स्पेन में धार्मिक टकराव से दहशत, ईस्टर जुलूस पर मुस्लिम भीड़ का हमला, पत्थरबाजी से तनाव

स्पेन में ईस्टर के जुलूस के दौरान मुस्लिम बहुल इलाके में जुलूस को रोके जाने से तनाव फैल गया. विवाद हिंसा में बदल गया, जिसमें पुलिस और जुलूस में शामिल लोगों पर पथराव किया गया.

Deeksha Parmar
Edited By: Deeksha Parmar

स्पेन में ईसाइयों के सबसे बड़े धार्मिक त्योहार ईस्टर के दौरान उस वक्त तनाव फैल गया जब मुस्लिम बहुल इलाकों से निकल रहे जुलूस को कुछ लोगों ने रोकने की कोशिश की. ये घटना देखते ही देखते हिंसक रूप ले गई. पुलिस के मौके पर पहुंचने के बाद झड़प हुई और हालात बेकाबू हो गए.

मामला कुछ-कुछ भारत के जहांगीरपुरी और करौली जैसी घटनाओं की याद दिलाता है, जहां धार्मिक जुलूसों पर पथराव की घटनाएं सामने आई थी. फर्क सिर्फ इतना है कि ये घटना यूरोप के स्पेन में घटी है, जहां न तो 'जय श्रीराम' के नारे लगे और न ही कोई डीजे पर 'हनुमान चालीसा' बजा रहा था.

रास्ता रोकने से शुरू हुआ विवाद

जानकारी के मुताबिक, ईस्टर का पारंपरिक जुलूस जब मुस्लिम बहुल क्षेत्र से गुजरने वाला था, तभी कुछ लोगों ने रास्ते में बैरिकेड्स लगाकर उसे रोक दिया. उनका कहना था कि 'हमारे इलाकों से इस तरह के ईसाई धार्मिक जुलूस नहीं निकल सकते.' इसी बात को लेकर दोनों पक्षों में बहस शुरू हो गई, जो जल्द ही हिंसक झड़प में बदल गई.

पुलिस के आने पर भड़की हिंसा

जैसे ही पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश की, कुछ उपद्रवी तत्वों ने पथराव शुरू कर दिया. कई पुलिसकर्मी घायल हो गए और जुलूस में भाग ले रहे श्रद्धालुओं में अफरा-तफरी मच गई. पुलिस को हालात काबू में लाने के लिए बल प्रयोग करना पड़ा.

सोशल मीडिया पर उभरा सवाल

इस घटना को लेकर सोशल मीडिया पर यूज़र्स तीखे सवाल उठा रहे हैं. एक यूज़र ने लिखा, 'अब स्पेन में कौन जय श्रीराम के नारे लगा रहा था?' वहीं दूसरे ने कहा, 'वहां DJ पर कौन बजरंगबली के भजन बजा रहा था?' लोगों का कहना है कि धार्मिक सहिष्णुता पर अब वैश्विक स्तर पर सवाल खड़े हो रहे हैं.

प्रशासन सख्त, कई गिरफ्तारियां

घटना के बाद स्पेनिश प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है. पुलिस ने उपद्रव में शामिल कई लोगों को गिरफ्तार कर लिया है. वहां के गृह मंत्रालय ने साफ किया है कि 'किसी भी धर्म या समुदाय को दूसरे के धार्मिक विश्वासों में बाधा डालने की अनुमति नहीं दी जा सकती.'

धार्मिक सहिष्णुता पर सवाल

इस घटना ने यूरोप में धार्मिक स्वतंत्रता और सहिष्णुता पर एक नई बहस छेड़ दी है. क्या धार्मिक सह-अस्तित्व अब एक चुनौती बन चुका है? क्या यह घटना यूरोप के सेकुलरिज़्म के लिए खतरे की घंटी है? विशेषज्ञ इन सवालों पर गहराई से मंथन कर रहे हैं.

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