H-1B वीजा होल्डर्स के लिए संकट, अमेरिकी कंपनियों ने भारत में फंसे कर्मचारियों को दी धमकी

अमेरिका में H-1B वीजा पर काम करने वाले कई भारतीय पेशेवर वीजा स्टैम्पिंग में देरी के कारण भारत में फंसे हुए हैं, जिससे उनकी नौकरी, सैलरी और टैक्स संबंधी परेशानियां बढ़ गई हैं.

Suraj Mishra
Edited By: Suraj Mishra

अमेरिका में H-1B वीजा पर काम करने वाले हजारों भारतीय पेशेवर इस समय गंभीर असमंजस की स्थिति से गुजर रहे हैं. वीजा स्टैम्पिंग प्रक्रिया में लगातार हो रही देरी के कारण बड़ी संख्या में H-1B वीजा धारक भारत में अटके हुए हैं. इस वजह से न सिर्फ उनकी नौकरियों पर खतरा मंडरा रहा है, बल्कि सैलरी कटौती और टैक्स से जुड़ी नई परेशानियां भी सामने आ सकती हैं. 

भारतीय वर्कर्स पर दोहरी मार 

विशेषज्ञ इसे भारतीय वर्कर्स के लिए “दोहरी मार” के रूप में देख रहे हैं, जिससे कर्मचारी और कंपनियां दोनों ही तनाव में हैं. असल में, अमेरिका ने दिसंबर 2025 से वीजा प्रक्रिया को और सख्त करते हुए सोशल मीडिया अकाउंट की जांच को अनिवार्य कर दिया. उसी दौरान कई भारतीय H-1B वर्कर्स वीजा नवीनीकरण और स्टैम्पिंग के लिए भारत आए थे. नई जांच प्रक्रिया लागू होते ही वीजा अप्वाइंटमेंट में भारी बदलाव देखने को मिला. जिन लोगों को दिसंबर के अंत या जनवरी की शुरुआत में अप्वाइंटमेंट मिलनी थी, उनकी तारीखें आगे खिसककर मार्च और अप्रैल तक पहुंच गईं. इस अचानक हुई देरी ने कई पेशेवरों को भारत में ही रुकने के लिए मजबूर कर दिया.

इमिग्रेशन विशेषज्ञों का क्या कहना है?

इमिग्रेशन विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय तक अमेरिका से बाहर रहने से H-1B वर्कर्स की नौकरी पर सीधा असर पड़ सकता है. खासतौर पर स्टार्टअप्स और छोटी कंपनियों में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए स्थिति ज्यादा जोखिम भरी है. कई भारतीय पेशेवर अब संभावित टर्मिनेशन से बचने के लिए कानूनी सलाह ले रहे हैं. कुछ अमेरिकी कंपनियों ने अपने कर्मचारियों को साफ शब्दों में कह दिया है कि पेड लीव खत्म होते ही उन्हें अमेरिका लौटना होगा, अन्यथा नौकरी जाने का खतरा है.

डेविस एंड एसोसिएट लॉ फर्म की प्रमुख सुकन्या रमन के अनुसार, कुछ मामलों में कंपनियों ने कर्मचारियों को अल्टीमेटम दिया है. उन्होंने बताया कि बड़ी कंपनियां अपने कर्मचारियों के लिए जल्द वीजा अप्वाइंटमेंट दिलाने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन छोटी कंपनियों के पास न तो पर्याप्त कानूनी संसाधन हैं और न ही इंतजार करने की क्षमता. ऐसे में वे कर्मचारियों को बिना वेतन छुट्टी लेने या इस्तीफा देने के लिए मजबूर कर रही हैं.

सरवांक एसोसिएट की अंकिता सिंह ने क्या कहा?

वीजा में देरी का असर सिर्फ नौकरी तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे परिवार भी प्रभावित हो रहे हैं. सरवांक एसोसिएट की अंकिता सिंह के मुताबिक, कई मामलों में पति या पत्नी में से कोई एक या बच्चे अमेरिका में फंसे हुए हैं, जबकि वीजा धारक भारत में अटका है. इस दौरान अमेरिका में घर का किराया, कार की लीज और अन्य खर्च लगातार चल रहे हैं, लेकिन आय या तो पूरी तरह बंद हो गई है या काफी कम हो गई है. इस अनिश्चितता ने भारतीय H-1B वर्कर्स की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं.

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