालिबान की स्वतंत्रता और युद्ध का अनुभव
मुजाहिद ने यह भी स्पष्ट किया कि तालिबान ने अफगानिस्तान में 20 साल तक चले संघर्ष में किसी विदेशी समर्थन को स्वीकार नहीं किया. उन्होंने बताया कि प्रत्येक प्रांत में लड़ाई पूरी तरह तालिबान और अफगान सैनिकों द्वारा स्वतंत्र रूप से लड़ी गई थी. उन्होंने कहा कि बाहरी ताकतों के दावे और अफगान युद्ध से जुड़े मिथक सही नहीं हैं.
तालिबान प्रवक्ता का यह बयान स्पष्ट करता है कि अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच तनाव का हल केवल बातचीत और विश्वास निर्माण के जरिए ही संभव है. उनके अनुसार, किसी भी तरह का टकराव दोनों देशों के हित में नहीं होगा और शांतिपूर्ण समाधान ही स्थायी रिश्तों की कुंजी है.


