एशिया पावर इंडेक्स 2025: चीन का दबदबा बढ़ा, भारत बड़ी छलांग के साथ ‘मेजर पावर’ बना
ऑस्ट्रेलिया के प्रतिष्ठित थिंक-टैंक लोवी इंस्टीट्यूट ने अपनी बहुप्रतीक्षित एशिया पावर इंडेक्स 2025 जारी कर दिया है. इस बार की रिपोर्ट में एशिया की शक्ति-संतुलन व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिले हैं.

ऑस्ट्रेलिया के प्रतिष्ठित थिंक-टैंक लोवी इंस्टीट्यूट ने अपनी बहुप्रतीक्षित एशिया पावर इंडेक्स 2025 जारी कर दिया है, जो एशिया–प्रशांत क्षेत्र के 27 देशों की शक्ति, प्रभाव और क्षमता का गहन आकलन प्रस्तुत करता है. रिपोर्ट में सैन्य सामर्थ्य, आर्थिक प्रदर्शन, कूटनीतिक पहुंच, सांस्कृतिक प्रभाव, भविष्य की क्षमता और रणनीतिक नेटवर्क सहित आठ प्रमुख मानकों के आधार पर देशों की रैंकिंग तय की गई है.
एशिया की शक्ति-संतुलन व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव
इस बार की रिपोर्ट में एशिया की शक्ति-संतुलन व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिले हैं. चीन तेजी से क्षेत्रीय प्रभुत्व की ओर बढ़ रहा है, जबकि भारत मजबूती से उभरती शक्ति के रूप में अपनी स्थिति को और मजबूत कर रहा है. वहीं संयुक्त राज्य अमेरिका, अब तक शीर्ष पर है, लेकिन इसकी क्षेत्रीय पकड़ पिछले वर्षों के मुकाबले कमजोर पाई गई है.
विश्लेषकों ने अमेरिकी प्रभाव में आई गिरावट का कारण बीते वर्षों की नीतियों को बताया है, जिनका एशिया-प्रशांत पर व्यापक असर पड़ा. लोवी इंडेक्स के अनुसार इस वर्ष भी अमेरिका और चीन ही दो ऐसे देश हैं जो सुपर पावर की श्रेणी में शामिल हैं.
शीर्ष 10 वैश्विक शक्तियां
1. अमेरिका – 80.5
2. चीन – 73.7
3. भारत – 40.0
4. जापान – 38.8
5. रूस – 32.1
6. ऑस्ट्रेलिया – 31.8
7. दक्षिण कोरिया – 31.5
8. सिंगापुर – 26.8
9. इंडोनेशिया – 22.5
10. मलेशिया – 20.6
भारत का बढ़ता प्रभाव
रिपोर्ट बताती है कि भारत ने 40 अंकों के साथ 'मेजर पावर' कैटेगरी में मजबूत प्रवेश कर लिया है. यह प्रगति भारत की तेज आर्थिक वृद्धि और सेना के आधुनिकीकरण कार्यक्रमों का परिणाम बताई गई है. हालांकि रिपोर्ट यह भी इंगित करती है कि भारत के कूटनीतिक और आर्थिक प्रभाव को और विस्तार की जरूरत है ताकि वह अपनी वास्तविक क्षमता के अनुरूप क्षेत्रीय भूमिका निभा सके.
चीन-अमेरिका शक्ति मुकाबला
इंडेक्स में यह भी सामने आया है कि चीन और अमेरिका के बीच शक्ति का अंतर लगातार कम हो रहा है. 2020 के बाद से चीन ने कई क्षेत्रों में अपनी पकड़ मजबूत की है, जिससे यह अंतर अब अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है.
रूस की वापसी
यूक्रेन युद्ध के बाद अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों का सामना करने के बावजूद रूस ने एशिया में अपना प्रभाव फिर से बढ़ाया है. चीन और उत्तर कोरिया के साथ बढ़ते सैन्य-आर्थिक सहयोग ने मॉस्को को अपनी पुरानी स्थिति वापस पाने में मदद की और 2024 में यह एक बार फिर शीर्ष 5 में शामिल हो गया.
मध्य शक्तियों की अहम भूमिका
जापान, दक्षिण कोरिया और ऑस्ट्रेलिया जैसे देश इंडेक्स में महत्वपूर्ण मिडिल पावर के रूप में उभरे हैं. जापान का प्रभाव विशेष रूप से तकनीकी और कूटनीतिक पहलों के कारण मजबूत हुआ है.


